कोयल अर कागलो (व्यंग्य) – बुलाकी शर्मा
कोयल अर कागलो (व्यंग्य) – बुलाकी शर्मा कथेतर विमर्श पर आज पढिए बुलाकी शर्मा जी का व्यंग्य, जो राजस्थानी लोक में बेहद प्रचलित है। इतरो बाबो-सा रो लाडकोयल बाई सिध…
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कोयल अर कागलो (व्यंग्य) – बुलाकी शर्मा कथेतर विमर्श पर आज पढिए बुलाकी शर्मा जी का व्यंग्य, जो राजस्थानी लोक में बेहद प्रचलित है। इतरो बाबो-सा रो लाडकोयल बाई सिध…
मोह (कहानी) – मधुरिमा कोहली *********आज के विमर्श में हम पढ़ते हैं वरिष्ठ साहित्यकार, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ मधुरिमा कोहली जी की कहानी। डॉ मधुरिमा कोहली प्रतिष्ठित साहित्यकार…
जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र सन् 1933 की बात है। भाई सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने कुछ कविताएं अपनी छापनी चाहीं। जेल से उन्होंने…
साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर यूनेस्को के घोषणापत्र में लिखा है कि युद्ध मन में ही पैदा होता है और वहीं उसको रोका जा सकता है…
गुल्लो रानी : अरुणा सब्बरवाल पतझड का आगमन आरम्भ हो चुका था। वृक्षों से गिरते पत्ते हवा में अपना नृत्य दिखा रहे थे। पूरी धरा पर लाल, पीले, नारंगी और…
महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘नीलकंठ’ में राष्ट्रीयता : डॉ. संध्या सिलावट वर्षा की पहली बूँद अभी धरती तक पहुँची भी नहीं है। दूर क्षितिज पर मेघों की गहरी परतें उमड़…
कंप्यूटर के विंडो के साथ आइए एक झरोखा भी खोलें : स्वरांगी साने ज्ञान हर तरफ़ बिखरा पड़ा है, है न? यह ज्ञान के विस्फोट का युग है। व्हाट्सऐप से…
भारत की संस्कृति अनोखी है साम्प्रदायिक उत्पात के समय नोआखाली-प्रवास में एक दिन मनु गांधीजी के घी मल रही थीं और वह कुछ पेचीदा अंग्रेजी पत्र-व्यवहार सुन रहे थे। पत्र-व्यवहार…
रायबरेली उत्तर प्रदेश की रत्ना भदौरिया की इन कविताओं को पढ़ते हुए आपको लगता है कि आप आज के समय से दो-चार हो रहे हैं। पेशे से वे नर्स हैं,…
प्रदक्षिणाम पदे पदे : डॉ. गरिमा संजय दुबे संसार का आदि तीर्थ, आदि कर्मकांड कदाचित परिक्रमा ही है। परिक्रमा अथवा प्रदक्षिणा की परंपरा और महत्व देखने चलते हैं तो पता…
स्वरांगी साने : न्यूटन के बहाने से…. यदि किसी क्षण आप असुरक्षित महसूस करते हैं, तो ऐसा महसूस कर पाने के लिए भी बड़े साहस की ज़रूरत होती है। दुर्बलता…
पर्यावरण भी हमारा घर : चेतन सिंह सोलंकी हम घर का कचरा तो बुहार देते हैं, लेकिन बड़े घर यानी पर्यावरण को दूषित क्यों करते हैं? ये पृथ्वी हमारा बड़ा…
महान फ़िल्म द ग्रेट डिक्टेटर के अंत में चार्ली चैप्लिन का भाषण : शैलेन्द्र चौहान मुझे खेद है लेकिन मैं शासक नहीं बनना चाहता। ये मेरा काम नहीं है। किसी…
वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” अम्मा, ज़रा देख तो ऊपरचले आ रहे हैं बादल ।गरज़ रहे हैं, बरस रहे हैं,दीख रहा है जल ही जल ।…
मिर्च का मज़ा ( बाल कविता ) रामधारी सिंह “दिनकर” एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी,लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में पानी। सोचा, क्या अच्छे…
चूहे की दिल्ली-यात्रा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” चूहे ने यह कहा कि चूहिया! छाता और घड़ी दो,लाया था जो बड़े सेठ के घर से, वह पगड़ी…
सूरज का ब्याह ( बाल कविता) : रामधारी सिंह “दिनकर” उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है,वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने वाली है। मोर करेंगे…
नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं।मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूत्र मैं?किसको…
चांद का कुर्ता ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन…
स्वरांगी साने : नाम ही बदला है, घटना नहीं, कल सोनम थी, आज सिया, कल कोई और … इस बार नाम सिया है, पिछले साल सोनम थी। अगली बार कोई…