Author: वैश्विक हिंदी परिवार

डॉ. माधव कौशिक को दिया जाएगा रशिया का सबसे बड़ा दोस्तोएवस्की स्टार अवॉर्ड – (समाचार)

राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक को दोस्तोएवस्की स्टार अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह रशिया का सबसे बड़ा लिटरेरी अवॉर्ड माना जाता है। यह सम्मान डॉ. कौशिक…

नेशनल काउन्सिल फॉर कल्चर, आर्ट्स एंड लिटरेचर, कुवैत और अंजुमन ए पंखुड़ी अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी ओलंपियाड २०२५ फ़्लायर का लोकार्पण – (रिपोर्ट)

हिंदी ओलंपियाड २०२५ फ़्लायर का लोकार्पण भारतीय दूतावास, कुवैत, नेशनल काउन्सिल फॉर कल्चर, आर्ट्स एंड लिटरेचर तथा कुवैत हेरिटेज सोसाइटी एवं नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया और मिनिस्ट्री ऑफ इनफॉर्मेशन एंड…

कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक़ को मिला बुकर पुरस्कार – (विचार स्तंभ)

Deepa Bhatti – अनीता वर्मा कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक को उनके अंग्रेज़ी में अनूदित कहानी संग्रह ‘हार्ट लैंप’ के लिए प्रदान किया गया है। इन कहानियों का कन्नड़ से अनुवाद…

सिंदूर – (कविता)

गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’, मॉरीशस सिंदूर जान हथेली ले उतरे हैं, अपने सारे वीर।बदला ये सिंदूर का आज, ले पोंछेंगे नीर।। पानी सिर से हुआ है उपर,खैर नहीं इस बार।कुचलने फ़न…

गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’ – (परिचय)

गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’ अवकाश प्राप्त सरकारी कर्मचारी। हिन्दी-भोजपुरी भाषा प्रेमी। वर्तमान में मॉरीशस तथा भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं में, जिनमें मंथनश्री, वर्तिका, विश्व हिन्दी साहित्यिक समूह, जागरण, आभा साहित्य…

डिजिटल हिन्दी की यात्रा – (पुस्तक परिचय)

डिजिटल हिन्दी की यात्रा भूमंडलीकरण ने हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ भारतीय भाषाओं को भी काफी प्रभावित किया है। आज के यांत्रिक युग में भाषा का प्रयोग केवल…

विनयशील चतुर्वेदी की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल रहते हैं किस तौर यहाँ पर हाल न पूछोमिलती है किस भाव यहाँ पर दाल न पूछो आत्महत्या पर खेतिहर की भी साहब जीहंसते हैं कि…

चाय नहीं तो चाह नहीं – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया चाय नहीं तो चाह नहीं मेरा घरोंदा… और मेरी चाय,कितना मदहोश नशा है ये।चलो फिर,उगते और डूबते सूरज के साथचाय पीते हैं।रिमझिम बारिश,और तेरा मादक…

बेशुमार दर्द – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बेशुमार दर्द खंडहर के सन्नाटे… कुछ बोल रहे हैं,जुगनू बनकर रिश्ते… छलक रहे हैं।गूँजती थी जो बांसुरी,उसी राग को अब मन खोज रहा है,रीते-रीते कमरे…मौन…

महिला दिवस – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया महिला दिवस फिर आया महिला दिवस,फिर मचा शोर — नारी-शक्ति का।फिर सुनाई दी आवाज़ — अस्मिता और सम्मान की,और दोहराई गई कहानी — अत्याचार और…

बाबा की साइकिल की कहानी – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बाबा की साइकिल की कहानी बाबा की साइकिल की कहानीबचपन की वो यादें सुहानी,कितनी खूबसूरत सी —बाबा की साइकिल की कहानी।मेरे बाबा की दो चीजें…

मन कहता है – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया मन कहता है मन कहता है.एक कहानी लिखूँ।ना कोई मोहब्बत की दास्तान,ना ही प्रकृति के रंगों की कहानी।ये है समाज में सड़न की तरह फैली…

वो जो मेरा मोहल्ला था – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया वो जो मेरा मोहल्ला था वो जो मेरा मोहल्ला था,उसमें मेरा घर — “मनुस्मृति” था।घर का कमरा भले ही छोटा था,मगर खचाखच भरा रहता था…सबके…

संवेदनशील विश्वास – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया संवेदनशील विश्वास ना जाने कितनी बार पूछा होगा,क्या हाल-चाल हैं आपके?चलो माना कि जब सुनाने लगे हम हाले-दिल,कर चले तुम — सुनकर भी अनसुना।कह देने…

हिसाब – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया हिसाब चलो करते हैं हिसाब,वो छोटी-छोटी ख़ुशियों का,तुमसे की हुई बातों में लिपटी हुई ज़िंदगी का।ये फ़ासले, ये दूरियाँ,ये बेवजह रूठना,गुज़ार देना वक्त,सिर्फ़ ये तय…

हम फिर मिलेंगे… – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया हम फिर मिलेंगे… सुनिए ना,कोशिश अब भी करती हूँ,आपका हाथ थामने की,दिल की गहराइयों मेंअब भी बसा है कहीं आपका वजूद।बिस्तर की सिलवटों में ढूंढती…

मैं एक ऐसा पौधा सिंच रही हूँ… – (कविता)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया मैं एक ऐसा पौधा सिंच रही हूँ… मैं एक ऐसा पौधा सिंच रही हूँ,जिसकी समझदारी हर ग़लतफ़हमी से मुक्त,हर भ्रम से आज़ाद है।मैं एक ऐसा…

इंगीता चड्ढा – (परिचय)

डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर) जन्म: सूरत (भारत)शिक्षा: एमबीबीएस, एम.डी. (प्रसूति एवं स्त्री रोग)वर्तमान नागरिकता: ऑस्ट्रेलियाई नागरिक। डॉ. इंगीता चड्ढा एक अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने चिकित्सा के साथ-साथ रचनात्मक…

प्रश्न – (कविता)

-आशा बर्मन, कनाडा प्रश्न यह प्रश्नचिन्ह क्यों बार-बार ?क्यों उसे जीत, क्यों मुझे हार ?यह प्रश्न उठे क्यों बार-बार ? जीवन में जो भी किये कर्म,तत्समय लगा था, वही धर्म…

तुमने मुझको नहीं मनाया – (कविता)

-आशा बर्मन, कनाडा तुमने मुझको नहीं मनाया तुमने मुझको नहीं मनाया बात ना कोई ऎसी भारी.हो गयी तकरार हमारी,सीमा पार हुई जब बातें,चुप रहने की मेरी बारीयत्न किया, पर थमें…

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