Category: उत्तर अमेरिका

सुरेन्द्र गंभीर – (परिचय)

डॉ. सुरेन्द्र गंभीर वरिष्ठ प्राचार्य (1973-2008) – यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया अध्यक्ष भाषा-समिति – अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिन स्टडीज़ (1998-2007) विषय – सामाजिक भाषा-विज्ञान, भाषा-संरक्षण, भाषा-ह्रास, भाषा-अधिग्रहण, संस्कृत साहित्य शोध-क्षेत्र –…

हिन्दी शिक्षण की मार्गदर्शिका – (ब्लॉग)

हिन्दी शिक्षण की मार्गदर्शिका डॉ. सुरेन्द्र गंभीर, यूनिवर्सिटि ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया मातृभाषा हो या परभाषा – उसके अधिग्रहण की चार विधाएं होती हैं – बोलना, दूसरों की बात समझना, पढ़ना, लिखना।…

एक डॉक्टर की डायरी का पन्ना – (कहानी)

एक डॉक्टर की डायरी का पन्ना विजय विक्रान्त, कनाडा पिछली रात पार्टी से वापस आते आते बहुत देर हो गई थी। नींद पूरी न होने के कारण अभी बिस्तर पर…

यमराज की डायरी का पन्ना – (कहानी)

यमराज की डायरी का पन्ना – विजय विक्रान्त, कनाडा यमराज के पद पर अपनी नौकरी लगने के कुछ दिन बाद ही जब मैं ने अपने काम और ज़िम्मेवारियों के बारे…

संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश: एक समग्र विश्लेषण – (शोध आलेख)

संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश: एक समग्र विश्लेषण डॉ. राकेश कुमार, कार्मेल, इंडिआना, संयुक्त राज्य अमेरिका प्रस्तावना हिंदी, एक प्रमुख भारतीय भाषा, जो वैश्विक…

वैश्विक युग में हिंदी भाषा: एक नई दिशा की ओर – (आलेख)

वैश्विक युग में हिंदी भाषा: एक नई दिशा की ओर डॉ. राकेश कुमार, कार्मेल, इंडियाना, अमेरिका, प्रस्तावनाहिंदी भाषा भारत के भाषाई परिप्रेक्ष्य में एक प्रमुख स्थान रखती है और इसे…

राकेश कुमार – (परिचय)

डॉ. राकेश कुमार डॉ. राकेश कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के मनकापुर में हुआ। उन्होंने 1991 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की और उसके…

पापा आप कहीं नहीं गए – (संस्मरण)

पापा आप कहीं नहीं गए – सरस दरबारी पापा को हमारा साथ छोड़े पूरे 18 साल हो गए। पर इन सालों में कभी नहीं लगा की पापा हमारे साथ नहीं—…

सरस दरबारी – (परिचय)

सरस दरबारी जन्मतिथि : 09 सितम्बर 1958 शिक्षा : मुंबई विश्व विद्यालय से राजनितिक विज्ञान में स्नातक लेखन की विधाएँ : कविताएँ, दोहे, हाइकु, हाईगा, माहिया, गीत, छंदमुक्त रचनाएँ ,कहानियाँ…

अमेरिका में विश्व भाषा मानक आधारित पाठ्यक्रम रचना – (आलेख)

अमेरिका में विश्व भाषा मानक आधारित पाठ्यक्रम रचना – सुषमा मल्होत्रा, सहायक व्याख्याता, क्वींस कॉलेज, न्यूयॉर्क वैश्वीकरण के इस युग में भारत की राष्ट्रीय और आधिकारिक भाषा और एशिया की…

तुलसी का पौधा – (कविता)

– सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका तुलसी का पौधा वो खुला सा आंगनउस में कई तरह के पौधेफल के कुछ फूल केमगर मेरा सबसे मनपसन्दथा तुलसी का पौधारखती थी दादीउसे सदा एक…

भारतम्बा – (कविता)

– सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका भारतम्बा भारत की मातृ देवीहो सब की तुम माताजन जन कहे तुम्हे जननीअपनी सर्वश्रेष्ठ भारत मातामाँ सुन लो सब की पुकारगिरे हुओं को फिर से उठाओ…

 वसंत – (कविता)

– सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका वसंत देखो फिर वसंत है आयाअपने संग मधुरता लाया लद गइ हर तरु की डालीफूलों संग हवा मतवालीकुदरत का है रूप सलोनाकिसने किया हसीन टोना कोयल…

प्रज्ज्वलित शिकारा – (कविता)

–सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका प्रज्ज्वलित शिकारा स्याही सी काली रात छा रही हैधरा से ज्वालाएं ऊपर आ रही हैंहर ओर है मातम का समांधू-धू करता धुआँ उठ रहा हैउसके बीच कोई…

अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस – (कविता)

– सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस आज है अंतरराष्ट्रीय दिवसमज़ेदार अपनी चाय का,बेहतर जीवन जीने के लिएस्वाद लो हमारी चाय का। ठण्ड पड़ती हो या गर्मीआंख नहीं खुलती है…

सुषमा मल्होत्रा – (परिचय)

सुषमा मल्होत्रा न्यूजर्सी , अमेरिका सेवानिवृत्त सहायक प्राचार्य, न्यूयॉर्क शहर शिक्षा विभाग पूर्व सहायक व्याख्याता, क्वींस कॉलेज, सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क ईमेल- sushmam626@gmail.com शिक्षा: संप्रति: a) एडजंक्ट लेक्चरर (सहायक व्याख्याता):…

सात पहाड़ियों पर बसा शहर : रोम – (यात्रा संस्मरण)

सात पहाड़ियों पर बसा शहर : रोम शशि पाधा, वर्जीनिया, यू एस ए याद है बचपन में मैंने अपने जन्म स्थान जम्मू शहर की मुबारक मंडी के राजमहलों के बीचोबीच…

मेरी माँ – (पत्र)

मेरी माँ – आशा बर्मन यह भी कैसी विडम्बना है कि माँ तुमको पत्र तो लिख रही हूं यह जानते हुए भी कि यह पत्र कभी तुम तक पहुंचेगा तो…

प्रश्न – (कविता)

-आशा बर्मन, कनाडा प्रश्न यह प्रश्नचिन्ह क्यों बार-बार ?क्यों उसे जीत, क्यों मुझे हार ?यह प्रश्न उठे क्यों बार-बार ? जीवन में जो भी किये कर्म,तत्समय लगा था, वही धर्म…

तुमने मुझको नहीं मनाया – (कविता)

-आशा बर्मन, कनाडा तुमने मुझको नहीं मनाया तुमने मुझको नहीं मनाया बात ना कोई ऎसी भारी.हो गयी तकरार हमारी,सीमा पार हुई जब बातें,चुप रहने की मेरी बारीयत्न किया, पर थमें…

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