लो वसंत रितु आई – (कविता)
– कृष्णा कुमार लो वसंत रितु आई लो वसंत रितु आई -२ पेड़ों पे कोंपल मुसकाई -२सूरज की मीठी धूप पाकरकलियों ने ली अँगड़ाई लो वसंत रितु आई-२ इंद्रधनुष सा…
हिंदी का वैश्विक मंच
– कृष्णा कुमार लो वसंत रितु आई लो वसंत रितु आई -२ पेड़ों पे कोंपल मुसकाई -२सूरज की मीठी धूप पाकरकलियों ने ली अँगड़ाई लो वसंत रितु आई-२ इंद्रधनुष सा…
बढ़ते कदम – कृष्णा कुमार आज झरोंखों के पार देखाआज दिल को समझायाचल उठ, उठकर, कुछ क़दम तो बढ़ाक्या पता उसपार, इसपार से कुछ ज़्यादा हो,नीले आसमाँ के अलावा कुछ…
असहाय लोग – कृष्णा कुमार एक पाँच साल की बच्ची,और उसकी तीन साल की बहन,उचक उचक के चलते पाँव,क्या हज़ार किलोमीटर चल पाएँगे?नंगे पॉंव पे छाले कहाँ तक ले जाएगें?एक…
कविता – कृष्णा कुमार लिखने बैठी हूँ कविता,कविता ये क्या है ?ये हक़ीक़ते बयाँ है क्या ? जिसे कहना बहुत मुश्किल हो,लफ़्ज़ों से खेलना जिसकी फ़ितरत हो,कई प्रकार की कल्पना…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया कब तक ? कल तक आँख में चुभन थीआज देखता हूँ यहाँ नज़ारा ही बदला है सोचता हूँप्रकृति ने दोनों आँखें आगे लगायी हैं ताकि कदम…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया संस्कार जड़ ने कहा तने सेछाया विस्तार ले, अपरिमित प्यार देइसलिए तने रहो, बने रहो तना बोला डाली सेफैलो पर याद रहे, किस वृक्ष की तुम…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया बंजारा मन बंजर तनबंजारा मनकहाँ कहाँ न हारा मनजहाँ कहीं भी चोट लगीवहीं गया दोबारा मन ख़्वाबों के तिनके चुन चुनयादों के धागों से बुननीड़ बनाया…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया कहो तो कहो, तुम्हारा परिचय क्या है ? सृष्टि-द्वार पर दिवा-रात्रि काउषा-निशा ले आना जानाबदली में छिप कर बिजली काआवेशित संगीत सुनाना संसृति रंगमंच पर प्रतिपलअभिमंत्रित…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया अलग-अलग कुछ शब्द पड़े थे कोने में स्वर देकर तुमने समझायाअन्तर होने, न होने में जैसे ठंढी की रातों मेंकुछ जागे-जागे, कुछ विस्मृतसपनों पर कोई छलका…
–अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया खामोशी हद से ज्यादा बढ़ी है खामोशीअर्चियों की लड़ी है खामोशी ऐसा क्या खो गया है मेले मेंबुत-सी गुमसुम खड़ी है खामोशी हुए हम कैद ख़ुद की…
–अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया नाम नाम शब्द सेशब्द अक्षर सेअक्षर ध्वनि सेध्वनि कम्पन से कम्पन स्वयं-निनादित भव सेभव सम्भव हो सका भाव सेया सब लीला के प्रभाव से ? इस प्रभाव…
गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’, मॉरीशस सिंदूर जान हथेली ले उतरे हैं, अपने सारे वीर।बदला ये सिंदूर का आज, ले पोंछेंगे नीर।। पानी सिर से हुआ है उपर,खैर नहीं इस बार।कुचलने फ़न…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया चाय नहीं तो चाह नहीं मेरा घरोंदा… और मेरी चाय,कितना मदहोश नशा है ये।चलो फिर,उगते और डूबते सूरज के साथचाय पीते हैं।रिमझिम बारिश,और तेरा मादक…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बेशुमार दर्द खंडहर के सन्नाटे… कुछ बोल रहे हैं,जुगनू बनकर रिश्ते… छलक रहे हैं।गूँजती थी जो बांसुरी,उसी राग को अब मन खोज रहा है,रीते-रीते कमरे…मौन…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया महिला दिवस फिर आया महिला दिवस,फिर मचा शोर — नारी-शक्ति का।फिर सुनाई दी आवाज़ — अस्मिता और सम्मान की,और दोहराई गई कहानी — अत्याचार और…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बाबा की साइकिल की कहानी बाबा की साइकिल की कहानीबचपन की वो यादें सुहानी,कितनी खूबसूरत सी —बाबा की साइकिल की कहानी।मेरे बाबा की दो चीजें…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया मन कहता है मन कहता है.एक कहानी लिखूँ।ना कोई मोहब्बत की दास्तान,ना ही प्रकृति के रंगों की कहानी।ये है समाज में सड़न की तरह फैली…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया वो जो मेरा मोहल्ला था वो जो मेरा मोहल्ला था,उसमें मेरा घर — “मनुस्मृति” था।घर का कमरा भले ही छोटा था,मगर खचाखच भरा रहता था…सबके…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया संवेदनशील विश्वास ना जाने कितनी बार पूछा होगा,क्या हाल-चाल हैं आपके?चलो माना कि जब सुनाने लगे हम हाले-दिल,कर चले तुम — सुनकर भी अनसुना।कह देने…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया हिसाब चलो करते हैं हिसाब,वो छोटी-छोटी ख़ुशियों का,तुमसे की हुई बातों में लिपटी हुई ज़िंदगी का।ये फ़ासले, ये दूरियाँ,ये बेवजह रूठना,गुज़ार देना वक्त,सिर्फ़ ये तय…