Author: वैश्विक हिंदी परिवार

श्रीनाथ विश्वविद्यालय-जमशेदपुर द्वारा आयोजित आठवाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी महोत्सव – (रिपोर्ट)

श्रीनाथ विश्वविद्यालय-जमशेदपुर द्वारा आयोजित आठवाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी महोत्सव डॉ कुमुद शर्मा जी के साथ यात्रा करना और रहना हमेशा ही सुखद होता है; दिल्ली से फ़्लाइट लेकर हम रात 8…

अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान माला का शुभारंभ – (रिपोर्ट)

अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान माला का शुभारंभ लेखक गांव में अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान माला का शुभारंभ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की शताब्दी जयंती के अवसर…

काश मैं अंग्रेजी होती – (कविता)

काश मैं अंग्रेजी होती काश मैं अंग्रेजी होतीमैं इतराती, मैं इठलातीSwag से मैं भी बोली जातीकाश मैं अंग्रेजी होती वक्ताओं का गुरूर होतीश्रोताओं को भी cool लगतीकाश मैं अंग्रेजी होती…

मेरे राम लला – (कविता)

मेरे राम लला एकटक तकतीं शून्य में,बाट जोहती प्रति क्षण,पंथ निहारतीं.. तरसती दरस को,अंखियां मेरी प्रतीक्षा में तेरी,ओ मेरे राम लला। सुध-बुध बिसरा के,सर्वस्व भूला के,राम नाम जपते जपते,सिया राम…

मेरा भारत देश महान – (कविता)

मेरा भारत देश महान गर्व है सौभाग्य है किमिट्टी में तेरी जन्मी ये कायादूर हो कर भी दूर नहींतू मन में जो है समायातू मेरा भारत देश महानमेरा भारत देश…

राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस – (रिपोर्ट)

राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस लो फिर एक बार.. राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस आ गया,लो फिर एक बार.. हम भारतीयों का देश प्रेम जाग गया। देशभक्ति हममें है कितनी, प्यार हमें…

बदलती ऋतु – (कविता)

बदलती ऋतु तुम..जैसे..इंग्लैंड की कड़कड़ाती ठंड में खिली,किरन एक छोटी सी सुनहरी धूप की। तुम..जैसे..पतझड़ के मौसम में वो पत्तियाँ झड़ी,धरती सजी तमाम रंगों की रंगोली सी। तुम..जैसे..ओले और बर्फ़बारी…

सोचा ना था कभी – (कविता)

सोचा ना था कभी सोचा ना था कभी,देस से दूर कहीं बस जाना होगा, करोड़ों की आबादी में भीखुल कर सांस लेने वाले,हमको मुठ्ठी भर लोगों मेंघुटन महसूस करना होगा।…

चाँद को ताकूँ मैं – (कविता)

चाँद को ताकूँ मैं चाँद को ताकूँ मैंसारी सारी रातऔर सोचूँ अक्सरबस एक ही बात।। बाबजूद दाग़ के भीवो क्यों लगेइतना ख़ास हमको,बाबजूद दाग़ के भीखूबसूरती क्यों लगेबेदाग हमको। चाँद…

अभिलाषा – (कविता)

अभिलाषा भिन्न हो चाहे रहन-सहन या फिर हमारी वेश-भूषा,खान-पान में हो भिन्नता या अलग हो हमारी भाषा,हों किसी भी गांव-शहर से.. किसी भी धर्म-जाति के हम,मिलजुल कर सब साथ रहें,…

अंतरा राकेश तल्लम – (रिपोर्ट)

अंतरा राकेश तल्लम बनारस की पैदाइश हूं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातक और मनोचिकित्सा व प्रबंधन अध्ययन संस्थान मुंबई से परास्नातक मनोचिकित्सा और परामर्श में किया, उसी…

   ज़िम्मेदारी, नैतिकता और आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस – (रिपोर्ट)

ज़िम्मेदारी, नैतिकता और आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (कम्प्यूटर और भाषा कार्यशाला) आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी और नित नई तकनीकी का युग है। समय हर समय को बदल देता है बस, समय…

एक नाटक के पीछे का नाटक – (व्यंग्य)

एक नाटक के पीछे का नाटक -आस्था देव दिन के इस समय जब न सुबह है, न शाम , न दोपहर! घड़ी ने 10:30 बजाये हैं। बावजूद इसके कि मैं…

कल  करै सो आज कर – (व्यंग्य)

कल करै सो आज कर -आस्था देव अक्सर कुछ दमदार लिखने के लिए, प्रेरणा तलाशनी पड़ती है पर आजकल जिंदगी की रेलमपेल में प्रेरणा का ऐसा अकाल पड़ा रहता है,…

आस्था देव – (परिचय)

आस्था देव बिहार के बेतिया में जन्मी आस्था देव, पिछले 5 सालों से लंदन में हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। वातायन संस्था में मुख्य सचिव के तौर पर कई साहित्यिक…

देवी नागरानी – (परिचय)

देवी नागरानी जन्मः 11 मई, 1941, कराची (तब भारत) शिक्षाः बी.ए. अलीं चाइल्ड, व गणित में विशेष डिग्री, न्यूजर्सी से मातृभाषाः सिन्धी, भाषाज्ञान : हिन्दी, सिन्धी, गुरमुखी, उर्दू, तेलुगू, मराठी,…

गुल्लक (कविता)

गुल्लक मन में कहीं छिपे विहंगचहक उठे फिर आज। बचपन की उन यादों मेंछिपे हैं अनगिन राजउस गुल्लक के सिक्केखनक उठे फिर आज। मिट्टी की गुल्लक थीअधिक नहीं था दामएक…

कचनार – (कविता)

कचनार खेत बीच या खेत किनारेवृक्ष लगे कचनार केकोमल फूल लगे हर डालीरूप रखा संवार के। हरा वसन पहन झूमतेपात सभी और हर डालीप्रति दिन इनको पानी देताबगिया का बूढ़ा…

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