विशेषण – डॉ. अशोक बत्रा (कविता)
विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…
हिंदी का वैश्विक मंच
विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…
सुप्रसिद्ध कवि-लेखक-समीक्षक नरेश शांडिल्य के 3 गद्य संग्रहों पर चर्चा
“सौ ग्राम जिंदगी”- डॉ. नीना छिब्बर अकल्पनीय है सांसों की पूंजी को कंजूसी से खर्चना तोला माशा का हिसाब रख फूंक -फूंक कर गर्म पलों को ठंडा कर के देना…
“प्रवासी मजदूर”- डॉ. वंदना मुकेश छत होती तो देखती,गली से निकलतेप्रवासी मजदूरों की टोलियाँ।देखती कुछ औरतें,कुछ बच्चे लटकाए,कंधों पर झोले अटकाए। कुछ औरतें,खाली पेटवाली,कुछ पेटवाली, खाली। मुझे छत चाहियेकि देख…
“एक शाम : वियतनाम के नाम” – कवि सम्मेलन दिनांक 19.05.2026 को अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में “एक शाम: वियतनाम के नाम” शीर्षक के अंतर्गत इस…
“परोसा गया शून्य” – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ पेट की अपनी कोई भाषा नहीं होती, बस एक आदिम जिद होती है जो आंतों के गलियारों में डमरू बजाती रहती…
“लोकभाषा मे रचनापाठ” कार्यक्रम सम्पन्न दिनांक 17 ( रविवार ) को विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वाधान में वैश्विक…
“पहाड़ों मे पगडंडी”- जे. पी. पाण्डेय ( पुस्तक समीक्षा ) यात्रा-वृत्तांत साहित्य की वह विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्राओं के अनुभवों, दृश्यों, लोगों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक स्थितियों का सजीव…
“युद्ध और स्त्रियाँ”- डॉ.नीना छिब्बर स्त्रियाॅं चाहे हो ताकतवर या कमजोर देश की युद्ध चाहे शीत हो या विध्वंसक दिन का उजाला हो या घुप अंधेराकभी टैंकों की गड़गड़ाहट गूंजेकभी…
“धीरज आखिर टूट गया”- डॉ. वेद व्यथित और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती…
”बाबुल की देहरी”- डॉ. शिप्रा मिश्रा घर में प्रवेश करते ही नजर आलमारी पर जा रुकी- शर्बत सेट, किताबें, कैसेट्स और न जाने क्या-क्या अबाड़-कबाड़। मन में आया अभी उठाकर…
भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन, संरक्षण और संवर्धन पर चिंतन – मंथन भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन, संरक्षण एवं संवर्द्धन पर गंभीर चिंतन-मंथन, ठोस कार्य-योजना के प्रारूप पर विचार-विमर्श तथा उसके प्रभावी…
“मातृभाषा हमारी आत्मा की आवाज है” – डॉ.अशोक कुमार भार्गव प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा में लिखने पढ़ने सीखने समझने संवाद स्थापित करने का अधिकार है क्योंकि मातृभाषा हमारी आत्मा…
आगे बढ़ो – राष्ट्रकवि कुवेम्पु (के.वी. पुट्टप्पा) आगे बढ़ो, आगे बढ़ो,तोड़कर बाधाएँ कदम आगे बढ़ाओ!न डगमगाओ, न डर से झुको,उज्ज्वल और स्पष्ट, साहस के साथ चलो । “भारत का हित…
“खिड़की पर बैठी कविता” – पुस्तक का लोकार्पण गाजियाबाद। साहित्य एवं समाज को समर्पित संस्था सरन शब्द-गुंजन के तत्वावधान में लेखिका श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल द्वारा रचित काव्य-संग्रह ‘खिड़की पर बैठी…
विशेष व्याख्यान “भारतीय कला धरोहर : बांसुरी” इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, कलादर्शन प्रभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान “भारतीय कला धरोहर : बांसुरी के विशेष संदर्भ में” प्रसिद्ध बांसुरी वादक…
बालस्वरूप राही जी के 90वें जन्मदिवस समारोह कार्यक्रम दिनांक 14 मई 2026 को द्वारका स्थित क्रिएटिव अनलॉक सभागार में हिंदी साहित्य जगत के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं वरिष्ठ कवि बालस्वरूप राही…
प्रतिष्ठित कवयित्री अलकनंदा साने हिन्दी और मराठी की सिद्ध साहित्यकार की अनुवादित कविताएं उन्हें मध्य प्रदेश की पहली हिन्दी पत्रकार होने का गौरव प्राप्त है। जन्मना विरासत में मिली मातृभाषा…
बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद…
अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप…