Category: विधा

क्षणिकाएँ – (कविता)

क्षणिकाएँ 1. ढलते सूरज का गुलाबी दुपट्टासफ़ेद बर्च से लिपटा लिपटासजीला ओक उन्हें देख मुसकाएगुलाबी गुलाबी ख़ुद भी हो जाए 2. जैसे रूई के बादल सेयत्र तत्र छि तरे-छितरेस्नो फ़्लेक…

भुवनेश्वरी पांडे की हाइकु – (हाइकु)

भुवनेश्वरी पांडे की हाइकु 1. कैसा नगरकोई ना पहचानेहम घूमते 2. केवल मकाँबीच कोई सड़कबैठोगे कहाँ? 3. अकेला पत्तालहराता रहा हैशीत ऋतु में। 4. थोड़ी सी छाँवतेरी नीली छतरी,हमें भी…

दे सको तो दे दो – (कविता)

दे सको तो दे दो जो कभी देने पर आओ, तो देना,मुझे मेरी स्वतंत्र उड़ान,मेरी कोमल आशायें,मेरी आत्मा की आवाज़,मेरी अनुभूति,मेरी अभिव्यक्ति। जो कभी देने पर आओ, तो देना,मेरी चाहत…

रूपांतरित – (कविता)

रूपांतरित मेरा भी रूपांतरण हो गया,धरती थी मैं, वृक्ष हो गई,धरती से उपजा यह तन मन,धरती ने ही दी तुमको महक। सुगंध भर दी साँसों में तुम्हारी,रंग रूप दिया और…

सुनो मुझे चाहिए – (कविता)

सुनो मुझे चाहिए सुनो, नहीं चाहिए तुम्हारी जायदाद,तुम्हारी कोठी, तुम्हारा रुतबा,तुम्हें मुबारक तुम्हारी शान। हमें तो बस, एक छोटी सी क्यारी थी चाहिए,जिसमें सुबह ही खिल उठती, थोड़ी हँसी,ज़रा सा…

कृषक – (कविता)

कृषक है कौन कृषक जोकपास की खेती अंबर में करता है?नाना प्रकार के खिलौनेप्रति दिन रूई के रचाता है,जाने कैसे बिन डोरी केमेघ नभ में लटकाता है?अरु घुमा घुमा कर…

वह मैं नहीं हूँ किंचित प्यारे – (कविता)

वह मैं नहीं हूँ किंचित प्यारे जो मुझको तुम समझते हो नित,वह मैं नहीं हूँ किंचित प्यारे,नौ द्वार के प्राकृतिक भवन मेंहम मनुज निवास करते सारे,राजा और उसका अमूल्य महलनहीं…

तरु संवाद – (कविता)

तरु संवाद शंकुल जाति के देवदारु ’सीडर’ने यहपर्णपाती ’मेपल’ से प्रश्न किया,क्यों हो रहा तव रंग इस तरह से पीलातब भीमकाय मेपल ने उत्तर दिया। (शरद)ग्रीष्म का गमन है होता…

कविता – (कविता)

कविता अनुभूति करने की कवि में क्षमता,व्यक्त करे वह बनती है कवितापानी में ही यदि हो दरिद्रताकैसे बहेगी सुरसरिसी सरिता? वारि बहन ही आपगा नहीं है,शब्द चयन ही कविता नहीं…

मन की मंदाकिनी – (कविता)

मन की मंदाकिनी मन की मंदाकिनी में,जब भी लहरें उठती है भावों की,आती जाती इन श्वासों को,वे याद दिलाती है आहों की,सब दिवस गये पल क्षण बनकर,देखो तो अति चतुराई…

स्वयंभू – (कविता)

स्वयंभू मन में तुम्हारी प्रीत का हर शब्द गीत है,तन में रमा है त्याग का वो पल पुनीत है,जो आदि से ही उपजा स्वयंभू सुनीत है,उस आदि प्रेम की ही…

आओ चलें वहाँ – (कविता)

आओ चलें वहाँ आओ चलें वहाँ, जहाँ न कोई द्वेष राग हो,हों प्रेम के आदर्श और भावना सुभाष हो,हो ज़िन्दगी का मूल्य, जहाँ कोई न हताश हो,मेरी कल्पनाओं में कदाचित…

प्रकृति – (कविता)

प्रकृति जब प्रकृति लय छेड़ती,स्वर ताल देता है पवन। मुक्त स्वर से विहग गाते,मुदित मन होते सुमन,झूमके आते हैं वारिद,तड़ित चमकाती गगन।वृक्ष हो आनंदमयझूमते होकर मगन। मेघ गाते हैं मल्हारें,निरख…

मुझे क्या मिला – (कविता)

मुझे क्या मिला कभी कभी सोचा करता हूँ मुझे क्या मिलातीस वर्ष तक तीन देश में अध्यापन करशोधकार्य में शिक्षण में भी नाम कमायासतत परिश्रम करने पर भी मुझे क्या…

ओ ईंट – (कविता)

ओ ईंट काली मिट्टी में से पाथकरपथेरे ने रूप बदला तेराओ ईंट!ओ कच्ची-पीली सीजून भोगती ओ ईंट!अनचाही, अनजानी ठोकरेंखा-खा कर टूटती रही तूटोटे होकर सखियों सेबिछुड़ती रही तूअपनों के भी…

सेंक – (कविता)

सेंक ककरीली रातों मेंपड़ता सेंकना अलावकाम कोयलों का जलनाबनना अंगारेहो जाता चिखा का सेंक,लेकिन सेंका न जाये जो ***** – बमलजीत ‘मान’ * ककरीली= कोहरे वाली; चिखा= चिता

प्रीति अग्रवाल ‘अनुजा’ की हाइकु – (हाइकु)

प्रीति अग्रवाल ‘अनुजा’ की हाइकु 1. झीनी चूनरशालीनता दर्शा तेबदरा लौटे। 2. छम छपाक!औंधी सीधी टपकेंबूँदें बेबाक। 3. धूप का पारासातवें आसमाँ पेबूँदें उतारें। 4. प्रीत न बंधे!मुठ्ठी भिंची रेत…

आईना – (कविता)

आईना कई दिनों बादअपने आप को आजआईने में देखा,कुछ अधिक देर तककुछ अधिक ग़ौर से! रूबरू हुई–एक सच्ची सी सूरतऔर उसपर मुस्कुरातीकुछ हल्की सी सिलवट,बालों में झाँकतींकुछ चाँदी की लड़ियाँ,आँखों…

कटघरा – (कविता)

कटघरा जाने क्यों और कैसेरोज़ ही अपने कोकटघरे में खड़ा पाती,वही वकीलवही जजऔर वहीबेतुके सवाल होते,मेरे पासन कोई सबूतऔर न गवाह होते,कुछ देर छटपटा करचुप हो जाती,मेरी चुप्पीमुझे गुनहगार ठहराती,वकील…

फिर वही – (कविता)

फिर वही वही खिड़कीवही कुर्सीवही इलायची वाली चायवही पसन्दीदा कपवही थकनवही सवालऔर वही जवाब!उफ्फ!ये बेहिसाब ज़िम्मेदारियाँ!लाइन लगाकरहमेशा तैनात,जाने कब ख़त्म होंगी . . .जाने कब सब बड़े होंगे..जाने कब मुझे…

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