फीजी और भारत की मिली-जुली संस्कृति – (लेख)
फीजी और भारत की मिली-जुली संस्कृति डॉ. सुभाषिनी कुमार फीजी द्वीप समूह एक बहुसांस्कृतिक द्वीप देश है जिसकी सांस्कृतिक परंपराएं महासागरीय यूरोपीय, दक्षिण एशियाई और पूर्वी एशियाई मूल की हैं।…
हिंदी का वैश्विक मंच
फीजी और भारत की मिली-जुली संस्कृति डॉ. सुभाषिनी कुमार फीजी द्वीप समूह एक बहुसांस्कृतिक द्वीप देश है जिसकी सांस्कृतिक परंपराएं महासागरीय यूरोपीय, दक्षिण एशियाई और पूर्वी एशियाई मूल की हैं।…
पंडित कमला प्रसाद मिश्र : फीजी के राष्ट्रीय कवि डॉ. सुभाषिनी कुमार पंडित कमला प्रसाद मिश्र हिंदी जगत के एक जाज्वल्यमान सितारे रहे हैं। हिंदी के प्रति उनकी तपस्या से…
गिरमिटियों के उद्धार में पं. तोताराम सनाढ्य का योगदान -डॉ. सुभाषिनी लता कुमार पं. तोताराम सनाढ्य ने अपने गिरमिट अनुभव को ‘फीजी द्वीप में मेरे 21 वर्ष’ नामक पुस्तक में…
अमेरिका के पटल पर हिंदी भाषा और साहित्य –अनिल प्रभा कुमार यह एक तथ्य है कि वर्तमान समय में विश्व पटल पर भारतीय छाए हुए हैं। स्वाभाविक है कि उनके…
‘आत्मनिर्भर भारत’ : कितना ज़रूरी और कितना सफल नितीन उपाध्ये “आत्मनिर्भर” मेरे विचार में आज किसी भी व्यक्ति/परिवार/शहर/राज्य/देश का पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर होना सरल नहीं है। अब मैं स्वयं का ही…
सोशल मीडिया : क्या खोया, क्या पाया नितीन उपाध्ये सोशल मीडिया से हमने जो पाया है वह है “दुनिया के किसी भी कोने में जब एक गौरेय्या अपने पंख फड़फड़ाती…
क्या हम केचुएं है ? नितीन उपाध्ये आज परसाईयत में श्रद्धेय श्री हरिशंकर परसाई जी का व्यंग्य लेख “केचुवां” पढ़ा। मन में कई ख्याल आये सब एक दूसरे के ऊपर…
वैश्वीकरण और २१वीं सदी का भारत -अनु बाफना If you don’t adapt, you will get left behind ! Change is the only constant ! दोनों ही कथन एकदम सटीक हैं…
चदरिया झीनी रे झीनी -अदिति अरोरा मैं अपने परिवार के साथ आजकल लंदन प्रवास पर हूँ। हमारा घर थेम्स नदी के समीप निर्मित एक बहुमंज़िली इमारत की छटी मंज़िल पर…
एक पतंग का आत्ममंथन -अदिति आरोरा एक महीन अदृश्य डोर से बंधी, दो पतली डंडियों का एक कंकाल और उस पर रंग-बिरंगी पोशाक, आकाश की ऊँचाइयों को छूने की महत्वाकाँक्षा…
प्रवासी देशों में हिंदी : स्थति और संभवनाएँ कारमेन सुयश्वी देवी जानकी सूरीनाम भी एक प्रवासी देश है और यहाँ हिंदी के अलावा हमारी मातृ भाषा सरनामी है और सब…
यूक्रेनी और हिंदी भाषाई दुनिया की तस्वीर में बैल के पौराणिक चरित्र का विश्लेषण आन्ना पोनोमरेंको मिथक लोगों की संस्कृति का आधार है और जीवन, इसके अर्थ, मनुष्य के आस-पास…
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी साहित्य -रेखा राजवंशी कहा जाता है साहित्य समाज का दर्पण है। ऑस्ट्रेलिया में हिंदी साहित्य का इतिहास अधिक पुराना नहीं है। लगभग चालीस वर्ष पहले हिंदी भाषी…
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी शिक्षण -रेखा राजवंशी ऑस्ट्रेलिया भी भारत की ही तरह एक बहु-सांस्कृतिक देश है, जहाँ अनेक देशों के लोग आकर बस गए हैं। यहाँ के खान-पान, रंग, रूप,…
श्येन परों पर ठहरी हिन्दी -डॉ. आरती ‘लोकेश’ दुबई, यू.ए.ई. किसी विदेश भ्रमण के दौरान हर व्यक्ति एक विदेशी भाषा को हर समय सुनने के लिए अपने कानों को तैयार…
थाईलैंड में हिंदी थानाभद आजकल भारतीय सभ्यता सर्वव्यापी उपलब्ध है क्योंकि प्राचीन काल में मूल भारतीय निवासी दुनिया भर में भ्रमण करते थे इसलिए वर्तमान में हम देख सकते है…
आश्चर्य का प्रतीक – सीगीरिय एम्. एम्. नयना कुमारि
सिंहली संस्कृति एम. नधीरा शिवंती ऐसा विश्वास किया जाता है कि राजकुमार विजय और उसके 700 अनुयायी ई. पू. 543 में श्रीलंका में जहाज से उतरे थे। ये लोग “सिंहल”…
श्रीलंका के साहित्यकार एम. नधीरा शिवंती सभी देशों में उन देशों के साहित्य, साहित्यकारों के कारण जाने जाते हैं। श्रीलंका छोटा द्वीप है। फिर भी देश का साहित्य दुनिया के…
श्रीलंका का इतिहास एम. नधीरा शिवंती इतिहासकारों में इस बात की आम धारणा थी कि श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिम मानव एक ही थे। पर अभी…