Month: June 2026

पूर्वोत्तर भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार

पूर्वोत्तर भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एन.एम.सी.एम.) एवं उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एन.ई.एच.एच.डी.सी.) के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी “लिविंग हेरिटेज इन…

“ॐ जय जगदीश हरे’ के अमर रचनाकार पंडित श्रद्धाराम शर्मा ‘फ़िल्लौरी’ का स्मरण”

“ॐ जय जगदीश हरे’ के अमर रचनाकार पंडित श्रद्धाराम शर्मा ‘फ़िल्लौरी’ का स्मरण” ॐ जय जगदीश हरे’ आरती के रचनाकार तथा हिन्दी के प्रथम उपन्यास भाग्यवती के अमर सर्जक पण्डित…

“आधुनिकता का संत्रास और संबंधों का साधनीकरण” (आलेख) : मनोज श्रीवास्तव

“आधुनिकता का संत्रास और संबंधों का साधनीकरण” (आलेख) : मनोज श्रीवास्तव सन् १९८० में जब सुभाष घई की फ़िल्म ‘क़र्ज़’ भारतीय सिनेमाघरों में आई, तो दर्शकों ने उसे एक रोमांचक…

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है जुड़ना…

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ்

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ் யோக வகுப்பில் எங்களிக்கப்பட்டதுமூச்சுப் பயிற்சிஅதாவது மூச்சை உள்ளிழுத்து வெளியே மெதுவாக விட வேண்டிய பயிற்சி. அப்போது நான் மூச்சின் வகைகளை உணர்ந்து சிந்தனையில் ஆழ்ந்தேன். அன்றாடம் நாம் ஓயாடிமூச்சிறைக்க வேலை…

योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज

योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज योग की कक्षा में मुझेदिया गया योगाभ्यास। श्वास लेने और छोड़ने कीविधि मुझे बताई गई। तब मैं श्वास के अनेक प्रकारों सेअवगत…

“कर्मवीर सम्मान से अलंकृत हिंदी साधना : भोपाल में ‘विश्व में हिंदी’ का गौरवपूर्ण प्रस्तुतीकरण”

“कर्मवीर सम्मान से अलंकृत हिंदी साधना : भोपाल में ‘विश्व में हिंदी’ का गौरवपूर्ण प्रस्तुतीकरण” माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल देश का अनूठा संस्थान है।…

स्वर, साधना और परंपरा का अद्भुत संगम

स्वर, साधना और परंपरा का अद्भुत संगम विश्व संगीत दिवस एवं संगीत-विदुषी डॉ. प्रेमलता शर्मा की पुण्य-स्मृति में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, कलाकोश संविभाग तथा अखिल भारतीय गान्धर्व महाविद्यालय…

“समत्वं योग उच्यते : योग का शाश्वत संदेश”

“समत्वं योग उच्यते : योग का शाश्वत संदेश” समत्वं योग उच्यते: भारत की प्राचीन ऋषि-परंपरा ने विश्व को जो अमूल्य ज्ञान-संपदा प्रदान की है, उसमें योग का स्थान अत्यंत विशिष्ट…

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन 

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन अभी भी विश्वास नहीं आता है कि शैल जी हमें छोड़कर चली गई हैं। मेरा और उनका साथ बहुत…

बेंगलूरु में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 50 वाॅं नागरी लिपि राष्ट्रीय अधिवेशन

बेंगलूरु में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 50 वाॅं नागरी लिपि राष्ट्रीय अधिवेशन 50वाँ नागरी लिपि राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 21 जून 2026 को बेंगलूरु में नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली एवं बेंगलूरु…

विष्णु प्रभाकर जी के जन्म दिवस विशेष : डॉक्टर सविता चड्ढा

विष्णु प्रभाकर जी के जन्म दिवस विशेष : डॉक्टर सविता चड्ढा एक बहुत ही महत्वपूर्ण शख्सियत, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, मेरे परम आदरणीय और बहुत ही प्रिय यायावर साहित्यकार विष्णु प्रभाकर जी…

योग : भारतीय संस्कृति और वैश्विक उपहार विषयक वैश्विक संगोष्ठी सम्पन्न

योग : भारतीय संस्कृति और वैश्विक उपहार विषयक वैश्विक संगोष्ठी सम्पन्न विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक…

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : देश-विदेश के साधकों ने मनाया योग महोत्सव

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : देश-विदेश के साधकों ने मनाया योग महोत्सव रियाद में उत्साहपूर्वक मनाया गया 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस रियाद में आज 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े…

गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पूजा की माला में कैसे तो गुँथ गयाएक फूल गजरे काअर्चना के बोलों से आ जुडीमुजरे की एक कड़ी। गंगा…

इस तरह तो ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

इस तरह तो ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इस तरह तो दर्द घट सकता नहींइस तरह तो वक़्त कट सकता नहींआस्तीनों से न आँसू पोछिएऔर ही तदबीर कोई सोचिए।…

पाँच मुक्तक ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

पाँच मुक्तक ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. मेरा विश्वास पराजय को ज़हर होता हैमेरा उल्लास उदासी को क़हर होता हैमुझे घिरते हुए अँधियारे की परवाह क्यामेरी हर रात…

यात्रा ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

यात्रा ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इन पथरीले वीरान पहाडों परज़िन्दगी थक गई है चढ़ते-चढ़ते । क्या इस यात्रा का कोई अंत नहींहम गिर जाएँगे थक कर यहीं कहींकोई…

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