जंगल का कानून – (कविता)
जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…
हिंदी का वैश्विक मंच
जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…
हँसी और मुस्कान हँसी और मुस्कान, दो बहिनेंएक होकर भी अलगएक ही डाल पर खिले दो फूलएक अधखिली कली, दूसरी पूरा खिला फूलएक भोर की पहली किरन-सी उजली, नाजुक, लजीलीदूसरी…
मंजु गुप्ता डॉ. मंजु गुप्ता हिन्दी एम. ए., पीएच.डी., डी.लिट्.एसोसिएट प्रोफेसर कमला नेहरू कॉलेज आगरा विश्वविद्यालय. की सर्वश्रेष्ठ छात्रा होने के लिए चांसलर गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गयासर्वश्रेष्ठ वाद-विवादकर्ता,…
वेनिस का सौदागर : यहूदी घृणा की जड़ें डॉ वरुण कुमार दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी सरकार द्वारा यहूदियों का नरसंहार बीसवीं सदी की हृदयविदारक घटनाओं में से एक है,…
अनुवादक : सुनीता पाहूजा तमिल भाषी कवि पं. प्रेमलाल सुबरन द्वारा 1943 में रचित कविता ‘अंजले’ का हिंदी अनुवाद अंजले हाय! अफ़सोस! क्यों हमारे हृदय पिघल न जाएँ?क्या महान भारत…
सुनीता पाहूजा नाम : सुनीता पाहूजा जन्म : 23 जनवरी 1964 लुधियाना, पंजाब, भारत शिक्षा : एम. कॉम (दिल्ली विश्वविद्यालय) एम. ए (हिंदी) (हिमाचल विश्वविद्यालय) बीएड (अन्नामलई विश्वविद्यालय) कार्यक्षेत्र :…
पंजाबी कहानीकार : जसवीर राणा अनुवादिका : जसविन्दर कौर बिन्द्रा एक छोटी सी बेवफाई सभी ने चिता में तिनके तोड़ कर फेंक दिए थे मगर मैं नहीं फेंक पाया था।…
जसविन्दर कौर बिन्द्रा डॉ जसविन्दर कौर बिन्द्रा हिन्दी-पंजाबी दोनों भाषाओं में समान रूप से समालोचना, अनुवाद और मौलिक लेखन। दोनों भाषाओं में अनुवादित 75 से अधिक पुस्तकें प्रतिष्ठित प्रकाशनों से…
ये बनारस का ज़िक्र है दोस्तों -अनीता वर्मा बचपन में एक फ़िल्म देखी थी “बनारसी बाबू “। बुरे भी हम भले भी हम, जैसी पंक्ति यूँ ही नहीं कही गई…
मीनाक्षी जोशी डॉ मीनाक्षी जोशीएम ए (हिन्दी), एम फिल, पीएच-डी (हिन्दी), बी एड., सर्टिफिकेट कोर्स ऑफ मास कम्यूनिकेशन।पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, जे एम पटेल कॉलेज भंडारा, महाराष्ट्रपूर्व सदस्य-भाषा सलाहकार समिति…
साहित्य की प्रभाव क्षमता और हिन्दी समाज डॉ० वरुण कुमार कवि कुछ ऐसी तान सुनाओजिससे उथल पुथल मच जाएएक हिलोर इधर से आए,एक हिलोर उधर से आएहाहाकार महा छा जाए।…
हे बाबा नानक! बहुत पुरानी बात हैयुगों पुरानी नहींबाबा नानक, चहुं दिशाएं घूमतान कोई सवारी, न कोई ठेलाअपने पांवों पर चलअपने भक्तों तक पहुंचताया जो उसकी प्रतीक्षा मेंनज़रें बिछाए रहतास्वयं…
चलो बोल दो सॉरी तो ढीली थी सो खिसक गई थोड़ी इधर-उधर।हँसने की क्या बात है जी क्यों इतनी खिर-खिर।क्या पेंट ने कोई जोक अजी सुनाया है।देख किसी को परेशान…
दिविक रमेश दिविक रमेश (वास्तविक नाम रमेश चंद शर्मा) हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि, बाल-साहित्यकार, अनुवादक और चिंतक हैं जिनका जन्म 1946 में गांव किराड़ी (दिल्ली) में हुआ था। संपूर्ण शिक्षा…
अनीता वर्मा की बाल कविताएँ सूरज रवि गगन पर रौब जमातेअपनी दुनिया में इठलातेललाट तेज पर खूब चमकतादीप दीप्ति से अद्भुत दमकता धरती को प्रकाश पहुँचातेसुबह-सुबह आकाश में आतेपात-पात और…
अनीता वर्मा की कविता का अनुवाद मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह (कवि, ग़ज़लकार व सुप्रसिद्ध अनुवादक) क्या कहूँ इसे क्या कहूँ इसेसच या झूठजो कहावो…
आधुनिक कविता में छंद और लय का अतिक्रमण -डॉ० वरुण कुमार एक पाठक की कविता की पहचान सामान्यतः जिस चीज से शुरू होती है वह है छंद। छंद में बंधी…
डॉ० वरुण कुमार निदेशक, रेल मंत्रालय। जन्म : दिसम्बर १९६४, मुंगेर (बिहार) संपर्क सूत्र : मेल पता : bkumar1964@gmail.com मोबाईल : 7827935451
21वीं सदी में गुजराती कहानी -आलोक गुप्त गुजराती में कहानी लेखन अन्य भारतीय भाषाओं की तरह बीसवीं सदी में ही प्रारंभ होता है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में कहानी के…
प्रो. आलोक गुप्त पूर्व प्रोफेसर, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गांधीनगर (गुजरात) प्रो. आलोक गुप्त हिंदी के प्रख्यात आलोचक एवं अनुवादक हैं। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला (IIAS) में फेलो एवं गुजरात…