बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई
बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद…
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बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद…
अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप…
पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई सरदारजी जबान से तंदूर को गर्म करते हैं। जबान से बर्तन में गोश्त चलाते हैं। पास बैठे आदमी से भी इतने जोर से बोलते…
तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ (कविता) हृदय में बहुत कुछ छुपाये हुए हूँ तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ . क्या क्या नही दुःख उठाया है मैंने दुपहरी को सिर पर…
धीरज आखिर टूट गया (कविता) और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती तट बंधों…
पारस पत्थर वाला व्यवहार (बाल-कहानी) रामपुर नाम के एक खुशहाल गाँव में ‘चंदन’ नाम का एक बच्चा रहता था। चंदन पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार था, लेकिन उसमें एक कमी थी,…
इश्क का ऑडिट (व्यंग्य) विक्रम टेंट के कोने में अपने लैपटॉप की रोशनी में किसी मुजरिम की तरह दुबका बैठा था। अनन्या ने हाथ में मशाल जैसी टॉर्च लेकर प्रवेश…
आश्वासन को विश्वास में बदलती फ़िल्म (समीक्षा) फ़िल्मों के बारे में कहा जाता है कि वे वहाँ से शुरू होती हैं, जहाँ आपकी कल्पनाशक्ति ख़त्म हो जाती है। पर इन…
डियर मोमोज (व्यंग्य) मोमोज के उस सफेद, चिपचिपे और रहस्यमयी व्यक्तित्व की शारीरिक संरचना किसी दार्शनिक गुत्थी से कम नहीं है, जिसे देखकर लगता है कि मैदा अपनी मुक्ति के…
पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य) हमारे यहाँ होली कैलेंडर की तारीखों से नहीं, बल्कि मोहल्ले की उस पुरानी दीवार पर पड़ने वाले नीले-लाल धब्बों से शुरू होती…
उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे (समीक्षा) पूरे 39 चालीस पहले बनी फ़िल्म ‘इजाज़त’ फिर एक बार देखी। फ़िल्म के बनने से लेकर अब तक में लगभग 40…
मराठी के शौकिया रंगमंच पर नाटक – ‘शॉर्टकट लॉन्गकट’ की सफल प्रस्तुति मराठी के शौकिया रंगमंच पर एकदम नया-नया नाटक आया है- ‘शॉर्टकट लॉन्गकट’। नयाइन अर्थों में कि उसका पुणे…
हिंदी के दर्शक कहाँ हैं? (समीक्षा) पद्मश्री शेखर सेन का नाम आते ही वह व्यक्तित्व आँखों के सामने आ जाता है जिसने सुर-तुलसी-कबीर-विवेकानंद की एकल प्रस्तुतियाँ दी हैं। एक मुलाकात…
जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? डॉ महादेव एस कोलूर मलप्पुरम (केरल) की जिला अधिकारी सुश्री रानी सोयामोय कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर रही थीं। केरल राज्य…
चैटियो पगोडा (Golden Rock) : प्रकृति, सौंदर्य और विश्वास की सुनहरी चादर – आशीष कंधवे चैटियो पगोडा : पहाड़ों की शांत बाहों में बसे इस पवित्र स्थल पर पहुँचते ही…
जोधपुर और जैसलमेर की सैर अनीता वर्मा मुझे हमेशा से लगता रहा है कि मैं ना जाने कितने जन्मों से यायावर हूँ। चलते रहने की इच्छा, निरन्तरता और मेरे साहस…
श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य दृष्टि: संदर्भ ‘अंगद का पांव’ डॉ ज्ञान प्रकाश विजिटिंग प्रोफेसर, हंगुक यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज, सियोल, दक्षिण कोरिया श्रीलाल शुक्ल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय यथार्थ के सतर्क और…
अबूझ – सरस दरबारी, कनाडा “दीदी आपको शादी में आना ही होगा।” “पर स्वाति मैं किसी को नहीं जानती।” “मुझे तो जानती हैं न। यह भी जानती हैं कि मेरे…
टोकरी – उम्मीदों की डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना, कोलोन, जर्मनी ओह, 7 बज गए, क्रिस्टी ने आँख खोलकर घड़ी पर नजर दौड़ाई, आँखें मिचमिचाते हुए चारों ओर देखा, पर सुबह…
– डॉ महादेव एस कोलूर ***** वृक्ष आदमी ने वृक्ष से कहा —कुछ तो बोलो, यूँ क्यों चुप हो।वृक्ष मुस्कुराया,पत्तों की सरसराहट में बोला —“जिन्होंने सब कुछ खोकर भी दिया,वो…