Category: भारतीय रचनाकार

पुण्य अर्जन  – (यात्रा संस्मरण)

पुण्य अर्जन – डॉ. सच्चिदानंद जोशी तिरुपति किसी ऑफिशियल काम से गए थे। सोचा कि यदि संभव हो तो भगवान वेंकटेश्वर जी के भी दर्शन इसी यात्रा में हो जाएं…

टैक्सी की शाही सवारी का आनंद – (यात्रा संस्मरण)

टैक्सी की शाही सवारी का आनंद – डॉ. सच्चिदानंद जोशी ओसाका यात्रा के दौरान एकाधिक बार टैक्सी में सफर करने का अवसर आया। सामान्य धारणा यही है कि जापान में…

देवमणि पांडेय – (परिचय)

देवमणि पांडेय जन्मतिथि : 4 जून 1958 सुलतानपुर (उ.प्र.) शिक्षा : संस्कृत में प्रथम श्रेणी एम.ए. अवध विश्व विद्यालय (1980), हिन्दी में प्रथम श्रेणी एम.ए. मुम्बई वि वि (1985) लेखन…

सिने जगत के शब्दशिल्पी – (पुस्तक परिचय)

सिने जगत के शब्दशिल्पी – देवमणि पांडेय, मुंबई मेरे मन में हमेशा उन फ़िल्म लेखकों के प्रति आदर का भाव रहा है जिनके हुनर ने मुझे प्रभावित किया। डॉ राही…

राजेंद्र मेहता, नीना मेहता : ग़ज़ल की पहली जोड़ी – (आलेख)

राजेंद्र, नीना मेहता : ग़ज़ल की पहली जोड़ी – देवमणि पांडेय, मुम्बई जब आंचल रात का लहराएऔर सारा आलम सो जाएतुम मुझसे मिलने शमा जलाकरताजमहल में आ जाना मौसम बारिश…

टॉलस्टाय का जहां हृदय परिवर्तन हुआ -(यात्रा संस्मरण)

टॉलस्टाय का जहां हृदय परिवर्तन हुआ – डॉ. सच्चिदानंद जोशी लियो टॉलस्टाय को वैश्विक धरातल पर सार्वकालिक महान साहित्यकारों की सूची में आदर का स्थान है। उनके जीवन और उनके…

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – (व्यंग्य)

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ सुबह का वक्त था, मगर मोहल्ले में अंधेरा छाया हुआ था। अंधेरा बिजली…

सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ – (परिचय)

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार, बाल साहित्य लेखक, और कवि हैं। उन्होंने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज, और विश्वविद्यालय स्तर…

कुबेरनाथ राय – (आलेख)

कुबेरनाथ राय – नर्मदा प्रसाद उपाध्याय 26 मार्च 1933 को उत्तर प्रदेश जिले के मतसा ग्राम में माता श्रीमती लक्ष्मी देवी व पिता श्री वैकुण्ठ राय के यहां जन्मे श्री…

‘गिरमिटिया जीवन’ और मेरी कविताएँ – (आलेख)

‘गिरमिटिया जीवन’ और मेरी कविताएँ – डॉ. दीप्ति अग्रवाल कविता कविता वक्तव्य नहीं गवाह है कभी हमारे सामने कभी हमसे पहले कभी हमारे बाद कोई चाहे तो भी रोक नहीं…

दीप्ति अग्रवाल – (परिचय)

डॉ. दीप्ति अग्रवाल डॉ दीप्ति अग्रवाल का जन्म नारनौल (हरियाणा) में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा हरियाणा और दिल्ली में हुई। उन्होंने इंग्लिश, हिंदी, अनुवाद और समाज कार्य में स्नातकोत्तर की उपाधियां…

तुम्हारी नज़र में – (कविता)

– विनोद पाराशर तुम्हारी नज़र में तुम्हारी नज़र मेंजो मैं हूँवो मैं नहीं हूँ।जो मैं नहीं हूँदरअसल-मैं वही हूँ।मेरा-मुस्कराता चेहरा-शानदार पोशाक-चमचमाते जूतेदेखकर-जो तुम समझ रहो होवो मैं नहीं हूँ।जो मैं…

खूबसूरत कविता! – (कविता)

– विनोद पाराशर खूबसूरत कविता! मैं /जब भीलिखना चाहता हूंकोई खूबसूरत कविता!अभावों की कैचीकतर देती हैमेरे आदर्शों के पंख!कानों में-गूंजती हैं-आतंकित आवाजेंन अजान,न शंख! मैं/जब भीलिखना चाहता हूंकोई खूबसूरत कविताभ्रष्टाचारी…

सुख और दुःख!

– विनोद पाराशर सुख और दुःख! हम-यह जानकरबहुत सुखी हैंकि-दुनिया के ज्यादातर लोगहमसे भी ज्यादा दु:खी हैं!पिता-इसलिए दु:खी है-कि बेटा कहना नहीं मानताबेटे का दु:ख-कैसा बाप है!बेटे के जज्बात ही…

स्त्री की पहचान! – (कविता)

– विनोद पाराशर स्त्री की पहचान! जब वहपैदा हुईतो बनीकिसी की बेटीकिसी की बहनबढ़ती रहीखर-पतवार-सीकरती रहीसब-कुछ सहन।जवान हुईबन गयीकिसी की पत्नीकिसी की भाभीतो किसी की पुत्र-वधु!विष पीकर भी-घोलतीं रहीओरों के…

विनोद पाराशर – (परिचय)

विनोद पाराशर जन्म : 1 जुलाई, 1961 को उत्तरप्रदेश के जिला बागपत के सिंगोली गांव में। सेवा : भारतीय डाक विभाग में, 39 वर्ष से अधिक सेवा करने के उपरांत,…

साहित्यसेतू :  मराठी संतों की हिंदी यात्रा – (पुस्तक का परिचय)

साहित्यसेतू : मराठी संतों की हिंदी यात्रा ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र खंड 1: प्रस्तावना एवं लेखक का परिचय “साहित्यसेतू” ( – पृष्ठ 1) डॉ. श्रीधर रंगनाथ कुलकर्णी ( –…

ज़िन्दगी – (कविता)

– कृष्णा कुमार ज़िन्दगी ज़िन्दगी की अस्थिरता ने,हमें बहुत कुछ सिखाया हैअब तो लगता है जैसे,इसी का नाम है ज़िन्दगी। इस उथल-पुथल में,कुछ बहुत पास आ जाते है,कुछ दिखाई तो…

लो वसंत रितु आई – (कविता)

– कृष्णा कुमार लो वसंत रितु आई लो वसंत रितु आई -२ पेड़ों पे कोंपल मुसकाई -२सूरज की मीठी धूप पाकरकलियों ने ली अँगड़ाई लो वसंत रितु आई-२ इंद्रधनुष सा…

…तो अच्छा होता – (कविता)

…तो अच्छा होता – कृष्णा कुमार हमें अजनबी ही रहने दिये होते, तो अच्छा होता,जानकर,अनजान ना बने होते, तो अच्छा होता। ख़ुशियों की उम्मीद ना होतीगुज़रे पलों की याद ना…

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