कैनेडा में सुबह – (कविता)
कैनेडा में सुबह सुबह हो गईपग-पगबढ़ते-चढ़ते पथ परभीड़ हो गई!बोला कहीं क्या काला कव्वा?शीत पवन में पंख जम गयेबानी-बोली सभी खो गईसुबह हो गई॥ आँखों के आगेबस टिक-टिक घड़ी नाचतीऊपर…
हिंदी का वैश्विक मंच
कैनेडा में सुबह सुबह हो गईपग-पगबढ़ते-चढ़ते पथ परभीड़ हो गई!बोला कहीं क्या काला कव्वा?शीत पवन में पंख जम गयेबानी-बोली सभी खो गईसुबह हो गई॥ आँखों के आगेबस टिक-टिक घड़ी नाचतीऊपर…
भाषा की खोज पूरा दो साल का होने को आया बच्चाअभी भी चुप हैसबको फिकर है . . .बोलना शुरू किया क्या?? बच्चा, चुप देखता है,समझता है सब,समझा भी देता…
माटी की सुगंध जब अपनी माटी की गंध मुझे नहीं मिलती,तो मैं बेचैन हो जाती हूँ,ठीक उसी तरह,जैसे छोटे बच्चे को अँगूठाचूसने से रोक दिया जाए। यह भी नहीं कि…
अहं की दीवार यूँ लगा तुम को पुकारूँ, कई कई बार,और मैं तुमको बता दूँ, तुमसे कितना प्यार,पर न जाने क्यों, जिह्वा से कुछ नहीं कहती,बीच में आ जाती है,…
कल आज और कल समय की मान्यता कोइतना ऊँचा उठाओ मत,कल जो गुज़र गया है,उसे बिल्कुल भुलाओ मत। कल जो बीत गया,रीत गया मत सोचो,कल के गर्भ में जो था,वही…
यदि सुख लंबा बना रहे तो यदि सुख लंबा बना रहे तोमन में द्वंद्व उठाता!मानव – मन से एक दशा मेंलंबा रहा न जाता! यदि सुख बना रहे दिन –…
तुम किसी भी विवशता – वश तुम किसी भी विवशता – वशमीत मत मुझको बनाओ!मैं तुम्हारी ‘भावना का अंग –कैसे बन सकूँ गा?’ यह बताओ! ‘मीत होना’ प्राण कापारस्परिक अनुबंध…
जो आलोचना और की करतेजो आलोचना और की करतेवह ही यदि हम निज की कर लें!तो संभवत: इस जगती केअनगिन ‘तापों का भव’ तर लें! अन्य जनों में दोष देखनाबहुत…
आज तुम जीवित हो, हर्ष लेकर जियो आज तुम जीवित हो, हर्ष लेकर जियोमृत्यु का भय न हर्ष को डसे,मृत्यु जब होगी, तब होगीमृत्यु का भय न आज को कसे!…
१९ जनवरी १९९०, विस्थापन दिवस उस भयानक रात को,मैं शामिल था उन हज़ारों विचलित आत्माओं मेंजिन्हें घर से बेघर करने काषड़यंत्र रचा गया था सरहद पारधधकती आग से, उस धौंस…
प्रियतम तुम्हारा पत्र कितना छोटा है? आज दिन की धूप में –प्रियतम तुम्हारा पत्र कितना छोटा है?इस विरह पथ पर बस एक ही सहारा था,तुम्हारे मन की व्यथा सुनने का।पर…
चुप रही वितस्ता चुप्पी उत्तर नहीं है हर प्रश्न का,क्यों तुम बहती रही चुपचाप?हुई एक प्रलय,मेरी पावन ऋषि भूमि लहूलुहान हुईनिर्दोषों की, माताओं की, बहनों कीचीख़ो-पुकार से घाटी गुंजायमान हुईपर…
दीपमाला मेरे दीपों की माला मेंएक दीप तुम्हारा भी है साँसों की जीवनमाला मेंएक साँस तुम्हारा भी हैआँखों से बहती धारा मेंएक बूँद तुम्हारी भी है मेरे दीपों की माला…
अहसास क्योंकि सपने अभी भी आते हैंमन में आस जगमगाती है,तुम नहीं हो आसपास कहीं, परतुम्हारे होने का अहसास हो आया है। यादों का कारवां अभी भी आता हैपलकों ने…
सिर्फ़ एक बूँद मुझे तो आस थीएक बूँद कीउस बूँद की जोमेरी आँसुओं केखारेपन में मिठास भर दे! आस तो स्वाति नक्षत्र केउस बूँद की थी जोसीप को मोतियों के…
सारे अपने तारे आकाश में तारे गिननासबसे पहले सात तारे गिननाहम बहनों और सखियों का एकखेल ही नहीं अपितु एक होड़ होती थी उजास भरी साँझ से हीसर ऊपर उठाएहम…
इन्द्रधनुषी लहर सुदूर देश की पुरवाई सेआख़िर आ ही जाती है,मन की धानी परतों की इन्द्रधनुषी लहर . . .होली, दिवाली के रंगों औरदीयों में बिखरती –झिलमिलातीसुनहरी खनक सबको सुनाने।…
पिता का दिल मज़बूत शरीर है यह जो दिखताअंदर मेरे भी है –कोमल सा दिल, मेरा अपना। है धुँधली सी, पर हैं गहरी यादें,देखा है छुप-छुपचुपके से आँसू पोंछते। भारी…
बसंत आया था बसंत आया था . . .बसंत-ऋतु का जादू भरमाती,प्रकृति इतराती, निखारती रूपजगत में करती उमंग-बहार का पसेरा।चकित हो देखा, अजान मानुस है बेख़बर,बन मशीनी पुतला,जी रहा है…
ये पत्ते अभी कल ही तो ये पत्ते शाख से जुड़े,एक प्राण, एक मन,एक जीव हो फले–फूले,अपने चरम उत्कर्ष की –ललक लिए जीए, अपनी पूर्णता से।आज पीली चादर में परिणित,शाख…