इश्क – (कविता)
लक्ष्मी जयपोल ***** इश्क इश्क को प्यार, मुहब्बत भी कहते हैंइश्क एक एहसास हैएक भावना हैहमारा जीवन का आधार हैइश्क ही हमारा जीवन का केन्द्र-बिन्दु है। इश्क आप कलम से…
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लक्ष्मी जयपोल ***** इश्क इश्क को प्यार, मुहब्बत भी कहते हैंइश्क एक एहसास हैएक भावना हैहमारा जीवन का आधार हैइश्क ही हमारा जीवन का केन्द्र-बिन्दु है। इश्क आप कलम से…
लक्ष्मी जयपोल ***** परिवार- हमारे विश्व कूँजी परिवार जीवन के सर्वोत्तम प्राथमिकता हैपरिवार ही जीवन और प्राण हैपरिवार हैतो हम हैपरिवार हमारी पहचान है। परिवार हमें जीवन दान देता हैपरिवार…
चाँद भीबहरूपियाऔर छलिया है कभी तोप्रेमिका केसुन्दर मुखड़े सादिख जाता हैया कभीउसकी याद मेंदिल मेंटीस जगाता है कभी तोचौथ की पूजा के समयबादलों मेंछुपकर सताता हैतो कभी अँधेरी रात मेंराहगीरों…
हम लखनौवा है : दोस्ती नहीं यारी निभाते है डॉ शिप्रा शिल्पी, कोलोन, जर्मनी क्या फर्क पड़ता कोई आपको क्या समझता है, दोस्त वही जो आपको समझने की समझ रखता…
–डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन यक्ष प्रश्न चढ़ गया एक और प्यासाआत्महन्तासीढ़ियां रचकर शवों कीललकतापीने सुनहरास्वर्ग का मृगजल।अभी मुंह रक्त पी खारा हुआ थाहाथ हत्या से रंगेबदले हुए थे बोटियों मेंऔर…
– डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन नीराजना दीप बुझता-सा लिएमैं खोजता हूंचिर मुंदा अनजान ओझल द्वारजिसके पारस्रोत आपन्न अपरंपारबस ज्योतिष्मती निर्द्वन्द्व धारा बह रही हैकाल-द्रुम के स्वर्णपल्लवएक बंदनवार में आविद्धमस्तक पर…
डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन शोर के गढ़ शोर के गढ़ बन गए सब ओरजिनमें शब्द अर्थों से छुड़ाकरकैद कर रखे उन्होंनेपास जिनके आदमी अपनेबने नक्कारखाने।लेखनी का शील करके भंगवे फहरा…
डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन अधर का पुल अधर में रखा है एक पुलन इधर कोई किनारा है उसकान उधर।दिशाओं से ऊपरआर या पार ले जाने की प्रतिबद्धता से मुक्तशून्य को…
डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन खंडित मुकुर मैं पड़ा खंडित मुकुर-साआपकी नजरों से गिरकरधूल मेंअब रूप कितने देखताप्रतिबिम्ब कितने दे रहा हूं।आप चतुरानन दशानन या शताननरूप जितने भी बनातेमैं उन्हें शत-शतमुखीगंदले…
डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन एक और आत्मसमर्पण खोलकर डोरी धनुष कीऔर निज तूणीरतीखी वेदनाओं से भरामैं डालता हूंआज फिर हथियार मन के स्वर्णलता के बिछाए जाल सेअब तीर अपने आप…
– सुयोग गर्ग, तोक्यो, जापान अब घर आ जा आधी रात, सून सन्नाटा और पापा का कॉलजागे हुए हैं तेरी फ़िक्र में, अब घर आ जा मन मौज़कड़कती धूप, झुलसती…
नूपुर अशोक, ऑस्ट्रेलिया सवाल उठाना मना है यहाँ सवाल मत उठाना,सवाल उठाते ही यहाँ लोगचौखटे में जड़ करकिसी कील पर टाँग दिए जाते हैं।क्योंकि धर्म को सवालों से नफ़रत हैऔर…
– नूपुर अशोक, ऑस्ट्रेलिया विदेश में पतझड़ हरीतिमा में लिपटे वृक्षमहसूसते हैं बदलती हुई हवाओं कोसमझने लगते हैं किउनका समय गुज़र चुका है मन का उच्छ्वासधूमिल कर देता है उन्हेंभूरे…
नूपुर अशोक, ऑस्ट्रेलिया प्रतीक्षा सिंड्रेला की वह ख़ूबसूरत जूतीमैंने बड़े जतन से संभाल कर रखी हुई थीइस आस मेंकि शायद किसी दिन वो मुझे मिल जाएशायद किसी दिन वो खुद…
नूपुर अशोक, ऑस्ट्रेलिया ====== बूँद और मैं पानी की एक बूँदमेरी खुली हथेली पर आ पहुँचीशायद आसमान से आयीज़िंदगी से भरी एक बूँद चाहूँ तो पी लूँ,चाहूँ तो गीला कर…
दूर्वा तिवारी, ऑस्ट्रेलिया राम इस युग में अब राम कहाँ हैं? निजता में बस मनु रह गयानहीं रहा अब कोई मनस्वीभीड़ पड़ी है महाकुंभ मेंलेकिन दुर्लभ कोई तपस्वीकोलाहल और शोर…
दूर्वा तिवारी, ऑस्ट्रेलिया गुत्थियां अनगिनत अनसुलझी गुत्थियां…शरीर से भारीकर मन का वज़नबढ़ने नहीं देतीएक भी कदमये हजारों बेतरतीब गुत्थियां सैंकड़ों तंतुओं केमहीन बुने जाल मेंबदहवास फैलते हुएग्रसित कर मस्तिष्क कोरेंगती…
दूर्वा तिवारी, ऑस्ट्रेलिया परब्रह्म निहित भाव बस यही है अबस्वयं के सत्य को पाऊँ मैंआकार-साकार से मुक्त कहींनिराकार हो जाऊँ मैं युग-काल, यूँ ही सब बीत रहेजन्म-जन्मांतर व्यर्थ सहेजीवन-मृत्यु अब…
– दूर्वा तिवारी, ऑस्ट्रेलिया कविता एक नई कविता की ख़ातिर मैं स्याही हो जाऊँगीरिक्त हृदय में ढूँढूंगीनिःशब्द मेरे सारे अनुभवफिर धीमे-धीमे दूँगी मैंरूप उन्हें यथा सम्भवकुछ होंगीं बिसरी सी स्मृतियाँऔर…
– सुषमा मल्होत्रा, अमेरिका तुलसी का पौधा वो खुला सा आंगनउस में कई तरह के पौधेफल के कुछ फूल केमगर मेरा सबसे मनपसन्दथा तुलसी का पौधारखती थी दादीउसे सदा एक…