Category: कविता

…तो अच्छा होता – (कविता)

…तो अच्छा होता – कृष्णा कुमार हमें अजनबी ही रहने दिये होते, तो अच्छा होता,जानकर,अनजान ना बने होते, तो अच्छा होता। ख़ुशियों की उम्मीद ना होतीगुज़रे पलों की याद ना…

बढ़ते कदम – (कविता)

बढ़ते कदम – कृष्णा कुमार आज झरोंखों के पार देखाआज दिल को समझायाचल उठ, उठकर, कुछ क़दम तो बढ़ाक्या पता उसपार, इसपार से कुछ ज़्यादा हो,नीले आसमाँ के अलावा कुछ…

असहाय लोग – (कविता)

असहाय लोग – कृष्णा कुमार एक पाँच साल की बच्ची,और उसकी तीन साल की बहन,उचक उचक के चलते पाँव,क्या हज़ार किलोमीटर चल पाएँगे?नंगे पॉंव पे छाले कहाँ तक ले जाएगें?एक…

कविता – (कविता)

कविता – कृष्णा कुमार लिखने बैठी हूँ कविता,कविता ये क्या है ?ये हक़ीक़ते बयाँ है क्या ? जिसे कहना बहुत मुश्किल हो,लफ़्ज़ों से खेलना जिसकी फ़ितरत हो,कई प्रकार की कल्पना…

दिल में दीप जलाने वाले – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज दिल में दीप जलाने वाले (सार छन्दाधारित गीत) घर-आँगन में घोर निराशा, चहुँदिश है अँधियारा।दिल में दीप जलाने वाले, नित करते उजियारा॥ दुराचार के कारण…

आपरेशन सिंदूर – (हास्य कविता)

– निशा भार्गव आपरेशन सिंदूर आज से 48 वर्ष पूर्व हमने भी किया थाऑपरेशन सिंदूरजिससे हमारे चेहरे पर छाया था नूरमाँग का सिंदूर रहा था चमकऔर उसी दिन से शुरू…

शस्य श्यामला वितान – (कविता)

– डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज शस्य श्यामला वितान (श्येनिका छंद-२१२ १२१ २१२ १२) शस्य श्यामला वितान है धरा।उर्वरा स्वदेश है हरा भरा॥हैं उपत्यका नवीन वेश में।मेखला विराजमान देश में॥…

जल ही जीवन – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता जल ही जीवन बहता पानी नदिया हैझरता पानी झरनाबरसता है तो बारिशआँखों में डबडबाए तो आँसूफूल पंखुरी पर लरजती ओस की बूँदजमकर हिमशिला, फ्रीजर में रख दो…

पुरुष नहीं रोते – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता पुरुष नहीं रोते तुम रोती हो, हँसती हो, खुलकर अपनी बात कहती होतारसप्तक में, कोई बात पसंद न आने पर, गुस्सा करती हो,खीजती हो, झल्लाती हो, बर्तन…

माँ के हाथ का खाना – (मातृ दिवस विशेष)

– अनिल जोशी *** 1. माँ के हाथ का खाना बहुत स्वादिष्ट खाना बनाती है तुम्हारी मां,कहा एक मित्र ने, पूछ कर आना उनसे,कौन से मसाले डालती हैं वो,हँस पड़ी…

विस्मित है ये प्रश्न अभी तक – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश विस्मित है ये प्रश्न अभी तक (नवगीत – मात्राभार १६, १२) विस्मित है ये प्रश्न अभी तककिसने नींद चुराई? मृग-मरीचिका सी है लिप्सा,इसके…

पतझड़-सा है जीवन मेरा – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश पतझड़-सा है जीवन मेरा (सार छंद आधारित गीत) खुशियाँ सारी झुलस रही हैं,जीवन में निर्झर दो।पतझड़-सा है जीवन मेरा,उसको सावन कर दो॥ दुख…

फागुन आ धमका – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश फागुन आ धमका (दुर्मिल सवैया छंद आधारित गीत) अधरों पर गीत सजे जबहीं,समझो तब फागुन आ धमका।मन के अँगना करताल बजे,तब ताल तरंगित…

जहर बाँट कर क्या तू पाया – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश जहर बाँट कर क्या तू पाया (नवगीत – मात्राभार १६,१२) जहर बाँट कर क्या तू पाया,चिंतन कर तू मन में। छेड़-छाड़ करता कुदरत…

फॉल सीजन / पतझड़ – (कविता)

– मंजु गुप्ता *** *** फॉल सीजन / पतझड़ कभी कभी मुझे लगता हैकि मैं जिंदगी के विराट् बरगद की एक तनहा जड़ हूँ-गहरी, मजबूत, पुष्ट,हरियाई थी बहुतबरसों लहराई लगातारफली-फूली,…

अंतरात्मा – (कविता)

– मंजु गुप्ता **** **** अंतरात्मा रूह को मारने की कोशिश तो बहुत कीमार नहीं पाए, यही मुश्किल हो गयी हैजानते हैं जनाब, बड़ी बेशर्म हैहद दर्जे की दसनंबरीमैंने इसे…

लड़कियाँ – (कविता)

मंजु गुप्ता लड़कियाँ लड़कियाँ तो….समय की आवाज़ हैं, हृदय की धड़कन हैंफूलों की खुशबू और खुशबू का स्पन्दन हैं. पानी में लहर हैं, लहरों का नर्तन हैंसमाज की नब्ज और…

प्रकृति के अंश हैं हम – (कविता)

– मंजु गुप्ता *** *** प्रकृति के अंश हैं हम तितली के पंख झुलसेगौरैया गायब हुईजंगलों की आई शामतज़िंदगी घायल हुई पशु- पक्षी की कौन कहेआदमी की दुर्दशा हुईकुछ भी…

एक दीपक अँधेरे के खिलाफ़ – (कविता)

–मंजु गुप्ता एक दीपक अँधेरे के खिलाफ़ आज की रातएक दीपक जलाओउनके लिएजिनके तन रूखेमन भूखे हैं आज की रातएक दीपक जलाओअँधेरे मन मेंआँज दो ज्योति-रेखनिराश नयनों मेंऔर रख दोएक…

चाँदनी ने छुआ मुझको – (कविता)

– मंजु गुप्ता *** *** चाँदनी ने छुआ मुझको चाँदनी ने झुआ मुझको, मैं चाँदनी हो गयीधूप ने जब छुआ तो मै रागिनी हो गईवायु ने स्पर्श कर जगाई नव…

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