‘आत्मनिर्भर भारत’ : कितना ज़रूरी और कितना सफल – (लेख)
‘आत्मनिर्भर भारत’ : कितना ज़रूरी और कितना सफल नितीन उपाध्ये “आत्मनिर्भर” मेरे विचार में आज किसी भी व्यक्ति/परिवार/शहर/राज्य/देश का पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर होना सरल नहीं है। अब मैं स्वयं का ही…
हिंदी का वैश्विक मंच
‘आत्मनिर्भर भारत’ : कितना ज़रूरी और कितना सफल नितीन उपाध्ये “आत्मनिर्भर” मेरे विचार में आज किसी भी व्यक्ति/परिवार/शहर/राज्य/देश का पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर होना सरल नहीं है। अब मैं स्वयं का ही…
सोशल मीडिया : क्या खोया, क्या पाया नितीन उपाध्ये सोशल मीडिया से हमने जो पाया है वह है “दुनिया के किसी भी कोने में जब एक गौरेय्या अपने पंख फड़फड़ाती…
क्या हम केचुएं है ? नितीन उपाध्ये आज परसाईयत में श्रद्धेय श्री हरिशंकर परसाई जी का व्यंग्य लेख “केचुवां” पढ़ा। मन में कई ख्याल आये सब एक दूसरे के ऊपर…
वैश्वीकरण और २१वीं सदी का भारत -अनु बाफना If you don’t adapt, you will get left behind ! Change is the only constant ! दोनों ही कथन एकदम सटीक हैं…
चदरिया झीनी रे झीनी -अदिति अरोरा मैं अपने परिवार के साथ आजकल लंदन प्रवास पर हूँ। हमारा घर थेम्स नदी के समीप निर्मित एक बहुमंज़िली इमारत की छटी मंज़िल पर…
एक पतंग का आत्ममंथन -अदिति आरोरा एक महीन अदृश्य डोर से बंधी, दो पतली डंडियों का एक कंकाल और उस पर रंग-बिरंगी पोशाक, आकाश की ऊँचाइयों को छूने की महत्वाकाँक्षा…
प्रवासी देशों में हिंदी : स्थति और संभवनाएँ कारमेन सुयश्वी देवी जानकी सूरीनाम भी एक प्रवासी देश है और यहाँ हिंदी के अलावा हमारी मातृ भाषा सरनामी है और सब…
यूक्रेनी और हिंदी भाषाई दुनिया की तस्वीर में बैल के पौराणिक चरित्र का विश्लेषण आन्ना पोनोमरेंको मिथक लोगों की संस्कृति का आधार है और जीवन, इसके अर्थ, मनुष्य के आस-पास…
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी साहित्य -रेखा राजवंशी कहा जाता है साहित्य समाज का दर्पण है। ऑस्ट्रेलिया में हिंदी साहित्य का इतिहास अधिक पुराना नहीं है। लगभग चालीस वर्ष पहले हिंदी भाषी…
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी शिक्षण -रेखा राजवंशी ऑस्ट्रेलिया भी भारत की ही तरह एक बहु-सांस्कृतिक देश है, जहाँ अनेक देशों के लोग आकर बस गए हैं। यहाँ के खान-पान, रंग, रूप,…
श्येन परों पर ठहरी हिन्दी -डॉ. आरती ‘लोकेश’ दुबई, यू.ए.ई. किसी विदेश भ्रमण के दौरान हर व्यक्ति एक विदेशी भाषा को हर समय सुनने के लिए अपने कानों को तैयार…
थाईलैंड में हिंदी थानाभद आजकल भारतीय सभ्यता सर्वव्यापी उपलब्ध है क्योंकि प्राचीन काल में मूल भारतीय निवासी दुनिया भर में भ्रमण करते थे इसलिए वर्तमान में हम देख सकते है…
आश्चर्य का प्रतीक – सीगीरिय एम्. एम्. नयना कुमारि
सिंहली संस्कृति एम. नधीरा शिवंती ऐसा विश्वास किया जाता है कि राजकुमार विजय और उसके 700 अनुयायी ई. पू. 543 में श्रीलंका में जहाज से उतरे थे। ये लोग “सिंहल”…
श्रीलंका के साहित्यकार एम. नधीरा शिवंती सभी देशों में उन देशों के साहित्य, साहित्यकारों के कारण जाने जाते हैं। श्रीलंका छोटा द्वीप है। फिर भी देश का साहित्य दुनिया के…
श्रीलंका का इतिहास एम. नधीरा शिवंती इतिहासकारों में इस बात की आम धारणा थी कि श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिम मानव एक ही थे। पर अभी…
श्री लंका का संगीत एम. नधीरा शिवंती लोक संगीत जाति-आधारित लोक कविताएँ, जन कवि, व्यक्तिगत समूहों के बीच साझा किए गए सांप्रदायिक गीत के रूप में उत्पन्न हुई। आज, वे…
श्री लंका के अनुराधपुर युग की भाषा एवं साहित्य एम. नधीरा शिवंती अनुराधपुर युग श्री लंका प्राचीन इतिहास का पहला और महत्वपूर्ण युग है। श्री लंका का स्वर्ण युग भी…
नाम : एम. नधीरा शिवंती जन्म स्थान : कोलंबो शिक्षण : बी. ए. (श्री जयवर्धनपुर विश्वविद्यालय, नुगेगोडा, श्री लंका), एम. ए. (केलनीय विश्वविद्यालय, श्री लंका), हिन्दी विशारद (दक्षिण भारत हिन्दी…
डॉ. वेदप्रकाश सिंह ओसाका विश्वविद्यालय जापान में हिंदी भाषा आने से डेढ़ हज़ार साल पहले तत्कालीन सिद्धम लिपि और वर्तमान देवनागरी लिपि में व्यवहृत कुछ वर्ण आ चुके थे। अभी…