अछूते राग – (कविता)
अछूते राग सर्दियाँ आ गईंतुम कहाँ हो? लोग घूम रहे हैं रंगरेज बनेखुद भी रंगे दूजे को रंगेसड़कें अटी पड़ी हैं लोगों सेचेहरे पर चेहरे चिपके हैं कभी लगे है…
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अछूते राग सर्दियाँ आ गईंतुम कहाँ हो? लोग घूम रहे हैं रंगरेज बनेखुद भी रंगे दूजे को रंगेसड़कें अटी पड़ी हैं लोगों सेचेहरे पर चेहरे चिपके हैं कभी लगे है…
आज मिलेंगे तुम मिलोगे तो कहाँ से शुरू होगी हमारी बातचीत?सूरजकुण्ड सिटी हॉल्ट की हलचल भरी शामों सेया किसी उदास दोपहरी सेजब 32/3 बहस कार्यालय में हम बिना दूध की…
प्राथमिकता का व्याकरण बहुत जटिल होता है प्राथमिकता का व्याकरणवैसे यह निर्भर करता है व्यक्ति-व्यक्ति पर कुछ लोग अपना अर्जित सब कुछ गँवा देते हैंपर नहीं बदलते प्राथमिकताकुछ बदल लेते…
नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की नए सुख में होती है मादकताअफीम से ज़्यादा नया सुख आता हैऔर मनुष्य बहुत कुछ भूल जाता हैकई बार तो…
अनुत्तरित प्रश्न बच्चे आजकल बहुत प्रश्न करते हैंमाँओं के पास उत्तर नहीं हैंपिता से पूछो तो झल्लाते हैंप्रश्न पूछने को बेवकूफी बताते हैंअध्यापकों के पास, हर प्रश्न केकुछ रेडीमेड उत्तर…
फूल खिल रहा है वहाँ बगीचे में फूल खिल रहा हैनहीं, फूल हँस रहा हैफूल खुशियाँ बाँट रहा हैसुगंध लुटा रहा हैफूल शुभकामनाओं के रंग छलका रहा हैउमंगों के इंद्रधनुष…
जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…
हँसी और मुस्कान हँसी और मुस्कान, दो बहिनेंएक होकर भी अलगएक ही डाल पर खिले दो फूलएक अधखिली कली, दूसरी पूरा खिला फूलएक भोर की पहली किरन-सी उजली, नाजुक, लजीलीदूसरी…
अनुवादक : सुनीता पाहूजा तमिल भाषी कवि पं. प्रेमलाल सुबरन द्वारा 1943 में रचित कविता ‘अंजले’ का हिंदी अनुवाद अंजले हाय! अफ़सोस! क्यों हमारे हृदय पिघल न जाएँ?क्या महान भारत…
प्राकृतिक आपदा बारिश की गिरफ्त में,मैं असहाय बैठी हूँ,डर के हाथों से झकझोर दी गई हूँ। जहाँ पक्षी आकर चहचहाने चाहिए थे,वहाँ केवल अराजकता और बेचैनी की गूँज चीखती है।मैं…
ब्रजराज किशोर कश्यप की कविताएँ 1. मानव और गणित मानव ने जब गणना सीखी वह हर्षायाबड़े चाव से उसने जोड़ा और घटाया योग और ऋण का कार्य उसे अधिक न…
हे बाबा नानक! बहुत पुरानी बात हैयुगों पुरानी नहींबाबा नानक, चहुं दिशाएं घूमतान कोई सवारी, न कोई ठेलाअपने पांवों पर चलअपने भक्तों तक पहुंचताया जो उसकी प्रतीक्षा मेंनज़रें बिछाए रहतास्वयं…
एक प्रवासी की उलझनें अब नहीं रहापहले जैसा असहनीय प्रवासकुछ लोगों के लिएन रहे पहले जैसे प्रवासीप्रवास अब बन चुका हैएक जीवन स्थितिजिसे कभी चाहकरतो कभी मजबूरनस्वीकार करते हैं असंख्य…
अनीता वर्मा की कविता का अनुवाद मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह (कवि, ग़ज़लकार व सुप्रसिद्ध अनुवादक) क्या कहूँ इसे क्या कहूँ इसेसच या झूठजो कहावो…
लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं एक बार फिरमेरे गाँव मेंफसलों के मौसम मेंबच्चे उग आए हैंऔर मैंकलम थामे तैयार हूँकविता करने के लिए। यहाँ-वहाँ लोगया तो…
बौनों की बारात झूम-झूम कर नाच रही, छायाएँ आधी रातधूम धाम से निकल रही है, बौनों की बारात सोच भी बौनी, कर्म भी बौना, मन का हर कोना है घिनौनाजो…
शब्द एक रास्ता है शब्द एक रास्ता हैमेरा विश्वास हैयह सोचकर मैंने उसे पुकारापर उधर से कोई उत्तर नहीं मिला। मैंने फिर सोचाशब्द एक रास्ता हैऔर शब्दों को कागज पर…
दर्द, भय और पीड़ा कोई भी दर्द, भय और पीड़ा से बच नहीं पाता हैफिर भी दर्द से ज्ञान आ सकता है,डर से साहस आ सकता है,दुख से ताकत आ…
खुशियाँ आनंद और प्रसन्नता देती है खुशियाँजिंदा रहने की औषधि यही तो है मियाहर्ष, सुख, आमोद, प्रमोद या कहो उल्लासइसी के पान से बुझती है हर किसी की प्यासविचारों की…
आंतरिक स्कूली शिक्षकों की याचिका हम उल्लू नहीं है जो रात को दिखते हैंन ही कोई निशाचर बिल्लीहमारी आंखें धुंधली है हम नहीं देख सकतेहम चमगादड़ की तरह अंधे हो…