Category: विधा

मैं कौन हूँ? : दक्ष वर्मा

मैं कौन हूँ? : दक्ष वर्मा दक्ष ने पूछा है ‘मैं कौन हूं’एक बच्चा स्कूल से हाई स्कूल, हायर सेकंडरी की पढ़ाई के बाद कॉलेज एडिशन के लिये जाता है…

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ रवि यादव का जन्म महराजगंज, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय तथा परास्नातक की शिक्षा काशी हिंदू…

मिलिए प्रदेश की पहली महिला पत्रकार अलकनंदा साने से विशेष बातचीत : स्वरांगी साने

मिलिए प्रदेश की पहली महिला पत्रकार अलकनंदा साने से विशेष बातचीत : स्वरांगी साने सफेद बाल, साधारण सूती साड़ी और हिंदी भाषा में बात, यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को…

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श”

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श” प्रखर शर्मा समकालीन हिन्दी के उदीयमान युवा कवि, साहित्यकार एवं शोधार्थी हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के निवासी…

औरत,माटी और प्रेम की कविताएं – आशमा कौल : समीक्षक – निशा चंद्रा

औरत,माटी और प्रेम की कविताएं – आशमा कौल : समीक्षक – निशा चंद्रा औरत, माटी और प्रेम…..यह तीनों शब्द अपने भीतर जीवन की सबसे गहरी संवेदनाओं को समेटे हुए हैं।…

कहानी “पुरु और प्राची” ( दिव्या माथुर ) समीक्षा : डॉ. सुनीता शर्मा

कहानी “पुरु और प्राची” ( दिव्या माथुर ) समीक्षा : डॉ. सुनीता शर्मा आदरणीया दिव्या माथुर जी, सादर प्रणाम। वैश्विक हिन्दी परिवार में आपकी कहानी “पुरु और प्राची” पढ़ने का…

जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र

जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र सन् 1933 की बात है। भाई सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने कुछ कविताएं अपनी छापनी चाहीं। जेल से उन्होंने…

साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर

साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर यूनेस्को के घोषणापत्र में लिखा है कि युद्ध मन में ही पैदा होता है और वहीं उसको रोका जा सकता है…

डॉ.पद्मा श्रीवास्तव-शब्द से संस्कृति तक : डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे (साक्षात्कारकर्ता)

डॉ.पद्मा श्रीवास्तव-शब्द से संस्कृति तक : डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे (साक्षात्कारकर्ता) आज हम ऐसी साहित्य साधिका, शिक्षाविद्, प्रशासक और संस्कृति-चिंतक के सृजन-संसार से रूबरू होने जा रहे हैं ,…

मनोज श्रीवास्तव ( साक्षात्कार ) : मानस के अनछुए पहलू

मनोज श्रीवास्तव ( साक्षात्कार ) : मानस के अनछुए पहलू डॉ. संध्या सिलावट जी ने लिया मनोज श्रीवास्तव जी, मुख्य चुनाव आयुक्त, मध्य प्रदेश का साक्षात्कार भारतीय समाज में तुलसीदास…

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने काले और सफ़ेद के बीच का कोई रंग ब्राउन हो सकता है। इन दिनों एशियन परिवारों को भी ब्राउन फैमिली…

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘ श्रीमती गजानन्‍द शास्त्रिणी श्रीमान् पं. गजानन्‍द शास्‍त्री की धर्मपत्‍नी हैं। श्रीमान् शास्‍त्री जी ने आपके साथ यह चौथी शादी की है, धर्म…

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा उन ज़िलों में त्राहि-त्राहि मच रही थी। आषाढ़ चला गया, सावन निकलने को हुआ, परन्तु पानी की बूँद नहीं। आकाश में…

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना साँसों की भीड़ मेंएक साँस है,सब साँसों को साँस बनातीजैसे वो साँस नहींएक पेड़ हो ऑक्सीज़न का! जब दिन की भाग–दौड़ में साँसें शोर मचाती,सब…

प्रतिष्ठित कवयित्री अलकनंदा साने हिन्दी और मराठी की सिद्ध साहित्यकार की अनुवादित कविताएं

प्रतिष्ठित कवयित्री अलकनंदा साने हिन्दी और मराठी की सिद्ध साहित्यकार की अनुवादित कविताएं उन्हें मध्य प्रदेश की पहली हिन्दी पत्रकार होने का गौरव प्राप्त है। जन्मना विरासत में मिली मातृभाषा…

बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद…

अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप…

पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई सरदारजी जबान से तंदूर को गर्म करते हैं। जबान से बर्तन में गोश्त चलाते हैं। पास बैठे आदमी से भी इतने जोर से बोलते…

तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ  (कविता)

तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ (कविता) हृदय में बहुत कुछ छुपाये हुए हूँ तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ . क्या क्या नही दुःख उठाया है मैंने दुपहरी को सिर पर…

धीरज आखिर टूट गया (कविता)

धीरज आखिर टूट गया (कविता) और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती तट बंधों…

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