Category: भारतीय रचनाकार

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर “वास्तेगुना-हुइंया”, “कुचु-पुचु”, “FOMO”, “MIA”, “Delulu”, “Clocked It”—ये शब्द कभी केवल सोशल मीडिया और युवाओं की बातचीत तक सीमित माने जाते थे।…

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पूँजी है।…

दिन विशेष विमर्श में डॉ. धनंजय कुमार की कविताएँ

दिन विशेष विमर्श में डॉ. धनंजय कुमार की कविताएँ अमेरिका के विश्व बैंक से सेवानिवृत्त, मास्टर योग शिक्षक और चिकित्सक, लेखक, कवि, नाटककार, सार्वजनिक वक्ता एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं डॉ.…

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र): डॉ. मोक्षेन्द्र

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र) : डॉ. मोक्षेन्द्र इस शोध-पत्र में हिंदीभाषी और हिंदीतर भाषी क्षेत्र के रूप में समूचे विश्व को…

इंदौर के साहित्यिक संस्मरणों की महक: ‘समय की रेत पर इंदौरी यादें’ – डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त’

इंदौर के साहित्यिक संस्मरणों की महक: ‘समय की रेत पर इंदौरी यादें’ – डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त’ स्वर्गीय दादा पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत जी ने न केवल मेरी पुस्तक…

श्रवणबेलगोला : इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत – डॉ.एस.ए.मंजुनाथ

श्रवणबेलगोला : इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत – डॉ.एस.ए.मंजुनाथ श्रवणबेलगोला भारत के प्रमुख जैन तीर्थों में से एक है। यह कर्नाटक के हासन जिले में स्थित विश्वविख्यात धार्मिक, ऐतिहासिक एवं…

दिन विशेष विमर्श में डॉ. सुनीति रावत की कहानी मरभुक्खे

दिन विशेष विमर्श में डॉ. सुनीति रावत की कहानी मरभुक्खे डॉ. सुनीति रावत की यह कहानी ढाबे वाले सरदार जी और पास के कालेज में पढने वाले लड़कों को लेकर…

राजेन्द्र राजन की पुस्तक ‘ये इश्क़ नहीं आसां’ : अतुल खरे द्वारा समीक्षा

राजेन्द्र राजन की पुस्तक ‘ये इश्क़ नहीं आसां’ : अतुल खरे द्वारा समीक्षा “ये इश्क नहीं आसां” राजेन्द्र राजन जी द्वारा संकलित एवं संपादित तथा समृद्द पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित एक…

क्वेरियम की मछलियां : अलका निगम

क्वेरियम की मछलियां : अलका निगम कभी देखी हैंएक्वेरियम की मछलियां,कुछ कुछ स्त्रियों सी ही तो होती हैं।रंग बिरंगे लिबास में लिपटी,कोई सोने से लदी गोल्ड फिश सरीखी,तो कोई स्टार…

“खोया-खोया चिंतन” : डॉ. सरोजिनी प्रीतम

“खोया-खोया चिंतन” : डॉ. सरोजिनी प्रीतम खोया-खोया चिन्तनसगुणी बोली, ‘‘यों खोये-खोये से क्यों लग रहे हो जी?’’रूपकचन्द तेजी से बोले, ‘‘हां हां मैं तो खोया-खोया ही हूँ। मिलाओ चीनी ……

दिन विशेष पुस्तक समीक्षा विमर्श : डॉ. सुनील देवधर की पुस्तक “कविता के साए में शब्द” पर संध्या टिकेकर की समीक्षात्मक दृष्टि

दिन विशेष पुस्तक समीक्षा विमर्श : डॉ. सुनील देवधर की पुस्तक “कविता के साए में शब्द” पर संध्या टिकेकर की समीक्षात्मक दृष्टि परिचय : डॉ. संध्या टिकेकर बीना, जिला सागर,…

स्मृति के चलचित्र…गंगोत्री से गोमुख ग्लेशियर तक : डॉ. संजय अनंत

स्मृति के चलचित्र…गंगोत्री से गोमुख ग्लेशियर तक : डॉ. संजय अनंत स्मृति के चलचित्र…गंगोत्री से गोमुख ग्लेशियर तक, रोचक यात्रा संस्मरण प्रिय योगेश्वर के साथ मित्रो, ये तस्वीरें सन् 1986…

दिन विशेष विमर्श : सोमा बंद्योपाध्याय द्वारा सुनील गंगोपाध्याय की रचना का अनुवाद

दिन विशेष विमर्श : सोमा बंद्योपाध्याय द्वारा सुनील गंगोपाध्याय की रचना का अनुवाद पौराणिक सन्दर्भ से नोआ की नाव का बिम्ब लेते हुए कवि बारिश की रात और ऐसे ही…

पुस्तक समीक्षा : विस्थापन की त्रासदी – कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की व्यथा-कथा

पुस्तक समीक्षा : विस्थापन की त्रासदी – कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की व्यथा-कथा लेखक परिचय : डॉक्टर शिबन कृष्णा रैना का 22 अप्रैल 1942 को श्रीनगर (कश्मीर) में एक मध्यम…

मेघा राठी के उपन्यास “झोले में ज़िंदगी” की अतुल खरे द्वारा पुस्तक समीक्षा

मेघा राठी की उपन्यास “झोले में ज़िंदगी” की अतुल खरे द्वारा पुस्तक समीक्षा मासूम यादों की सुंदर याद दिलाती, और हमें इस ज़िंदगी की आपाधापी से वापस, कहीं बचपन में…

गुरु पूर्णिमा : मनोज श्रीवास्तव

गुरु पूर्णिमा : मनोज श्रीवास्तव गुरु की पूर्णिमा इसलिए नहीं कि उस दिन चन्द्रमा पूरा होता है; बल्कि इसलिए कि गुरु का कार्य ही मनुष्य के भीतर की अपूर्णता को…

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा तेजेंद्र शर्मा की कहानियाँ हमें जीवन के बहुकोणीय अहसासों की दुनिया में विचरण कराती हैं। मानवीय रिश्तों के विभिन्न…

दिन – विशेष विमर्श में मृदुला भटनागर की कहानी “कहीं कुछ तो होगा”

दिन विशेष विमर्श में मृदुला भटनागर की कहानी कहीं कुछ तो होगा चर्चित कथाकार मृदुला भटनागर की यह कहानी आज के पढ़े-लिखे परिवारों में भी कभी दहेज़ तो कभी पसंद-नापसंद…

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर का संस्मरण “कलाइडोस्कोप : सतरंगी स्मृतियाँ” उनके जीवन के व्यापक अनुभवों, भौतिक-बौद्धिक गतिविधियों, भावनात्मक…

पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत : स्मृति शेष — मनोज कुमार श्रीवास्तव

पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत : स्मृति शेष — मनोज कुमार श्रीवास्तव मनुष्य की मृत्यु का समाचार हमेशा एक ही बात नहीं कहता। कभी वह केवल यह बताता है कि एक शरीर…

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