Category: भारतीय रचनाकार

दिव्या माथुर के कहानी-संग्रह ‘हिंदी@स्वर्ग.इन’ की समीक्षा – (समीक्षा)

हिंदी@स्वर्ग.इन कमल किशोर गोयनका दिव्या माथुर इंग्लैंड के प्रसिद्ध हिंदी रचनाकारों में से एक हैं। उनकी रचनात्मकता के कई आयाम हैं —कविता, कहानी, नाटक, अनुवाद, फिल्म, गीत, गज़ल, रेडियो एवं…

महात्मा गांधी और हिंदी – (विचार स्तंभ)

महात्मा गांधी और हिंदी – अतुल कुमार प्रभाकर अंग्रेजों ने भारत में अपनी पैठ बनाने के लिए हिंदुओं की पीठ पर हाथ रखा और कहा कि मुसलमान तो बाहर से…

अतुल कुमार प्रभाकर – (परिचय)

अतुल कुमार प्रभाकर जन्म : 18 अप्रैल 1945, दिल्ली शिक्षा : एम. एस. सी कार्यक्षेत्र : पहले – निजी व्यवसाय सम्प्रति – संस्थापक मंत्री, विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान, नोएडा संयोजक –…

वर्णमाला में वर्ण नहीं हैं – (विचार-स्तम्भ)

वर्णमाला में वर्ण नहीं हैं – डॉ अशोक बत्रा उस दिन की बात है। कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले अध्यापकों का प्रशिक्षण चल रहा था। मैंने पूछ लिया…

मनोहरमयुम यमुनादेवी – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

मनोहरमयुम यमुनादेवी (श्रीमती): भाषा और साहित्य की समर्पित साधिका मनोहरमयुम यमुनादेवी (श्रीमती) एक बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी हैं। वे एक कुशल प्रशासक, भाषाविद, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में जानी…

सुत्री मुदियंसेलागे इन्द्रा कुमारी दसनायक – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

सुत्री मुदियंसेलागे इन्द्रा कुमारी दसनायक : सिंहली और हिंदी भाषा का पुल सुत्री मुदियंसेलागे इन्द्रा कुमारी दसनायक एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण…

शाहीर योगेश – मराठी और हिंदी शाहिरी कला का एक अमूल्य नायक – (आलेख)

शाहीर योगेश – मराठी और हिंदी शाहिरी कला का एक अमूल्य नायक ~ विजय नगरकर देश धरम पर मिटने वाला।शेर शिवा का छावा था।।महापराक्रमी परम प्रतापी।एक ही शंभू राजा था।।…

संवाद – (कविता)

संवाद प्रभु ने कहाकरते हो विश्वासरखते हो श्रद्धा अपारचढ़ाते हो पुष्प नितसम्पत्ति भी हो उदारनियमित संकल्प साधभूल कर सब ऋतु प्रहारबोलो किस आशा सेरहे तुम पथ बुहारबोलो वत्स!निर्मल सेवाओं कापाया…

स्व-पथ चुनना है – (कविता)

स्व-पथ चुनना है जब-जब प्रहार हुएकठोरतर होता रहाऔरअन्दर का पहाड़दरकता रहाभीत सम प्रतिपल। जब-जब फुहार पड़ी नमसंकुचित होता रहाऔरअन्दर का लावापिघलता रहामोम सम प्रतिपल।प्रहार और फुहारदोनों लिए नवजीवन अंशरीते घट…

आत्ममंथन – (कविता)

आत्ममंथन देव पथ पर मनुज बनने को चला पशुडर गया क्यों आज उन अभिवादनों सेजो देते थे सुखद अनुभूति पहलेक्यों असंभव हो रहा स्वीकार करनाआज निज वंदनजो भरते थे हृदय…

चलो… मेरे पुनर्जन्म तक – (कविता)

चलो… मेरे पुनर्जन्म तक तुमने मारा है मेरे अन्तर-पशु कोडुबा कर अनन्त में बहुत गहरेबांध कर द्रवित दृगों मेंलगाकर पलकों के पहरे…तुमने मारा है मेरे अन्तर-पशु को।तुमने किया है, प्रिय!अकस्मात…

मोम के देवता – (कविता)

मोम के देवता पत्थर कठोर होता हैवह देवता होता हैऔरयुगों तक देवत्व को जीता है। संवेदनाहीन!इसीलिए वहस्मित मुख धारण करता हैऔरयुगों तकनिश्कलंकित रहता है।संज्ञा शून्य!इसीलिए वहविष-अमृत ग्रहण करता हैऔरयुगों तकअमरत्व…

विनयशील चतुर्वेदी – (परिचय)

विनयशील चतुर्वेदी जन्म– 04 अक्टूबर 1962, मऊ नाथ भंजन, उत्तर प्रदेश, भारत शिक्षा– स्नातकोत्तर (हिन्दी) व्यवसाय– शिक्षा विभाग (दिल्ली) से सेवानिवृत्त । सम्प्रति– न्यासी – वैश्विक हिंदी परिवार न्यास, दिल्ली,…

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका – विजय प्रभाकर नगरकर आधुनिक तकनीकी विकास के साथ भाषा का विस्तार भी धीरे धीरे बढ़ रहा है। । सूचना प्रौद्योगिकी…

दीर्घ सन्धि की कहानी – (कविता)

दीर्घ सन्धि की कहानी आगे-आगे थी विद्यापीछे-पीछे था आलयदोनों अपनी अपनी साइकिल चला रहे थेपर आलय का अगड़ा आऔर विद्या का पिछला आकोई गुल खिला रहे थेविद्या का आ बोला…

मराठी कवि इंद्रजीत भालेराव की कविता का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

गौरैया पिताजी कहते थेकाटे हुए नाखूनदरवाजे के सामनेकभी मत फेंकना,दाना समझकरचुन लेती है, गौरैयाऔरपेट की अंतड़िया टूटकरतड़पकर मरती है गौरैया, फसल कटाई खत्म होते हीपिताजी मंदिर जाकरबंदनवार में अनाज के…

मराठी कवि अशोक नायगांवकर की कविता का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

(समाज सुधारक और देश में नारी को शिक्षा देने के लिए पहला स्कूल पुणे में खोलने वाले ज्योतिबा फुले पर लिखी गयी मराठी कविता का हिंदी अनुवाद) ज्योतिबा धन्यवाद ज्योतिबाधन्यवाद।आप…

मराठी कवि फ मु शिंदे की कविता का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

माँ माँ एक नाम हैअपने आप भरा पूराघर में जैसे एक गाँव है,सभी में मौजूद रहती हैअब इस दुनिया से दूर हैलेकिन कोई मानता नहीं।मेला खत्म हुआ, दुकानें उठ गईपरदेस…

मराठी कवि शशिकांत शिंदे की मराठी कविता ‘समर्पण’ का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

समर्पण अनुभूतियों के सभी दरवाजेबंद करने के बादधीरे धीरे खुलने लगती है –संदेह की पुरानी खिड़कियां बहस-दर-बहस का मरहम लगाकरमिटते नहीं कलह के घावबल्किऔर अधिक गहरे होते जाते हैं। ऐसे…

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