ज्योति गीत – (कविता)
ज्योति गीत हों सहस्त्र ज्योति दीप, हों सहस्त्र ज्योति कण,हों सहस्त्र ज्योति गीत, हों सहस्त्र ज्योति क्षण, थिरकते हों ज्योति स्वर, काल के अवशेष पर,महकते हों पारिजात, ज्योति रश्मि केश…
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ज्योति गीत हों सहस्त्र ज्योति दीप, हों सहस्त्र ज्योति कण,हों सहस्त्र ज्योति गीत, हों सहस्त्र ज्योति क्षण, थिरकते हों ज्योति स्वर, काल के अवशेष पर,महकते हों पारिजात, ज्योति रश्मि केश…
डॉ. नीलम वर्मा डॉ. नीलम वर्मा एक हृदयरोग विशेषज्ञ एवं कवयित्री हैं। कल्पतरु की ओर से वे ‘कविता विदूषी’ सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं । यह सम्मान उन्हें भगवद्गीता की…
विज्ञान व्रत की ग़ज़लें -एक- मैं था तनहा एक तरफ़और ज़माना एक तरफ़ तू जो मेरा हो जातामैं हो जाता एक तरफ़ अब तू मेरा हिस्सा बनमिलना-जुलना एक तरफ़ यों…
विज्ञान व्रत जन्म-तिथि : 17 अगस्त 1943 जन्म-स्थान : तेड़ा (मेरठ) उ प्र शिक्षा : M A ललित कला, B. Ed, डिप्लोमा — चित्रकला (राजस्थान) सम्प्रति : लेखन तथा चित्रकला…
वसन्त तो आ चुका है पक रहा है मौसमअमराइयाँ खदक रही हैं मीठी आँच परतितलियों पर मढ़ा हुआ सोनाचम-चम चमक रहा हैचंगुलों में लौट आयी हैं सुगंधियाँ;पूरे उफान पर है-नुचे…
दलदल के फूल मैंग्रूव के जंगलों में छितरायीअनगढ़ और भयावनी दुनियाबदलती रहती हैहर घण्टे अपना चेहरापीछे से समन्दर भीमैदान बदल-बदल करखेलता रहता हैलहरों के खेल… सरकण्डों और मिट्टी के सहारे…
कमीज़ कमरे की दीवार परखूँटी से झूलती कमीज़मेरी अपनी पहचान हैगोकि मसक गयी है जगह -जगह सेपर वर्षों बाद भी उतरा नहीं है इसका कड़क रंग बनिये की पुरानी उधारीऔर…
सबसे सुंदर लड़की सबसे सुंदर लड़कीकाँपती रहीलहरों में-थर-थरसिवार सी,सिहरती रहीआर्द्र दूब परनंगे पाँव। तिनके-तिनकेबहती रहीबारिशों मेंवक्त बे वक़्त;फेरती रहीआँख-हर मुस्कुराहट से,खींचती रहीहाथ-दोस्तों के हाथों से,डरती रही-परदेसी आसमानों से,प्रेमविह्वलपंछियों से। सबसे…
स्त्रियाँ स्त्रियाँ पागल रहती हैं-किसी न किसी प्रतीक्षा में;यही नहीं कि बाहर गये लोग कब लौटेंगे वापसया कब कोई अतिथि दे देगा दस्तक द्वार परबल्कि स्त्रियाँ कुछ-कुछ पंछियों की तरह…
झिमिर झिम- झिम… जोड़ टूटे, बंद टूटे,बदलियों के छंद टूटे झिमिर झिम- झिम…झिमिर झिम- झिम… प्रात सावन, रात सावन,गूँध प्यासे गात सावन,पड़ गयी छोटी यवनिका-और रेशम कात सावन, झिमिर झिम-…
कोए से दिन फिर आएरेशम केकोए से दिन … धूप की नदीजैसेपिघला पीला संगमरमर,छायाएँलगी काँपनेडोंगियों सी ज़मीन पर,पानी-सा मन –सोने के साँपों के पोए से दिन… हर सम्मोहनटूटासूरज का जैसे…
मेघ ये आषाढ़ के मेघ ये आषाढ़ के… बाँध कर साफे धुले, एक- सी लय में खड़े, ये चलें तो- आसमानी फर्श- फाहे सा उड़े, छतरियाँ सिर पर धरे, धूप…
वे बोलेंगे… वे बोलेंगे…जिन कण्ठों में स्वर सच्चे हैं –वे बोलेंगे …जिनके सीने भीग रहे श्रम के पानी से,जिन आँखों में कच्ची मिट्टी के सपने हैं,इन्तजार में जो हैं –कब…
किरनों के मोरपंख किरनों के मोरपंखधूप लगी नोचने,चिड़ियों कोदर्द दिये-चिड़िये की चोंच ने… कागज़ की रोटियाँपंजों से बेल कर –कैसे फुसलायेगी ?पकड़ेगी हर शिकार –किधर खेल-खेलकर ?माथे पर –बल डाले-शाम…
राजीव श्रीवास्तव की ग़ज़लें -एक- पानी पानी धूप बिछी है, पाँव न रख, जल जायेंगे।हँस-हँस कर मिलने आये हैं, रो कर बादल जायेंगे। पुरखों की थाती यदि आँगन से विस्थापित…
डॉo राजीव श्रीवास्तव जन्म-स्थान : चौक, वाराणसी शिक्षा : एम. फिल., पी-एच.डी. (हिंदी साहित्य) प्रकाशित पुस्तकें : गीत, गज़ल, नवगीत और कविताओं के पांच पुस्तकों के अतिरिक्त कहानी और व्यंग्य…
जीवन एक अहर्निश यात्रा : दिव्या माथुर -अनिल जोशीanilhindi@gmail.com दिव्या जी वास्तविक अर्थों में एक वैश्विक प्राणी हैं। पिछले कुछ महीनों में लंदन- दिल्ली, मुंबई, मारिशस, लंदन और अब सिंगापुर…
सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघु कथाएँ 1. आजादी आजादी के अवसर पर पापा के ऑफिस में स्वतंत्रता–पर्व के साथ एक पारिवारिक मिलन का भी आयोजन किया गया था। पत्नी स्कूल–टीचर…
सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा जन्म–तिथि : 9 नवम्बर,1951 पिता : स्वर्गीय श्री मोहन लाल माता : (स्वर्गीया) श्रीमती धर्मवन्ती (जमनी बाई ) गुरुदेव : (स्वर्गीय) श्री सेवक वात्स्यायन (कानपुर विश्वविद्यालय) पत्नी…
सागर के तट पर सागर की पारदर्शी देह पर थिरकती हैंरहस्य और रोमांच से आह्लादित लहरेंरेतीली जमीन पर लिखती हैंप्रेम की अमिट कहानियां…समर्पित होने से ठीक पहलेआवेग से आती हैंपुरजोर…