Category: भारत

मैं कौन हूँ? : दक्ष वर्मा

मैं कौन हूँ? : दक्ष वर्मा दक्ष ने पूछा है ‘मैं कौन हूं’एक बच्चा स्कूल से हाई स्कूल, हायर सेकंडरी की पढ़ाई के बाद कॉलेज एडिशन के लिये जाता है…

दिन विशेष विमर्श में अलका सिन्हा की कहानी : ‘हरदम साथ डॉट कॉम’

दिन विशेष विमर्श में अलका सिन्हा की कहानी : ‘हरदम साथ डॉट कॉम’ अलका सिन्हा एक श्रेष्ठ कथाकार और कवियत्री हैं । आज के व्यस्त और बदलते परिवेश में तकनीक…

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ

युवा लेखन विमर्श में रवि यादव का कविता पाठ रवि यादव का जन्म महराजगंज, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय तथा परास्नातक की शिक्षा काशी हिंदू…

मिलिए प्रदेश की पहली महिला पत्रकार अलकनंदा साने से विशेष बातचीत : स्वरांगी साने

मिलिए प्रदेश की पहली महिला पत्रकार अलकनंदा साने से विशेष बातचीत : स्वरांगी साने सफेद बाल, साधारण सूती साड़ी और हिंदी भाषा में बात, यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को…

दिन विशेष विमर्श में डॉ. वेद व्यथित की व्यंग्य रचना ‘मन की बात’ और ‘मेरी समझदारी और महानता’

दिन विशेष विमर्श में डॉ. वेद व्यथित की व्यंग्य रचना ‘मन की बात’ और ‘मेरी समझदारी और महानता’ डॉ. वेद व्यथित हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं बहुआयामी रचनाकार हैं। उन्होंने…

समीक्षा : जन से मिलने चले जगन्नाथ : जहाँ देवता रथ पर नहीं, जनता के हृदय पर आरूढ़ हैं – विशाल पाण्डेय

समीक्षा : जन से मिलने चले जगन्नाथ : जहाँ देवता रथ पर नहीं, जनता के हृदय पर आरूढ़ हैं – विशाल पाण्डेय जब-जब आषाढ़ का आकाश मेघों से भरता है,…

वैश्विक हिंदी परिवार के ‘कहानी विशेष’ में मधु पंत की कहानी ‘एक और कुतुबनुमा’ पर विमर्श

वैश्विक हिंदी परिवार के ‘कहानी विशेष’ में मधु पंत की कहानी ‘एक और कुतुबनुमा’ पर विमर्श मधु पंत हिंदी की प्रतिष्ठित साहित्यकार, प्रख्यात बाल साहित्यकार तथा शिक्षाविद् हैं। वे राष्ट्रीय…

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श”

“युवा लेखन विशेष में प्रखर शर्मा की कविता पर विमर्श” प्रखर शर्मा समकालीन हिन्दी के उदीयमान युवा कवि, साहित्यकार एवं शोधार्थी हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के निवासी…

कोयल अर कागलो (व्यंग्य) – बुलाकी शर्मा

कोयल अर कागलो (व्यंग्य) – बुलाकी शर्मा कथेतर विमर्श पर आज पढिए बुलाकी शर्मा जी का व्यंग्य, जो राजस्थानी लोक में बेहद प्रचलित है। इतरो बाबो-सा रो लाडकोयल बाई सिध…

मोह (कहानी) – मधुरिमा कोहली

मोह (कहानी) – मधुरिमा कोहली *********आज के विमर्श में हम पढ़ते हैं वरिष्ठ साहित्यकार, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ मधुरिमा कोहली जी की कहानी। डॉ मधुरिमा कोहली प्रतिष्ठित साहित्यकार…

जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र

जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र सन् 1933 की बात है। भाई सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने कुछ कविताएं अपनी छापनी चाहीं। जेल से उन्होंने…

साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर

साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर यूनेस्को के घोषणापत्र में लिखा है कि युद्ध मन में ही पैदा होता है और वहीं उसको रोका जा सकता है…

गुल्लो रानी : अरुणा सब्बरवाल

गुल्लो रानी : अरुणा सब्बरवाल पतझड का आगमन आरम्भ हो चुका था। वृक्षों से गिरते पत्ते हवा में अपना नृत्य दिखा रहे थे। पूरी धरा पर लाल, पीले, नारंगी और…

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘नीलकंठ’ में राष्ट्रीयता : डॉ. संध्या सिलावट

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘नीलकंठ’ में राष्ट्रीयता : डॉ. संध्या सिलावट वर्षा की पहली बूँद अभी धरती तक पहुँची भी नहीं है। दूर क्षितिज पर मेघों की गहरी परतें उमड़…

कंप्यूटर के विंडो के साथ आइए एक झरोखा भी खोलें : स्वरांगी साने

कंप्यूटर के विंडो के साथ आइए एक झरोखा भी खोलें : स्वरांगी साने ज्ञान हर तरफ़ बिखरा पड़ा है, है न? यह ज्ञान के विस्फोट का युग है। व्हाट्सऐप से…

भारत की संस्कृति अनोखी है

भारत की संस्कृति अनोखी है साम्प्रदायिक उत्पात के समय नोआखाली-प्रवास में एक दिन मनु गांधीजी के घी मल रही थीं और वह कुछ पेचीदा अंग्रेजी पत्र-व्यवहार सुन रहे थे। पत्र-व्यवहार…

आज का विमर्श रत्ना भदोरिया की दो कविताएँ

रायबरेली उत्तर प्रदेश की रत्ना भदौरिया की इन कविताओं को पढ़ते हुए आपको लगता है कि आप आज के समय से दो-चार हो रहे हैं। पेशे से वे नर्स हैं,…

प्रदक्षिणाम पदे पदे : डॉ. गरिमा संजय दुबे

प्रदक्षिणाम पदे पदे : डॉ. गरिमा संजय दुबे संसार का आदि तीर्थ, आदि कर्मकांड कदाचित परिक्रमा ही है। परिक्रमा अथवा प्रदक्षिणा की परंपरा और महत्व देखने चलते हैं तो पता…

स्वरांगी साने : न्यूटन के बहाने से….

स्वरांगी साने : न्यूटन के बहाने से…. यदि किसी क्षण आप असुरक्षित महसूस करते हैं, तो ऐसा महसूस कर पाने के लिए भी बड़े साहस की ज़रूरत होती है। दुर्बलता…

पर्यावरण भी हमारा घर : चेतन सिंह सोलंकी

पर्यावरण भी हमारा घर : चेतन सिंह सोलंकी हम घर का कचरा तो बुहार देते हैं, लेकिन बड़े घर यानी पर्यावरण को दूषित क्यों करते हैं? ये पृथ्वी हमारा बड़ा…

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