Category: कविता

धीरे-धीरे रीतती है करूणा – (कविता)

धीरे-धीरे रीतती है करूणा धीरे -धीरे रीतती है करूणाधीरे-धीरे संवेदनाएं बदलने लगती हैं प्रस्तर मेंधीरे-धीरे सूख जाती है भावुकता की नदीधीरे-धीरे मनुष्य परिवर्तित हो जाता है किसी यंत्र में धीरे-धीरे…

नियम की तरह – (कविता)

नियम की तरह वे लोग जिनसे मिले बिना शाम ढलती ही नहीं थीउदास बैठ जाती थी गुलमोहर की किसी नर्म शाख परलगता था जैसे ये न होंगे तो कैसे कटेगा…

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा – (कविता)

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा मेरा बनारस वह नहीं है जो बहुत सी कविताओं में हैवह भी नहीं जिसका ज़िक्र किया करते थे मित्र बातचीत मेंकभी हँसते हुए…

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते – (कविता)

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते जब भी पहनता हूँ जूतामुझे मृणाल कांति घोष के वे जूते याद आते हैंजिन्हें सन् 1997 के अक्टूबर में पहनकर गया था मैंनौकरी का…

तुम सुखी रहना – (कविता)

तुम सुखी रहना आज फिर तुम्हारी याद आई! चली पुरवाई उभरा घावपर सोचता हूँक्या तुममें बचा होगा कोई भावअब भी होगा मिलने का चावया भूल चुकी होगी तुम अतीत का…

अछूते राग – (कविता)

अछूते राग सर्दियाँ आ गईंतुम कहाँ हो? लोग घूम रहे हैं रंगरेज बनेखुद भी रंगे दूजे को रंगेसड़कें अटी पड़ी हैं लोगों सेचेहरे पर चेहरे चिपके हैं कभी लगे है…

आज मिलेंगे – (कविता)

आज मिलेंगे तुम मिलोगे तो कहाँ से शुरू होगी हमारी बातचीत?सूरजकुण्ड सिटी हॉल्ट की हलचल भरी शामों सेया किसी उदास दोपहरी सेजब 32/3 बहस कार्यालय में हम बिना दूध की…

प्राथमिकता का व्याकरण – (कविता)

प्राथमिकता का व्याकरण बहुत जटिल होता है प्राथमिकता का व्याकरणवैसे यह निर्भर करता है व्यक्ति-व्यक्ति पर कुछ लोग अपना अर्जित सब कुछ गँवा देते हैंपर नहीं बदलते प्राथमिकताकुछ बदल लेते…

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की – (कविता)

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की नए सुख में होती है मादकताअफीम से ज़्यादा नया सुख आता हैऔर मनुष्य बहुत कुछ भूल जाता हैकई बार तो…

अनुत्तरित प्रश्न – (कविता)

अनुत्तरित प्रश्न बच्चे आजकल बहुत प्रश्न करते हैंमाँओं के पास उत्तर नहीं हैंपिता से पूछो तो झल्लाते हैंप्रश्न पूछने को बेवकूफी बताते हैंअध्यापकों के पास, हर प्रश्न केकुछ रेडीमेड उत्तर…

फूल खिल रहा है – (कविता)

फूल खिल रहा है वहाँ बगीचे में फूल खिल रहा हैनहीं, फूल हँस रहा हैफूल खुशियाँ बाँट रहा हैसुगंध लुटा रहा हैफूल शुभकामनाओं के रंग छलका रहा हैउमंगों के इंद्रधनुष…

जंगल का कानून – (कविता)

जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…

हँसी और मुस्कान – (कविता)

हँसी और मुस्कान हँसी और मुस्कान, दो बहिनेंएक होकर भी अलगएक ही डाल पर खिले दो फूलएक अधखिली कली, दूसरी पूरा खिला फूलएक भोर की पहली किरन-सी उजली, नाजुक, लजीलीदूसरी…

तमिल कवि पं. प्रेमलाल सुबरन की ‘अंजले’ कविता का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

अनुवादक : सुनीता पाहूजा तमिल भाषी कवि पं. प्रेमलाल सुबरन द्वारा 1943 में रचित कविता ‘अंजले’ का हिंदी अनुवाद अंजले हाय! अफ़सोस! क्यों हमारे हृदय पिघल न जाएँ?क्या महान भारत…

प्राकृतिक आपदा – (कविता)

प्राकृतिक आपदा बारिश की गिरफ्त में,मैं असहाय बैठी हूँ,डर के हाथों से झकझोर दी गई हूँ। जहाँ पक्षी आकर चहचहाने चाहिए थे,वहाँ केवल अराजकता और बेचैनी की गूँज चीखती है।मैं…

ब्रजराज किशोर कश्यप की कविताएँ – (कविता)

ब्रजराज किशोर कश्यप की कविताएँ 1. मानव और गणित मानव ने जब गणना सीखी वह हर्षायाबड़े चाव से उसने जोड़ा और घटाया योग और ऋण का कार्य उसे अधिक न…

श्री गुरु नानक देव जयंती पर विशेष – (श्रद्धांजलि)

हे बाबा नानक! बहुत पुरानी बात हैयुगों पुरानी नहींबाबा नानक, चहुं दिशाएं घूमतान कोई सवारी, न कोई ठेलाअपने पांवों पर चलअपने भक्तों तक पहुंचताया जो उसकी प्रतीक्षा मेंनज़रें बिछाए रहतास्वयं…

एक प्रवासी की उलझनें – (कविता)

एक प्रवासी की उलझनें अब नहीं रहापहले जैसा असहनीय प्रवासकुछ लोगों के लिएन रहे पहले जैसे प्रवासीप्रवास अब बन चुका हैएक जीवन स्थितिजिसे कभी चाहकरतो कभी मजबूरनस्वीकार करते हैं असंख्य…

अनीता वर्मा की कविता का अनुवाद – (अनुवाद)

अनीता वर्मा की कविता का अनुवाद मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह (कवि, ग़ज़लकार व सुप्रसिद्ध अनुवादक) क्या कहूँ इसे क्या कहूँ इसेसच या झूठजो कहावो…

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं – (कविता)

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं एक बार फिरमेरे गाँव मेंफसलों के मौसम मेंबच्चे उग आए हैंऔर मैंकलम थामे तैयार हूँकविता करने के लिए। यहाँ-वहाँ लोगया तो…

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