Category: कविता

पगलाई आँखें ढूंढती – (कविता)

पगलाई आँखें ढूंढती पगडंडी के पदचिन्ह से भीक्षितिज देखा हर जगहपगलाई आँखें ढूंढती अपने पिया को हर जगह। फूल सूंघे, छुअन भोगीसपन का वह घरकचनार की हर डाल लिपटी राह…

चिढ़ाते तुम! – (कविता)

चिढ़ाते तुम! आचमन भर, दे रहे हो, नदी में सेचिढ़ाते तुम!महामायानींद में कुछ बाँध लेतीमधुर सपनो की सुगंधि, प्यास बनतीबाग महके फूल पाया, सिकुड़ता सा;चिढ़ाते तुम! भूख की चिंता नहींमैं…

कविराज बने फिरते हो – (कविता)

कविराज बने फिरते हो लाट साहब की तरह रोजकविराज बने फिरते होहवा निकल जाएगीभंडाफोड़ करूंगी याद रहे।माथापच्ची कौन करे,तुम बहस किसे जिताते होकवि-सम्मेलन में जातेया कहाँ समय बिताते होजासूसी से…

चल पड़ी है वेदना – (कविता)

चल पड़ी है वेदना खुशी की राहें भटकती मोड़ पर, हर राह परआँसुओं में डूबती लो चल पड़ी है वेदना नैन जलते थे अंधेरी व्यथाओं की आग परसंग काजल देख…

उलझा दिए हैं किस तरह – (कविता)

उलझा दिए हैं किस तरह जिन्दगी नेमायने उलझा दिए हैं किस तरहतिमिर नेकिरणों के पग उलझा दिए हैं किस तरह मंथन हुआ, क्षीर सागर,हिलोरें ले कह रहाविष पयोधर साथ मिल…

सूची – (कविता)

सूची उलझा दिए हैं किस तरहचल पड़ी है वेदनाकविराज बने फिरते होचिढ़ाते तुम!पगलाई आँखें ढूंढतीरूह में लपेट करआनंद ही आनंदधनुष-बाण तेरे घुस आते।भूत जो अब घट गया हैना हो उदास,…

चंद्रयान ने खिड़की खोली – (परिचय)

चंद्रयान ने खिड़की खोली इंद्रधनुष की किरणो से चंद्रयान की हँसी ठिठोली। उड़ान का फर्राटा ऐसा,ठुमकों पर चलती हो गोलीमामा देखेंगे कठपुतलीनाचे पहनी घाघर चोलीकत्थक गरबा और भाँगड़ा, नृत्य की…

वसील सिमोनेंको की युक्रेनी कविता का अनुवाद (अनुवाद)

मूल कविता : वसील सिमोनेंको अनुवाद : यूरी बोत्वींकिन Ти знаєш, що ти — людина Ти знаєш, що ти — людина.Ти знаєш про це чи ні?Усмішка твоя — єдина,Мука твоя…

गीओर्गी दार्चियाश्विली की कविता का अनुवाद – (जोर्जियन से अनुवाद)

जन्मदिन (8 दिसंबर) पर विशेष मूल कविता : गीओर्गी दार्चियाश्विली अनुवाद : गायाने आग़ामालयान एस्मेराल्डा लगता है कि मैं सपने में हूंमानो मेरी आत्मा उड़ रही होवहाँ उस औरत के…

ध्वनियों का संसार – (कविता)

ध्वनियों का संसार क्या तुमने कभी विचार कियाशब्दों को कोई नाम दिया? आवाहन है तो हुंकारढोल-नगाडे की टंकार ।पीड़ा में निकले सिसकारी,आनंदित मन किलकारी। पंछी बोलें चहचह चुक-चुकभँवरे करता गुनगुन…

सबके अपने अपने राम – (कविता)

सबके अपने अपने राम (आल्हा छंद) मुल्ला पंडित सिक्ख मसीहा, नाना पंथ अनेकों नाम।सभी धर्म का मूल एक है, किंतु सभी के अपने राम॥ हर रजकण में राम व्याप्त हैं,…

शब्दों की वेणी – (कविता)

शब्दों की वेणी (दोहावली) शब्दों की वेणी सजा, रचें नव्य प्रतिमान।गद्य पद्य हो या ग़ज़ल, सुन्दर बने सुजान॥ नव्य नवल नूतन प्रखर, रचना रचें महान।ताल छंद सुर से सजी, जाने…

सुखद सुहाना भोर – (कविता)

सुखद सुहाना भोर (शृंगार छंद) हुआ अब सुखद सुहाना भोर।अरुण झांके प्राची के छोर॥यामिनी भाग गयी निज धाम।प्रात किरणें निकली अविराम॥ विहग नित कलरव में हैं मग्न।दृश्य सुन्दर मनभावन लग्न॥भृंग…

नवोन्मेष नवतान लिखें – (कविता)

नवोन्मेष नवतान लिखें (लावणी छंद) नये विचारों को संचित कर,आओ नवल विहान लिखें।नव पीढ़ी हो नूतन पथ पर प्रगतिशील पथगान लिखें॥नए विचारों से सजधज करनूतन गीत विधान लिखें।नूतन पंक्ति उक्ति…

जीवन यात्रा – (कविता)

जीवन यात्रा ये जीवन के लम्बे-चौड़े टेढ़े-मेढ़े रास्तेकुछ तेरे हिस्से के हैं तो कुछ हैं मेरे वास्तेक़दम न चाहें फिर भी हमें चलते ही जाना हैमिल जायेगी मंज़िल यूं ही…

ये कमाल हमें करना है… – (कविता)

ये कमाल हमें करना है… समय कठिन है फिर भी हमेंहंसते-गाते रहना है,हो धारा चाहे जितनी उल्टीदरिया-सागर तरना है,लिये हाथ में प्रेम पताकाआसमान तक चलना हैये कमाल हमें करना है,नहीं…

वसीयतनामा – (कविता)

वसीयतनामा क्यों न हमखुले आकाश तलेबहती हवा, बहता पानीपरिंदों के गीत, जीवन के संगीत,इन सबकी मौजूदगी मे आजएक दूजे के दिल परअपना-अपना वसीयतनामा लिख दें,जीवन तो एक दूजे के साथ…

मुझको चाहिये – (कविता)

मुझको चाहिये चाहिये मुझको अदब की इक सौग़ात चाहियेकलम को रवानी मेरे दिल को जज़बात चाहिये आस्मां से उतर समा जाये रग रग मे जोशब्दों की ऐसी पूरी एक क़ायनात…

होने ना होने के बीच – (कविता – अनुवाद – पंजाबी)

मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह होने ना होने के बीच ज़िन्दा होना ही तो काफ़ी नहींअपने तमाम वजूद को करना पड़ता है साबितकहना पड़ता है…

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से – (कविता)

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से सोचता हूँजब कभी जाऊँगा पृथ्वी सेक्या ले जाऊँगा अपने साथ सफलताएं छूट जाएंगी यहींदेह के मैल की तरह यदि उन्हें मान लें इत्रतो भी वे…

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