किरनों के मोरपंख – (कविता)

किरनों के मोरपंख किरनों के मोरपंखधूप लगी नोचने,चिड़ियों कोदर्द दिये-चिड़िये की चोंच ने… कागज़ की रोटियाँपंजों से बेल कर –कैसे फुसलायेगी ?पकड़ेगी हर शिकार –किधर खेल-खेलकर ?माथे पर –बल डाले-शाम…

राजीव श्रीवास्तव की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

राजीव श्रीवास्तव की ग़ज़लें -एक- पानी पानी धूप बिछी है, पाँव न रख, जल जायेंगे।हँस-हँस कर मिलने आये हैं, रो कर बादल जायेंगे। पुरखों की थाती यदि आँगन से विस्थापित…

राजीव श्रीवास्तव

डॉo राजीव श्रीवास्तव जन्म-स्थान : चौक, वाराणसी शिक्षा : एम. फिल., पी-एच.डी. (हिंदी साहित्य) प्रकाशित पुस्तकें : गीत, गज़ल, नवगीत और कविताओं के पांच पुस्तकों के अतिरिक्त कहानी और व्यंग्य…

छोटा सा शीश महल – (कहानी)

छोटा सा शीश महल -अरुणा सब्बरवाल परेशान थी वह। परेशानियों जैसी परेशानी थी। दिल में एक दर्द जमा बैठा था। पिघलता ही नहीं। आकाश से बर्फ गिरती है। दो-तीन दिन…

रोजी – (कहानी)

रोजी -अरुणा सब्बरवाल आज रोजी बड़े अनमने मन से अपना सामान बाँध रही थी, यद्यपि जोयस और जॉन ने रोजी को गोद लेने के पश्चात् उसके लालन-पालन में कोई कमी…

अरुणा सब्बरवाल – (परिचय)

अरुणा सब्बरवाल नाम : अरुणा सब्बरवाल जन्म-स्थान : भारतवर्ष प्रवासित देश : ब्रिटेन शैक्षणिक योग्यता : B.A Hon. and M.A (part one) from Delhi University in India . B.Ed,in Education…

जापान के टोक्यो शहर में नमस्ते इंडिया का दो दिवसीय मेला – (रिपोर्ट)

जापान के टोक्यो शहर में नमस्ते इंडिया का दो दिवसीय मेला जापान में टोक्यो शहर में नमस्ते इंडिया का दो दिवसीय मेला लगा , जहां भारतीय रेस्टोरेन्ट वालों ने अपने…

आन्द्रानिक आस्तरयान : रंग, आकार और भारत – (पेंटिंग)

आन्द्रानिक आस्तरयान : रंग , आकार और भारत आन्द्रानिक आस्तरयान एशिया व ईस्ट यूरोप के देशों में जाने माने चित्रकार हैं। भारत से विशेष प्रेम रखने वाले इस चित्रकार से…

आन्द्रानिक आस्तरयान – (परिचय)

आन्द्रानिक आस्तरयान जन्म : येरेवान (अर्मेनिया) शैक्षिक योग्यता : राष्ट्रीय संगीत स्कूल, राष्ट्रीय सांस्कृतिक कालेज, येरेवान के सिनेमा और थिएटर का स्टेट इंस्टिट्यूट (थिएटर के आभूषणों की कलाओं का संकाय)।…

77वें ‘भारत को जानो कार्यक्रम’ (KNOW INDIA PROGRAMME) का आयोजन – (रिपोर्ट)

77वें ‘भारत को जानो कार्यक्रम’ (KNOW INDIA PROGRAMME) का आयोजन 30 सितंबर, 2024 को, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के डायस्पोरा रिसर्च एंड रिसोर्स सेंटर ने मालवीय स्मृति भवन में 77वें भारत…

रोमानिया में अतुल्य भारत अभियान – (रिपोर्ट)

रोमानिया में अतुल्य भारत अभियान बुखारेस्ट, रोमानिया की राजधानी में लोगों में भारत और भारतीय संस्कृति के प्रति अपार जिज्ञासा भी है और भारत को अपनी आँखों से देखने की…

कविराज शैलेन्द्र की जन्मशती के अवसर पर एक संगोष्ठी का भव्य आयोजन – (रिपोर्ट)

कविराज शैलेन्द्र की जन्मशती के अवसर पर एक संगोष्ठी का भव्य आयोजन दिनांक 30.08.2024 को नई दिल्ली के आईटीओ स्थित त्रिवेणी कला संगम के सभागार में दिल्ली सरकार के कला,…

सरस कवि सम्मेलन का भव्य कार्यक्रम – (रिपोर्ट)

सरस कवि सम्मेलन का भव्य कार्यक्रम साहित्य प्रेमी मंडल, वैश्विक हिन्दी परिवार एवं सोच संस्था के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘सरस कवि सम्मेलन’ में हिन्दी भवन दिल्ली में युवा कवियों…

‘हिन्दी : कल, आज और कल’ हिंदी दिवस पर हिंदी राइटर्स गिल्ड कैनेडा का विशेष आयोजन – (रिपोर्ट)

‘हिन्दी : कल, आज और कल’ हिंदी दिवस पर हिंदी राइटर्स गिल्ड कैनेडा का विशेष आयोजन 21 सितंबर 2024 को ब्रैम्पटन की स्प्रिंगडेल लाइब्रेरी में, हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में…

‘हिन्दी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’ – (रिपोर्ट)

हिन्दी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं के साथ 29 सितम्बर 2024 को ‘हिन्दी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’ विषय पर…

कौन है यह? – (कविता)

कौन है यह? नन्ही सी छोटी सी जानकाम ढंग से करे तो महानना करे तो बने हैवानलचीली, फुर्तीली, सुरीली सुधा की यह तानयोगी का यह मानइंद्र का वर्चस्व येयोगी का…

श्रृंखला – (कविता)

श्रृंखला श्रृंखला किस की गिनूँमैं देश पर आघात कीनारी पर अत्याचार कीफैले हुये व्यभिचार कीश्रृंखला किस की गिनूँ निवस्त्र होती नार कीमनुष्य के विकार कीनिर्धन पर अत्याचार कीश्रृंखला किस की…

अनर्थ – (कविता)

अनर्थ तिनका तिनका मन चुगेमन का मिले ना मीत।मन का मीत जो मिलेसो मन से बाँधे प्रीत।कलियुग ऐसा आ धरासीता संग ना लाये। कहीं ओर जा कर प्रियकुलटा को घर…

हे हरि – (कहानी)

हे हरि हरि अनंत हरि कथा अनंतागुण गाऊँ कैसै भगवंतामैं मूरख, अक्षर ना जानूँदीजौ ज्ञान, प्रेम बस मानूँ।तू मेरे मन का, मनका हैसमता का गुण तुझ से पाऊँजीवन अपना सरल…

हे कृष्णा – (कविता)

हे कृष्णा हे कृष्णा, हे मुरारीमोहे हर लो मन की पीड़मन चंचल कैसै मैं बाँधूकुछ तो भर दो धीरहे कृष्णा मोहे मन की हर लो पीड़। में तो केवल माटी…

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