Category: कविता

उक्ति के बहाने से – (कविता)

उक्ति के बहाने से कुछ भी कहावो वाक्य हैअपना मत रखातो कथन हैकथन की ओर उँगलीउक्ति हैसारगर्भितया कि मर्मबेधक उक्तिसूक्ति हैऔर बरसों बरस का अनुभवचढ़ जाएलोगों की जुबान परतो लोकोक्ति…

मुहावरे और लोकोक्ति की भिड़ंत – (कविता)

मुहावरे और लोकोक्ति की भिड़ंत एक दिनमुहावरे और लोकोक्ति मेंहो गई जिद्दबाजीकदम पीछे हटाने कोन मुहावरा राजीन लोकोक्ति राजी! मुहावरे ने उचक कर कहा —तुम खुद को समझती क्या हो?तुम…

गणित और साहित्य – (कविता)

गणित और साहित्य पता नहीं कौन-सा काँटागणित के दिल में पैठ गयाकि एक दिन साहित्य से ऐंठ गयाबोला —अबे ओ साहबजादे साहित्य!कहते होंगे लोग तुझे आदित्य!पर यह मत भूलआदित्य की…

बासंती हवा – (कविता)

बासंती हवा पोर पोर में फूल खिले हैंरोम रोम खुशबू से भरानाच रहा है मन मेरा याझूम रहे आकाश धरा दिखे अधिक पीली मुझकोया किसी ने रंग डाली सरसोंमहक रही…

सुनो अमीनी – (कविता)

सुनो अमीनी दरख़्त की डाल…ऊंची फुनगी पे बैठीगौरैया से बतियातीअपनी जिज्ञासा रोक नहीं पायी…इक दिन सवाल कर ही बैठी… उड़ान के हौंसलेकहाँ से लाती हो तुम…?चीलों, गिद्दों और बाज़ की…

औरतें – (कविता)

औरतें खिलखिलाती धूप सीऔरतेंअलसुबह चूल्हे को लीपतीगुनगुनाती हैंअलसाई तंद्रा को भगानेखदबदाते पानी के धुएँ मेंतलाशती हैंखुशियों की फरमाइशेंऔरनन्हें हाथों मेंचाँद सी रोटी थमाबोसा लेकेभरपूर मुस्कुराती हैं। पूरे दिन कोठेंगा दिखाचल…

आहट – (कविता)

आहट सर्द रातों मेंकोहरे को चीरतीएक सुलगी सी आहटबेलाग लिपट जाती हैबारंबार कुनकुनी धूप कोअपनी दोहर में लपेटे..! कभीचादर की सलवटों मेंउदासी की संतप्त सांसेंबीतने नहीं देतींसिरफिरी ख्वाहिशों कोउनकी उद्दाम…

युयुत्सु – (कविता)

युयुत्सु किसने चाहा युयुत्सु बनना..?सत्य के पक्ष में डटे रहनासमय की नंगी तलवार पे चलनावो भी बिना डगमगाए…!!!कुछसत्ता के पक्षधरअक्सर प्रश्नों के बवंडरउड़ा देते हैंआँखों में धूल की मोटी परत…

हाथ से फिसलती जमीन… – (कहानी)

हाथ से फिसलती जमीन… तेजेंद्र शर्मा एम.बी.ई. “ग्रैंड पा, आपके हाथ इतने काले क्यों हैं? आपका रंग मेरे जैसा सफेद क्यों नहीं हैं?…आप मुझ से इतने अलग क्यों दिखते हैं?”…

भारत एकता आधार शंकरा – (कविता)

भारत एकता आधार शंकरा परिचय जब सनातन हो रहा था खंड खंड हो पाखंड से बाधितजब बौद्ध धर्म प्रतिक्रिया से वह हो रहा था अपमानिततब पुनः करने वेद शास्त्र पुराण…

मैं ब्रह्मा हूँ – (कविता)

मैं ब्रह्मा हूँ मैं ब्रह्मा हूँये सारा ब्रह्मांडमेरी ही कोख से जन्मा हैपाला है इसे मैंनेढेर सा प्यार-दुलार देकरऔर ये मेरे ही जाएमेरी ही गोद काबँटवारा करने पर तुले हैंचिंदी…

लौट चलो घर – (कविता)

लौट चलो घर साँझ हो चली, लौट चलो घर। अब न शेष है आतप रवि में,सुषमा रही न दिन की छवि में,मिला ज्योति को देश-निकाला,घनी तमिस्रा छाती भू पर॥ हर…

सरस्वती वन्दना – (कविता)

सरस्वती वन्दना मुझको नवल उत्थान दो।माँ सरस्वती! वरदान दो॥ माँ शारदे! हंसासिनी!वागीश! वीणावादिनी!मुझको अगम स्वर-ज्ञान दो॥माँ सरस्वती! वरदान दो॥ निष्काम हो मन कामना,मेरी सफल हो साधना,नव गति, नई लय तान…

नया उजाला देगी हिन्दी – (कविता)

नया उजाला देगी हिन्दी तम-जाला हर लेगी हिन्दी,नया उजाला देगी हिन्दी।विश्व-ग्राम में सबल सूत्र बन,सौख्य निराला देगी हिन्दी।द्वीप-द्वीप हर महाद्वीप में,हम हिन्दी के दीप जलाएँ। जीवन को सक्षम कर देगी,वर्तमान…

धरती कहे पुकार के – (कविता)

धरती कहे पुकार के दूर-दूर तक फैली धरती,देखो कहे पुकार के।ओ वसुधा के रहने वालों!रहो सर्वदा प्यार से॥ नाम अलग हैं देश-देश के,पर वसुन्धरा एक है,फल-फूलों के रूप अलगपर भूमि…

मेरी काया – (कविता)

मेरी काया श्वासों के द्वार पर खड़ीमेरी कायाकाल का कासा पकड़ेमुक्ति का दान माँगती है! मेरी कायामेरा दिल चाहता है,तेरे मस्तक पर मैं कोई नया सूरजरौशन कर दूँ! तेरे पैरों…

गुमशुदा – (कहानी)

गुमशुदा बहुत सरल लगता था कभीचुम्बकीय मुस्कराहट सेमौसमों में रंग भर लेना सहज हीपलट करइठलाती हवा काहाथ थाम लेना गुनगुने शब्दों काजादू बिखेरउठते तूफ़ानों कोरोक लेना और बड़ा सरल लगता…

विराट – (कविता)

विराट वह मेरी दोस्त-रानी,अपने अस्तित्व का रहस्य समझइक दिन जब घर से निकलीतो ओस की बूँदों नेउसके पाँव धोएपर्वत की ओर जाती पगडंडी नेउसको अपनी ओर आकर्षित कियापंछि यों की…

पैग़म्बर – (कविता)

पैग़म्बर पर्वत चोटी पे खड़ा था वहबाँहें ऊपर की ओर फैलाएशान्त स्थिरगगन की ओर झाँकता . . . काले पहरनों में वहउक़ाब की तरह सज रहा . . . उसके…

अधूरा आदमी – (कविता)

अधूरा आदमी वहअपनी हर बात अधूरी छोड़आगे बढ़ जाता हैसंतुष्ट . . .पूर्णता के आभास से विश्वस्तछोड़ जाता हैतो एक प्रश्नचिह्नहवा में लटका हुआअपना सर पटकता हुआ! प्रश्नचिह्न . .…

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