Author: वैश्विक हिंदी परिवार

आभास – (कविता)

आभास नील गगन में निशितारों ने,घूँघट अपना खोल दिया है।प्यार से तुमने देखा मुझको,ऐसा कुछ आभास मिला है॥ छवि तुम्हारी अंतर मन में,मुझे फुहारें सी देती है।लगता है इस बंजर…

स्वीकार – (कविता)

स्वीकार नैया पर मैं बैठ अकेलीनिकली हूँ लाने उपहारभव-सागर में भँवर बड़े हैंदूभर उठना इनका भारना कोई माँझी ना पतवारखड़ी मैं सागर में मँझधार फिर भी जीवन है स्वीकार।राहों में…

सविता अग्रवाल ‘सवि’ – (परिचय)

सविता अग्रवाल ‘सवि’ जन्म स्थान: मेरठ (उ. प्र.) वर्तमान निवास: मिसिसागा, ओंटारियो शिक्षा: एम.ए. (कला), मेरठ विश्विद्यालय प्रकाशित रचनाएँ: काव्य संग्रह ‘भावनाओं के भंवर से’ प्रकाशित। कैनेडा, भारत और नेदरलैंड्स…

‘स्नानी’ बनाम ‘अस्नानी’ – (व्यंग्य)

‘स्नानी’ बनाम ‘अस्नानी’ – अज्ञात फरवरी के अंत तक देश में दो ही तरह के लोग बचेंगे— एक वे, जिन्होंने कुंभ में स्नान किया … और दूसरा वे, जिन्होंने कुंभ…

‘गिरमिटिया प्रवासी हिंदी साहित्यः दशा और दिशा’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित – (रिपोर्ट)

‘गिरमिटिया प्रवासी हिंदी साहित्यः दशा और दिशा’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आगरा में दिनांक 20- 21 फरवरी को ‘गिरमिटिया…

आराधना झा श्रीवास्तव के काव्य-संग्रह ‘भारत मुझमें बसता है’ का सिंगापुर में लोकार्पण – (कार्यक्रम लिंक)

प्रभात प्रकाशन के बैनर तले ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित आराधना झा श्रीवास्तव की प्रथम एकल काव्य-संग्रह ‘भारत मुझमें बसता है’ का सिंगापुर में लोकार्पण और ‘आराधना की अभिव्यक्ति’ के पहले…

केरल के हिंदी साहित्यकार भोपाल के वन माली कथा समारोह में – (रिपोर्ट)

केरल के हिंदी साहित्यकार भोपाल के वन माली कथा समारोह में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के अन्तरराष्ट्रीय हिंदी केन्द्र के आमंत्रण पर केरल के हिंदी साहित्यकारों का18 सदस्यीय केरल के…

थोड़ा बहुत – (कविता)

थोड़ा बहुत चले साँस जल्दी या चले हौले-हौलेथोड़ा-बहुत मैं जी लेती हूँ।जब तक है साँस तब तक है आस,थोड़ा-बहुत हौसला रखती हूँ। दुनिया के रस गर हो खट्टे या मीठेथोड़ा…

ख़ामोशी – (कविता)

ख़ामोशी छाया चारों तरफ़ है ख़ामोशी का अँधेरालगता है कभी न होगा चहकता सवेरा।पेड़, पत्ते भी ख़ामोशी से ढके हुए है।आकाश में परिन्दे भी ख़ामोश हैं॥ पर्वत से समुन्दर तक…

प्यासी सरिता (अनाथ बेटी) – (कविता)

प्यासी सरिता (अनाथ बेटी) प्यासी सरिता इक बूँद को तरसेमेघ बिना कब सावन बरसे।कैसी विडम्बना है जीवन कीराज़ है गहरा बात ज़रा सी।प्यासी सरिता दुर्गम पथ जोहती रहती हैऔर निरंतर…

छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – (कविता)

छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में द्विवेदी युग के बाद के काल को छायावादी युग…

समय का प्रबल चक्र – (कविता)

समय का प्रबल चक्र यह प्रबल समय का चक्र चलाजो चुप करके सह जाना होगा। नियति के क़दम किस तरफ़ चलेख़ुद न समझे तो समझाना होगासचमुच जीवन है एक पहेलीजिसे…

सरोजिनी जौहर – (परिचय)

सरोजिनी जौहर जन्म: लाहौर, पाकिस्तान (तत्कालीन भारत) शिक्षा: पंजाब वि.वि. से बी.ए. हिन्दी विशेष की उपाधि और बम्बई वि.वि. से संस्कृत में परीक्षाएँ वर्तमान निवास: स्कारबरो, ओंटारियो साहित्य क्षेत्र: १९९५…

एक नयी सिन्ड्रेला – (कहानी)

एक नयी सिन्ड्रेला – डॉ संतोष गोयल सिन्ड्रेला की कहानी उसके प्रिय राजकुमार के आने तथा अपने साथ अपने घर ले जाने के बाद समाप्त हो जाती है, पर मेरी…

संन्तोष गोयल – (परिचय)

डॉ संन्तोष गोयल 2. साहित्यिक लेखन . कहानी संग्रह: नये प्रकाशन विशेष – सन्तोष गोयल का सृजन यात्रा 🙂 एक परख सम्पादक-: डा कमलेश सचदेव (सह सम्पादक “संचेतना ” पत्रिका)…

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर – (दिन विशेष_21.02)

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। विभाजन के बाद पाकिस्तान ने उर्दू को अपनी राजभाषा घोषित किया था। पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) बांग्लाभाषी था। वहाँ छात्रों…

प्रख्यात कवि अनिल शर्मा ‘जोशी’ की ‘नींद कहाँ है’ की समीक्षा – (पुस्तक समीक्षा)

कवि अनिल शर्मा ‘जोशी’ की ‘नींद कहाँ है’ की समीक्षा – मनीष पाण्डेय अनिल शर्मा ‘जोशी’ वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और साहित्य जगत के जाने माने नाम हैं। भारत…

पावन प्रेम तुम्हारा पाकर – (कविता)

पावन प्रेम तुम्हारा पाकर पावन प्रेम तुम्हारा पाकरपूजनीय हो जाऊँगा।शरच्चंद्र के जैसा इक दिनमैं भी पूजा जाऊँगा॥ मेरे कृष्णपक्ष पर कोईध्यान कभी भी नहीं दिया।तुमने मान मयंक मुझे निजआजीवन सकलंक…

जीवन का सारांश निराशा – (कविता)

जीवन का सारांश निराशा जीवन का सारांश निराशा।झूठमूठ है हर इक आशा॥भीतर ही भगवान छुपा हैबाहर तो बस खेल तमाशा॥ सपने में सोना जगना क्या।दूर स्वयं से ही भगना क्या॥नींद…

आप की ख़ासियत – (कविता)

आप की ख़ासियत आप की ख़ासियत आप ही आप हो।ख़ुद ही फ़ीता हो ख़ुद का औ ख़ुद माप हो॥ हो भला कोई कैसे बड़ा आपसेआप तो हो बड़े ख़ुद के…

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