Category: उत्तर अमेरिका

कलूटी रात – (कविता)

कलूटी रात लोग कहने लगे,“तुम्हारे चेहरे का नूरकहाँ जा रहा है?”अपने टोकने लगे“ये आँखों के नीचे काला बादलकहाँ से आ रहा है?” कैसे समझाऊँ लोगों कोकि नूर अपने लूट के…

कनिका वर्मा – (परिचय)

कनिका वर्मा जन्म स्थान : दिल्ली, भारत वर्तमान निवास : टोरोंटो, कनाडा शिक्षा : पीएच.डी.(टैक्सस स्टेट यूनिवर्सिटी) संप्रति : प्रोफ़ेसर, रिसर्च स्कॉलर, रेडियो जॉकी/रेडियो होस्ट प्रकाशित रचनाएँ : प्रथम अँग्रेज़ी…

वह पेड़! – (कविता)

वह पेड़! बड़ा अजीब सा लगा जब चलते-चलते,एक बड़ा सा पेड़ सामने आ गया,ठोकर लगते लगते बची,“देख कर नहीं चलते क्या भाई?” पेड़ बोला। “जल्दी में था, सोचाकिनारा कर निकल…

आशीर्वाद – (कविता)

आशीर्वाद वह जल्दी से मेरे पैर छूकर चला गया,आशीर्वाद के शब्द बोलती मैं उसकेपीछे-पीछे आई तो पर वह चलता गयामैं सोचती रही उसने सुनें तो होंगे,मेरे वे शब्द जो मन…

तुम! – (कविता)

तुम! तुम मेरी हर कहानी में हो,हर ज़बानी में हो,हर हार, हर जीत,हर दुख, हर सितम में तुम ही तो हो! तुम्हारे इर्द गिर्द,पता नहीं कितनी कहानियाँ बुनी हैं मैंने,सीधी…

वह कोने वाला मकान – (कविता)

वह कोने वाला मकान अब मैं उस कोने वालेमकान में नहीं रहती हूँ,अब उस मकान में कोई और ही रहता है। उस मकान में आकर उसे घर बनाया,सजाया सँवारा,धीरे धीरे…

जीवन की साँझ – (कविता)

जीवन की साँझ जीवन की साँझ का प्रहर,ढल चली है दोपहर।बयार मंद-मंद है,धूप भी नहीं प्रखर॥ यह समय भला-भला,नये से रंग में ढला।जीवन का नया मोड़ है,न कोई भाग दौड़…

पंख बन – (कविता)

पंख बन पंख बन, परवाज़ बनख़ुद अपने सर का ताज बन,सुन गुनगुना रही जो ज़िन्दगीइस मौसीक़ी का साज़ बन तू उज्जवला, सहस्रज्वला,न अश्रु स्वेद छलछला,प्रतिबिम्ब बन कर जी चुकीअब रौशनी…

डरपोक खिड़की – (कविता)

डरपोक खिड़की बंद वो खिड़की थीबरसों से यूँ ही पड़ी थीकमरे के कोने में डरतीछुपी सी खड़ी थी कभी झाँकती भी जो बाहरतो बंद कपाटों से कुछदिखता नहीं था बड़ा…

ओ पथिक – (कविता)

ओ पथिक दूर तक निगाह में जब न कोई दरख़्त होचिलचिलाती राह में धूप बड़ी सख़्त होये मान आगे मिलेंगे गुलिस्ताँन रुक पथिक, न पाँव तेरे सुस्त हों कभी धुँधले…

चाय और वो – (कविता)

चाय और वो सुनो— ये दो चाय इधर भिजवानाज़रा जल्दी!मैं जल्दी में था,आख़िर बाल श्रम पे राष्ट्रीय गोष्ठी थी शहर मेंमेरी कविताओं पे चर्चा भी थीइस लिए जल्दी में था…

अम्बिका शर्मा – (परिचय)

अम्बिका शर्मा जन्म-स्थान: आगरा, उ. प्र. वर्तमान निवास: मोंट्रीऑल/कैनेडा शिक्षा: स्नातकोत्तर बायोटेक्नॉलोजी प्रकाशित रचनाएँ: अहा ज़िंदगी, नव भारत टाइम्ज़, नवल उत्तराखंड लेखन-विधाएँ: कविता, गीत, नज़्म उल्लेखनीय गतिविधियाँ: संयोजक कबीर सेंटर…

साथी – (कविता)

साथी रहने दो प्रिय, मत लो मेरीलोहे की बेडौल कड़ाही।यह छिछली सी, बड़ी कड़ाही,दादी से माँ ने पाई थी।भारत छोड़ चली थी जब मैं,साथ इसे भी ले आई थी। अपनी…

दुविधा – (कविता)

दुविधा क्यों लिखूँ, किसके लिये?यह प्रश्न मन को बींधता है। लेख में मेरे जगत कीकौन सी उपलब्धि संचित?अनलिखा रह जाय तोहोगा भला कब, कौन वंचित?कौन तपता मन मरुस्थलकाव्य मेरा सींचता…

मेरा प्यार – (कविता)

मेरा प्यार टेक कर घुटने, झुका सिर,प्रेम का जो दान माँगे,हो किसी का प्यार लेकिन,प्यार वह मेरा नहीं है। रख नहीं पाया मान निज जो,प्यार वह कैसे करेगा?हीनता से ग्रस्त…

पीला पत्ता – (कविता)

पीला पत्ता रुको साथी, हटा लो हाथ को,न तोड़ो, छोड़ दो, पीले पड़े इस पात को। कहा तुमने, हरित इस डाल पर,यह अब नही सजता।नये, चिकने, चमकते किसलयों के बीच,है…

किस किस को ले डूबा पानी – (कविता)

किस किस को ले डूबा पानी किस किस को ले डूबा पानीपानी आख़िर निकला पानी ऐसे कब बरसा था पहलेअब के बरसा इतना पानी कच्चे घरों पर क्यूँ बरसा थापागल…

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था – (कविता)

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था हुई मुद्दत कोई आया नहीं थाये घर इतना कभी सूना नहीं था वो मेरा दोस्त था लेकिन कभी वोबुरे वक़्तों में काम आया नहीं…

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ – (कविता)

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआइक दिया मुंडेर पर जलता हुआ एक पत्ता शाख से गिरता हुआइक परिंदा आस्माँ छूता हुआ एक तितली फूल…

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं – (कविता)

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं जहाँ में इक तमाशा हो गए हैंहमें होना था क्या, क्या हो गए हैं नुमाइश कर रहे हैं ज़िन्दगी कीनज़ारा अच्छा ख़ासा हो…

Translate This Website »