तिलक करें दशरथ नंदन का – (कविता)
तिलक करें दशरथ नंदन का (चौपाई छन्द) सब भक्तों के पालनहारे, गूँज रहे उनके जयकारे।परमशक्ति सबके रखवाले, जय हो नीली छतरी वाले।आदि-अनंत शक्ति के दाता, धर्म-कर्म-वेदों के ज्ञाता। मितभाषी तुम…
हिंदी का वैश्विक मंच
तिलक करें दशरथ नंदन का (चौपाई छन्द) सब भक्तों के पालनहारे, गूँज रहे उनके जयकारे।परमशक्ति सबके रखवाले, जय हो नीली छतरी वाले।आदि-अनंत शक्ति के दाता, धर्म-कर्म-वेदों के ज्ञाता। मितभाषी तुम…
उदित स्वर्णिम भोर (रूपमाला छन्द) चैन की वंशी बजाती, नित्य स्वर्णिम भोर।वो सुहाना युग पुराना, खो गया किस छोर? खत्म आँखों से शरम ह स्वार्थ ठेकेदार।चढ़ गया मुख पर मुखौटा,…
अविचल रहना साधे मन को (वामा छन्द) मन व्यग्र बड़ा रातों जगता।सब उथल-पुथल जीवन लगता।प्रतिकूल परिस्थिति क्षुब्ध करे।चिंता विपदा के रंग भरे। तब हार नहीं मन मार नहीं।मन हार करे…
माता-पिता माता-पिता आज केआज के युग का गहन संतापमाता-पिता का अस्तित्व तो हैपर रहते हैं वो चुपचाप!यूँ तो देश-विदेश में भ्रमण कर आयेंपरंतु चैन अपने स्वयं के घरों में ही…
अमलतास अमलतास की स्वर्णिम आभामानो प्रकृति ने पहना फूलों का झालाचमकीलाहवा की इशारों पर नाचतासुंदरता को यूँ ही उड़ेलताजब जब खिलताआकर्षण का केंद्र बन जाता हैसुनहरा अमलतास का वृक्ष न्यारा!…
विदेश में मज़दूर दोपहर की तपती धूप में मोटा पीला टोप (हेलमेट) चढ़ाएंपसीने में लथपथतन्वंगा-साभू-खनन कार्य में तल्लीन मिलेगा एक मज़दूर!! प्रकृति के प्रचंड कोप को निज शीश पर नि:शब्द…
-आराधना सदाशिवम ***** नीला समंदर हिलोरे लेता गहरा नीला समंदरअसीम रत्नराशि लिए समंदरबिखरा हुआ है मेरे आगेबहुत दूर तक जाता हैयह नीला समंदर! ना जाने कहाँ से आता है!?ना जाने…
आज की शाम, वीर भारतीयों के नाम -विजय विक्रांत 14 फ़रवरी, 2022 की शाम को सेठ द्वारका प्रशाद जी की कोठी की जब घण्टी बजी, तो उनकी बेटी मालती ने…
मेरी शादी इस कथा को ध्यान लगा के सुनो,मैं प्रेम की गाथा सुनाता हूँ ।कैसे शादी हो गई मेरीकविता में पढ़ के सुनाता हूँ ।। बेटा जब बने अभियन्ता,पिताश्री ने…
अपने अपने करम गंगा तट पर एक स्वामी जी,थे ध्यान मगन, प्रभु पूजा में ।बेला थी, ब्रह्म महूरत की,सुधबुध की न सूझ थी पूजा में ।१। था शांत वहाँ का…
खोज ईश्वर की ईश्वर को खोजते फिरते हैंईश्वर कहाँ है? ईश्वर कैसा है?जिस मूर्ति की पूजा करते हैंक्या ईश्वर बिल्कुल वैसा है? देश, धर्म, जाति के आधार परईश्वर का विभाजन…
कृतज्ञता जो अपने आहारया अस्तित्व के लिएदूसरों पर निर्भर रहते हैंपरजीवी कहलाते हैंप्रायः इस वर्गीकरण के अंदरजीव-जंतु या वनस्पति हीक्यों आते हैं? कितना आश्रित है मानवफिर भी दंभ लिए इठलाता…
दो तटों की सीमा में बद्धबहती पूर्ण स्वतंत्र तरंगिणीनहीं बाँधती स्वयं को किसी तट सेनिरंतर गतिमान कल्लोलिनी आ जाता है यदि कोई अवरोध तोबदल लेती है मार्ग सहजता सेसतत प्रवाह…
कैसे कहूँ पराया तुमको एक समान चलती हैं श्वासेंवही प्राण ऊर्जा है तुम में मुझ मेंहै एक समान हृदय में स्पन्दनवही लाल रुधिर है तुम में मुझ में पृथ्वी, जल,…
परिवर्तन हे बुद्धिमान मानव!थोड़ा ठहर…अपने चारों ओर देख,प्रकृति के साथ एकरूप होदेख सब कुछ निरंतर बदल रहा हैकुछ भी स्थायी नहीं हैजो स्थाई है, वह है बस परिवर्तनदेख तो ….दिन…
बूंदों से वार्तालाप मेरे आँगन की खिड़की पर कलवर्षा की बूंदों ने दस्तक दीआहिस्ता से चटखनी खोलकर मैंनेउन्हें अंदर आने की दावत दी पहले कुछ शर्मायीं, सकुचायींफिर मुसकुराकर धीमे सेबैठ…
प्रेम और घृणा प्रेम और घृणा दोनों ही बंधन हैंजो बाँध देते हैं हमें एक दूसरे सेपरंतु……..प्रेम में स्वतंत्रता है, घृणा में है जकड़नप्रेम में विस्तार है, घृणा में है…
वशीकरण पल भर में बदल जाते हैं मौसम चेहरे परक्षण भर में ले आता है मुस्कान वह अधरों पर है आधिपत्य आजकल सर्वश्रेष्ठ सिंहासन परगर्व से विराजमान है सभी के…
चलिए वसंत बन जाएं ऋतुराज वसंत जब आता हैजीवन, जीवंत हो जाता हैप्रकृति के विराट आँचल परसौंदर्य विस्तार पा जाता है अमराई से आती मधुर ध्वनिगूँजता कोयल का कूजनपल्लवित सुगंधित…
विवाह विवाह की वरमालामात्र पुष्पों का हार नहींयह जयमाला हैएक दूसरे की जय कीएक दूसरे को चुन लेने कीएक दूसरे के सम्मान की विवाह का गठबंधनमात्र दो दुपट्टों की गांठ…