Category: विधा

मदहोश परिंदे! – (कविता)

मदहोश परिंदे! ऐ थम जा मदहोश परिंदे!ये चाँद सी तड़पसूरज सी जलनअरमानों कोराख कर देगाहमारे सपनों कोखाक कर देगाऐ थम जा मदहोश परिंदे!उड़ना मुझको आता नहींजलना हमें गवारा नहींतुम उस…

एक चेहरा – (कविता)

एक चेहरा हजारों चेहरों मेंमैं ढूँढ़ रहा हूँछोटी सा आरजू लेकरवहीं नगर वहीं डगरघूम रहा हूँघूम रहा हूँघूम रहा हूँआँखों में बसी हैतेरे घुँघराले बालऔर चमचमाते झुमकेजो कर देती है…

पिंजरा – (कविता)

पिंजरा एक छोटी सी पोटलीएक मीठा सा सपनालेकर झगरूचला सात समुद्र पारबारह सौ मील दूरजब आँख खुलीतो पाया रमणीक द्वीपसाहब का कटीला चाबुकऔर भूत लैन मेंएक अंधेरा कमरारोया, गाया, भागा,बहुत…

नाम में का रखा है! -(कहानी)

नाम में का रखा है! -खमेन्द्रा कमल कुमार चलो सुनाई तुम लोग के एक कहानी। तो सुनो! सुन्दर दिन रहा, चटक घाम निकला और मंद मंद पुरवैया चलत रहा। जब…

चलो मुलुक – (कहानी)

चलो मुलुक खमेंद्रा कमल कुमार हम भी सोचा कि ई कौन झंझट में फस गवा। दुई चार पेनी पैसा बचा है, जनाइ बुढ़ापा में यहो डूब जई। ई सब मुसीबत…

शाम – (कविता)

शाम अच्छे से वाकिफ़ हूँ इससेजो अंधेरे जैसी छाई है,जमाना कहे जिसे आज़ादीएक लंबी सी तनहाई है ।ए ख़ुद की मर्जी की मालिक,तूने क्या किस्मत पाई है,कहते हैं जिन्होंने हर…

पहाड़ और नदी – (कविता)

पहाड़ और नदी मैं, दुर्गम, कठोर पहाड़वह खिलखिलाती बहती नदी थी,ताज़्जुब नहीं कि चली गईहैरत है कि वह कभी मेरी थी।मेरा ठहराव,शायद कभी समझी नहीं।अच्छा हुआ के मुझ पत्थर संगवह…

दिल्लगी – (कविता)

दिल्लगी आँखों ही आँखों में आपने ना जाने क्या कह दिया।कि हमने अपना दिल आपके नाम कर दिया।।बस यही तो एक भूल की हमने।कि बिना सोचे समझे आपसे प्यार कर…

जिनकी गोद-भराई नहीं होती – (कहानी)

जिनकी गोद-भराई नहीं होती -अनिल प्रभा कुमार चाय का प्याला साथ की तिपाई पर रखते हुए, मां ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। “उठ जा बेटे, आज तो…

अमेरिका के पटल पर हिंदी भाषा और साहित्य – (लेख)

अमेरिका के पटल पर हिंदी भाषा और साहित्य –अनिल प्रभा कुमार यह एक तथ्य है कि वर्तमान समय में विश्व पटल पर भारतीय छाए हुए हैं। स्वाभाविक है कि उनके…

फिर से – (कहानी)

फिर से –अनिल प्रभा कुमार केशी पांच सीढ़ियां नीचे धंसे फ़ैमिली रूम में, आराम-कुर्सी पर अधलेटे से चुपचाप पड़े थे। व्यस्तता का दिखावा करने के लिये सीने पर किताब नन्हे…

सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघु कथाएँ

सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघु कथाएँ 1. आजादी आजादी के अवसर पर पापा के ऑफिस में स्वतंत्रता–पर्व के साथ एक पारिवारिक मिलन का भी आयोजन किया गया था। पत्नी स्कूल–टीचर…

सागर के तट पर – (कविता)

सागर के तट पर सागर की पारदर्शी देह पर थिरकती हैंरहस्य और रोमांच से आह्लादित लहरेंरेतीली जमीन पर लिखती हैंप्रेम की अमिट कहानियां…समर्पित होने से ठीक पहलेआवेग से आती हैंपुरजोर…

सिरहाने में रखी है किताब – (कविता)

सिरहाने में रखी है किताब कई दिनों तक पड़ी रहींमेरी पसंद की किताबेंमेरे सिरहानेपढ़ती रही मैं उन्हेंकिसी-किसी बहाने। कभी नींद लाने की कोशिश मेंतो कभी जाग जाने की खातिरकभी खुदबुदाते…

समर्पित अहसास -(कविता)

समर्पित अहसास हैं बहुत ही खास कुछ अहसास मेरे पासकर रही हूं आज वो तुमको समर्पित। मुट्ठियों में हूं सहेजे बालपन की गिट्टियांभेज न पाई कभी जो प्रेम की कुछ…

शिवोहम् – (कविता)

शिवोहम् आंखों की नमी से गूंदती हैज़िन्दगी का आटाथपकियां दे देकर चकले की धार परगोल-गोल घूमती हैरिश्तों की आंच पर रोटी के साथ-साथसिंकती है खुद भीउनके लिएबड़के और छुटकी के…

जिंदगी की चादर – (कविता)

जिंदगी की चादर जिंदगी को जिया मैंनेइतना चौकस होकरजैसेकि नींद में रहती है सजगचढ़ती उम्र की लड़की कि कहींउसके पैरों से चादर न उघड़ जाए। ***** – अलका सिन्हा

पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली – (कहानी)

पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली – अलका सिन्हा चैटर्जी लेन का यह सबसे पुराना, दो तल्ला मकान होगा जिसे समय के साथ नया नहीं कराया गया। नीचे-ऊपर मिला कर लगभग…

ई-मुलाकात@फेसबुक.कॉम – (डायरी अंश)

ई-मुलाकात@फेसबुक.कॉम – अलका सिन्हा 20 अगस्त, 2013 याद नहीं रखा तो भूल भी नहीं पाई कि आज की ही तारीख को रात नौ बजे का समय मुलाकात के लिए तय…

बेइन्तहा मुहब्बत – (कविता)

बेइन्तहा मुहब्बत सच है, मैंने किया है तुमसे अटूट प्रेमबेइन्तहा मुहब्बतले ली है दुनिया भर से लड़ाईपर जुनून ही न हुआ तो मुहब्बत कैसीसच है, मैंने दीवानावार चाहा है तुम्हें।…

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