Category: भारतीय रचनाकार

हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास – (आलेख)

हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास एक लंबी प्रक्रिया है जो सदियों से चली आ रही है।…

वह ऐतिहासिक भाषण – (दिन विशेष)

वह ऐतिहासिक भाषण -रजनीकांत शुक्ला वर्ष 1893 में वह 11 सितम्बर की ही तारीख थी जब स्वामी विवेकानंद ने अमरीका के शिकागो की धर्म संसद में वह ऐतिहासिक भाषण दिया…

नटराज – (ब्लॉग)

नटराज नर्मदा प्रसाद उपाध्याय आदरणीया शोभासिंह जी ने कुबेरजी के चिंतन को केंद्र में रखकर अध्ययनपरक तथा गंभीर चिंतनपरक टिप्पणी की है। उन्हें साधुवाद।उनकी विस्तृत टिप्पणी पर अपना मत मैं…

रिमझिम बरसात भरी – (कविता)

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ *** रिमझिम बरसात भरी (उड़ियाना छंद) रिमझिम बरसात भरी, सावन सुहावनी।शिव जी का ध्यान धरें, ऋतु है सुपावनी॥नद नाले तृप्त हुए, हरियाली छायी।कोयल की कुहू-कुहू, मन…

आचार्य नंददुलारे वाजपेयी  –  (आज जिनका जन्मदिन है)

आचार्य नंददुलारे वाजपेयी रजनीकांत शुक्ल आचार्य नंददुलारे वाजपेयी का जन्म 4 सितम्बर, सन 1906 में मगरायर ग्राम, ज़िला उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिन्दी के प्रसिद्ध पत्रकार, समीक्षक,…

सियारामशरण गुप्त – (आज जिनका जन्मदिन है)

सियारामशरण गुप्त रजनीकांत शुक्ल बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार सियारामशरण गुप्त का जन्म भाद्रपद पूर्णिमा सम्वत् 1952 विक्रमी तद्नुसार 4 सितम्बर 1895 ई. को सेठ रामचरण कनकने के परिवार में मैथिलीशरण…

चाँद – (कविता)

अनीता वर्मा *** चाँद नभ पर देखे चंदा इंसीदेख-देख हँसी है छलकीनानी कहती चंदा है मामामम्मी कहती वो तो है नानीचाँदनी जैसे बाल हैं उसकेमुझे लगे ये कोई कहानीटी.वी.तो कुछ…

नन्ही बूँदे – (कविता)

अनीता वर्मा *** नन्ही बूँदे नन्हीं बूँदें टप-टप बरसेंधरती का मन देखो हरषेपेड़ों ने तो गीत सुनायानन्हा पौधा भी मुस्कायाहरी घास भी लहराती हैजानें क्या क्या गाती हैकोयल ने भी…

जल बचाओ – (कविता)

अनीता वर्मा *** जल बचाओ रिमझिम बूँदें बरस रहीं हैंधरती कितनी चमक रही हैहरा-भरा परिधान पहनकरदेखो कैसी महक रही हैपेड़ों पर कोयल कूक रही हैना जाने क्या पूछ रही हैपत्ते…

पक्का वादा – (बाल कविता)

अनीता वर्मा *** पक्का वादा पक्का वादाहम करते हैं पक्का वादानहीं खायेंगे मीठा ज़्यादाफल सब्ज़ियाँ ताक़त वालीलाती हैं चेहरे पर लालीदादू मुझको आम खिलातेपापा मीठे फल हैं लातेमुझको मेरी मम्मी…

राधा जी – (ब्लॉग)

राधा जी डॉ. नर्मदा प्रसाद उपाध्याय इतिहास में ऐसे क्षण भी आते हैं, जब ऐतिहासिकता चाहे वह कितनी ही प्रामाणिक क्यों न हो, अनैतिहासिकता के सामने पराजित हो जाती है।…

हिन्दी, जनपदीय-भाषाएं और भारतीय-साहित्य – (ब्लॉग)

हिन्दी, जनपदीय-भाषाएं और भारतीय-साहित्य राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी डा रामविलास शर्मा ने हिन्दी-जनपद और हिन्दी-जाति की बात कही थी। हिन्दी-प्रदेश के सभी लोग अपने घर-परिवार में अपने-अपने अंचलों की बोली भी…

सॉन्ग ऑफ पैराडाइज़ 2025 – भारतीय जीवनी संगीतमय ड्रामा फिल्म – (फिल्म समीक्षा)

अनीता वर्मा पद्म श्री पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित राज बेगम, जिन्हें कश्मीर की मेलोडी क्वीन के नाम से जाना जाता है, के जीवन पर रूह का…

फ़ादर कामिल बुल्के  – (आज जिनका जन्मदिन है)

फ़ादर कामिल बुल्के -रजनीकांत शुक्ला प्रख्यात हिन्दी सेवी फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म 1 सितम्बर, 1909 को बेल्जियम के पश्चिमी फ्लैंडर्स स्टेट के रम्सकपैले नामक गाँव में हुआ था। उनके…

इश्क़ मिज़ाजी से इश्क़ हक़ीक़ी तक : अमृता प्रीतम – (आज जिनका जन्मदिन है)

इश्क़ मिज़ाजी से इश्क़ हक़ीक़ी तक अनीता वर्मा जिंदगी की रसीदी टिकट पर हस्ताक्षर करने वाली पंजाबी व हिंदी की लेखिका अमृता प्रीतम के जन्मदिन पर उनसे जुड़ी पुरानी यादें…

छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! – (कविता)

डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! माँ छूती है बादल जैसेबारिश जैसे, अमृत जैसे!स्पर्श पिता काधूप हो जैसे, सूरज जैसे।दादा दादी नाना नानीकिशमिश जैसे और छुआरे।सखी…

अपनी नागरी लिपि – (कविता)

डॉ. शारदा प्रसाद *** अपनी नागरी लिपि हिंदी हो जन-जन की भाषाहिंदी हो हर-मन की आशा!बने सकल विश्व में सिरमौरऐसी है सबकी अभिलाषा!! सब मिलकर करें प्रयासहर बोली का हो…

करम परब – (कविता)

*** डॉ शारदा प्रसाद करम परब (झारखंड का लोकप्रिय पर्व) भादो माह शुक्ल एकादशीकरम परब लेकर आया!हरियर करम डाल ले भाई आयाबहना का मन हरसाया!! भाई-बहन का पर्व है प्याराकरमा-धरमा…

रक्षा बंधन – (कविता)

डॉ शारदा प्रसाद *** रक्षा बंधन सावन का पूनम का चंदाआया ले किरणों का उपहार!सकल विश्व मना रहाभाई-बहन का सुंदर त्यौहार!! कलाई सजेगी राखी सेशुभ तिलक लगेगा भाल विशाल!आरती उतारे…

झूलन – (कविता)

डॉ शारदा प्रसाद *** झूलन झूला झूलैं कृष्ण-कन्हैयामाथे मोर मुकुट अति शोभितबलि-बलि जात हैं नंद-यशोदागोपियों का मन हर्षित- मोहित सावन माह है अति मनभावनझूलैं संग-संग राधा रानी!कृष्ण-कन्हैया के मन बसतीवृषभानु…

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