Category: विधा

चाय और वो – (कविता)

चाय और वो सुनो— ये दो चाय इधर भिजवानाज़रा जल्दी!मैं जल्दी में था,आख़िर बाल श्रम पे राष्ट्रीय गोष्ठी थी शहर मेंमेरी कविताओं पे चर्चा भी थीइस लिए जल्दी में था…

अम्बिका शर्मा – (परिचय)

अम्बिका शर्मा जन्म-स्थान: आगरा, उ. प्र. वर्तमान निवास: मोंट्रीऑल/कैनेडा शिक्षा: स्नातकोत्तर बायोटेक्नॉलोजी प्रकाशित रचनाएँ: अहा ज़िंदगी, नव भारत टाइम्ज़, नवल उत्तराखंड लेखन-विधाएँ: कविता, गीत, नज़्म उल्लेखनीय गतिविधियाँ: संयोजक कबीर सेंटर…

साथी – (कविता)

साथी रहने दो प्रिय, मत लो मेरीलोहे की बेडौल कड़ाही।यह छिछली सी, बड़ी कड़ाही,दादी से माँ ने पाई थी।भारत छोड़ चली थी जब मैं,साथ इसे भी ले आई थी। अपनी…

दुविधा – (कविता)

दुविधा क्यों लिखूँ, किसके लिये?यह प्रश्न मन को बींधता है। लेख में मेरे जगत कीकौन सी उपलब्धि संचित?अनलिखा रह जाय तोहोगा भला कब, कौन वंचित?कौन तपता मन मरुस्थलकाव्य मेरा सींचता…

मेरा प्यार – (कविता)

मेरा प्यार टेक कर घुटने, झुका सिर,प्रेम का जो दान माँगे,हो किसी का प्यार लेकिन,प्यार वह मेरा नहीं है। रख नहीं पाया मान निज जो,प्यार वह कैसे करेगा?हीनता से ग्रस्त…

पीला पत्ता – (कविता)

पीला पत्ता रुको साथी, हटा लो हाथ को,न तोड़ो, छोड़ दो, पीले पड़े इस पात को। कहा तुमने, हरित इस डाल पर,यह अब नही सजता।नये, चिकने, चमकते किसलयों के बीच,है…

किस किस को ले डूबा पानी – (कविता)

किस किस को ले डूबा पानी किस किस को ले डूबा पानीपानी आख़िर निकला पानी ऐसे कब बरसा था पहलेअब के बरसा इतना पानी कच्चे घरों पर क्यूँ बरसा थापागल…

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था – (कविता)

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था हुई मुद्दत कोई आया नहीं थाये घर इतना कभी सूना नहीं था वो मेरा दोस्त था लेकिन कभी वोबुरे वक़्तों में काम आया नहीं…

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ – (कविता)

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआइक दिया मुंडेर पर जलता हुआ एक पत्ता शाख से गिरता हुआइक परिंदा आस्माँ छूता हुआ एक तितली फूल…

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं – (कविता)

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं जहाँ में इक तमाशा हो गए हैंहमें होना था क्या, क्या हो गए हैं नुमाइश कर रहे हैं ज़िन्दगी कीनज़ारा अच्छा ख़ासा हो…

कैसे भूला जा सकता है – (कविता)

कैसे भूला जा सकता है कैसे भूला जा सकता हैIIभारत माँ का अनोखा प्यारमाँ के बच्चे थे बड़े मिलनसारढूँढ़ता हुआ हिंदी ज्ञान का सागरज्ञान के साथ ही पाया अपारख़ुशी से…

गुरुदेश ने जो सिखाया – (संस्मरण)

गुरुदेश ने जो सिखाया -अतिला कोतलावल बारिश का मौसम था। रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बाद प्रकृति ने कुछ विश्राम का रूप धारण किया। सारा वातावरण ठंडक की चादर…

हिन्दी से जुड़े मेरे सपने – (आलेख)

हिन्दी से जुड़े मेरे सपने -अतिला कोतलावल मैं भी उन स्वप्नदर्शियों में से एक हूँ जो अक्सर सपने देखा करते हैं और उनके साकार होने तक उन्हीं सपनों में विलीन…

कोई लहर – (कविता)

कोई लहर समुन्द्र की कौन सी लहरहमें ले जाएगी किनारेकौन सा किनाराहमें थाम लेगामट्टी का कौन-सा हिस्सा हमेंजकड़ लेगाहम नहीं जानतेन ही जानना चाहते हैंक्योंकि जान नहीं पाएंगेबस यही चाहते…

समझदार लोग – (कविता)

समझदार लोग लोग हैं लोगलोग हैं समझदारसमझदार लोग उठाते हैं आवाजेंउठ रही हैं हर तरफ से आवाजेंपर उठ नहीं रहे हैं लोगजो उठा रहे हैं आवाजेंक्योंकि लोग हैं समझदारऔर समझदार…

जमने वाली बर्फ – (कहानी)

जमने वाली बर्फ -निखिल कौशिक लंदन से लगभग 210 मील उत्तरी पूर्व-ब्रिटेन के जिस छोटे से शहर में मैं रहता हूँ, यहाँ बहुत बर्फ तो नहीं पड़ती पर जब पड़ती…

श्री लंका में हिंदी की दशा और दिशा – (आलेख)

श्री लंका में हिंदी की दशा और दिशा -अतिला कोतलावल हिंदी मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की साझी विरासत और महान् संस्कृति को विश्व भर में जन-जन तक पहुँचानेवाली…

शैक्षणिक दृष्टि से विदेशी भाषा के रूप में हिंदी तथा सिंहली भाषाओं का संरचनागत व्यतिरेकी अध्ययन – (लेख)

शैक्षणिक दृष्टि से विदेशी भाषा के रूप में हिंदी तथा सिंहली भाषाओं का संरचनागत व्यतिरेकी अध्ययन -अतिला कोतलावल विदेशों में हिंदी और विदेशी भाषा के रूप में हिंदी… इन दोनों…

डॉ नीलम वर्मा की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

ग़ज़ल वाबस्ता हैं सब जिससे, ज़ंजीर है तारों कीहँसना कभी रोना भी तक़दीर है तारों की क्या ख़ूब फ़लक पर ये तहरीर है तारों कीलैला है या शीरीं है या…

ज्योति गीत – (कविता)

ज्योति गीत हों सहस्त्र ज्योति दीप, हों सहस्त्र ज्योति कण,हों सहस्त्र ज्योति गीत, हों सहस्त्र ज्योति क्षण, थिरकते हों ज्योति स्वर, काल के अवशेष पर,महकते हों पारिजात, ज्योति रश्मि केश…

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