Category: भौगोलिक इकाई

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना याद आ रही तेरी बेटादिन में ही अँधियारा छायाआँखें अब कमज़ोर हो गईं,सही लग रहा मैला-मैला॥ तू अपने घर उलझा है,पर…

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना उसने कभी नहीं दीपिछली रोटीअपने पति और बच्चों को,….ख़ुद ली…!! जब भूलने लगी अपना होना,तो याद आयामाँ ने भी नहीं दी…

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना दो –दो लड़कियाँ रहती हैं मेरे भीतर!एक वो, जो पैदा हुई थीगली के कोने वाले घर में जहाँ सौर के बाहर…

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षक – डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…

साइकिल – स्वास्थ्य और खुशी का साथी : सांद्रा लुटावन (कविता)

साइकिल – स्वास्थ्य और खुशी का साथी : सांद्रा लुटावन (कविता) सुबह की पहली किरण जब धरती पर मुस्काती है,हल्की ठंडी हवा भी मन को छू जाती है।सड़क किनारे खड़ी…

श्राउड ऑफ टूरिन का रहस्य

आस्था, इतिहास और विज्ञान के बीच एक जटिल संवाद मनीष पाण्डेय ‘मनु’, नीदरलैंड्स दुनिया के सभी धर्मों, समुदाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के इतिहास में कुछ ना कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं…

तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ?

अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने…

कुवैत में आयोजित ‘द इंडियन कम्यूनिटी स्कूल’ में इन्टर स्कूल काव्य वाचन प्रतियोगिता

कुवैत में आयोजित ‘द इंडियन कम्यूनिटी स्कूल’ में इन्टर स्कूल काव्य वाचन प्रतियोगिता ‘विश्व हिंदी दिवस’ पर कुवैत में ‘द इंडियन कम्यूनिटी स्कूल‘ में इन्टर स्कूल काव्य वाचन प्रतियोगिता आयोजित…

कोरिया में हांगुल डे पर ‘हांगुल रन’ – (रिपोर्ट)

कोरिया में हांगुल डे पर ‘हांगुल रन’ डॉ. संजय कुमार (सेजोंग सिटी, कोरिया से) 9 अक्टूबर को हांगुल डे के अवसर पर मैंने कोरिया के सेजोंग शहर में आयोजित ‘हांगुल…

अबूझ – (कहानी)

अबूझ – सरस दरबारी, कनाडा “दीदी आपको शादी में आना ही होगा।” “पर स्वाति मैं किसी को नहीं जानती।” “मुझे तो जानती हैं न। यह भी जानती हैं कि मेरे…

टोकरी – उम्मीदों की – (बाल कहानी)

टोकरी – उम्मीदों की डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना, कोलोन, जर्मनी ओह, 7 बज गए, क्रिस्टी ने आँख खोलकर घड़ी पर नजर दौड़ाई, आँखें मिचमिचाते हुए चारों ओर देखा, पर सुबह…

शैलजा सक्सेना की कहानियाँ: रिश्तों, संघर्षों और उम्मीदों की दास्तान – (पुस्तक समीक्षा)

“प्रवासी कथाकार शृंखला” राकेश मिश्र शैलजा सक्सेना जी से मेरा परिचय हिंदी राइटर गिल्ड के मासिक कार्यक्रम में हुआ। उनकी लिखी कहानियों को पढ़ने से पहले मैंने उन्हें सुना है…

राकेश मिश्र – (परिचय)

राकेश मिश्र राकेश मिश्र ओंटारियो, कनाडा में निवास करते हैं। उनका जन्म भारत के पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और ओंटारियो स्थित सेनेका कॉलेज से वाणिज्य…

🎃Happy Halloween🎃 – (ब्लॉग)

Happy Halloween डॉ शिप्रा शिल्पी हैलोवीन का दिन सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन होता है, इसलिए यूरोप में सैल्टिक जाति के लोग इस दिन को नए साल की शुरुआत के…

थाईलैंड – माई नाम – (ब्लॉग)

थाईलैंड – माई नाम शिखा रस्तोगी, बैंकॉक,थाईलैंड नदियों के महत्व को मनुष्य अच्छी तरह से जानता है। थाई भाषा में, माई नाम नदी के लिए एक सामान्य शब्द है, जिसमें…

कोरोना-चिल्ला – (कहानी)

कोरोना-चिल्ला* दिव्या माथुर तीन हफ्ते हो चुके हैं जॉन को घर छोड़े हुए; वह एक कैरावैन में किराए पर रह रहा है, वहीं से वह दफ़्तर का काम भी संभाल…

बेक्ड-बीन्स – (कहानी)

बेक्ड-बीन्स दिव्या माथुर सुपरमार्केट के यूँ ही चक्कर लगते हुए बुढ़िया ने ग्राहकों और लोगों की नज़र से बचते हुए दो छोटे टमाटर और कुछ लाल अँगूर मुँह में रख…

चौक पुराये मंगल गायें – (कविता)

डॉ. शिप्रा शिल्पी (कोलोन, जर्मनी) ***** चौक पुराये मंगल गायें चौक पुराये मंगल गायें, आई है दीवालीनाचे-गायें ख़ुशी मनायें, आई है दीवाली धनतेरस खुशहाली लायाजन-जन का है मन हर्षायामिलजुल कर…

जापानी जिजीविषा – (ब्लॉग)

जापानी जिजीविषा वेदप्रकाश सिंह जापान में इस समय सौ साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या एक लाख के करीब पहुँच रही है। यह संख्या दुनिया में सबसे अधिक…

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