Category: भारतीय रचनाकार

बढ़ते कदम – (कविता)

बढ़ते कदम – कृष्णा कुमार आज झरोंखों के पार देखाआज दिल को समझायाचल उठ, उठकर, कुछ क़दम तो बढ़ाक्या पता उसपार, इसपार से कुछ ज़्यादा हो,नीले आसमाँ के अलावा कुछ…

असहाय लोग – (कविता)

असहाय लोग – कृष्णा कुमार एक पाँच साल की बच्ची,और उसकी तीन साल की बहन,उचक उचक के चलते पाँव,क्या हज़ार किलोमीटर चल पाएँगे?नंगे पॉंव पे छाले कहाँ तक ले जाएगें?एक…

कविता – (कविता)

कविता – कृष्णा कुमार लिखने बैठी हूँ कविता,कविता ये क्या है ?ये हक़ीक़ते बयाँ है क्या ? जिसे कहना बहुत मुश्किल हो,लफ़्ज़ों से खेलना जिसकी फ़ितरत हो,कई प्रकार की कल्पना…

कृष्णा कुमार – (परिचय)

कृष्णा कुमार जन्म स्थान – किशनगंज, बिहारपैतृक गाँव- कुंभीपुर, जिला-फ़तेहपुर, उत्तरप्रदेश।पिताजी एक IPS अधिकारी और माताजी एक गृहणी थीं।माध्यमिक शिक्षा- वनस्थली विद्यापीठस्नातक- नालंदा मेडिकल कॉलेज, पटनापति- विनोद कुमार२ पुत्र, १…

दूरदर्शन – (संस्मरण)

दूरदर्शन – अमरनाथ ‘अमर’ तब दूरदर्शन केंद्र मंडी हाउस में न होकर संसद मार्ग स्थित आकाशवाणी भवन में था। आकाशवाणी भवन में आकाशवाणी का महानिदेशालय था (अभी भी है) उसकी…

विनयशील चतुर्वेदी की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल युँ ढल कर शाम का सूरज सुबह ऐसे निकलता है।किसी दुल्हन की घूंघट से वदन जैसे झलकता है मुहल्ला आशिक़ों का है यहाँ आना बहुत धीमेकिसी…

विनयशील चतुर्वेदी की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल आँखों में ज़रूरी है ग़ैरत औ हया होना।।वादों में ज़रूरी है इक अहले वफ़ा होना।। तुम प्यार के खेतों में बारूद उगाते होतुम भूल गए शायद…

अनुभौ उतरयो पार! – (विचार स्तंभ)

अनुभौ उतरयो पार! डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम कबीर का जीवन ही दर्शन पर आधारित था। उन्होंने जो देखा, उसी को कहा। किसी किताब-विताब के चक़्कर में नहीं रहे। कहते हैं,…

कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक़ को मिला बुकर पुरस्कार – (विचार स्तंभ)

Deepa Bhatti – अनीता वर्मा कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक को उनके अंग्रेज़ी में अनूदित कहानी संग्रह ‘हार्ट लैंप’ के लिए प्रदान किया गया है। इन कहानियों का कन्नड़ से अनुवाद…

डिजिटल हिन्दी की यात्रा – (पुस्तक परिचय)

डिजिटल हिन्दी की यात्रा भूमंडलीकरण ने हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ भारतीय भाषाओं को भी काफी प्रभावित किया है। आज के यांत्रिक युग में भाषा का प्रयोग केवल…

विनयशील चतुर्वेदी की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल रहते हैं किस तौर यहाँ पर हाल न पूछोमिलती है किस भाव यहाँ पर दाल न पूछो आत्महत्या पर खेतिहर की भी साहब जीहंसते हैं कि…

‘विज्ञान वैभव’: हिंदी में विज्ञान लेखन की एक अनुपम मिसाल – (पुस्तक परिचय)

विज्ञान वैभव: पुस्तक परिचय विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र विज्ञान हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन अक्सर इसे जटिल शब्दों और कठिन भाषाशैली में प्रस्तुत किया जाता है। इससे आम…

दिल में दीप जलाने वाले – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज दिल में दीप जलाने वाले (सार छन्दाधारित गीत) घर-आँगन में घोर निराशा, चहुँदिश है अँधियारा।दिल में दीप जलाने वाले, नित करते उजियारा॥ दुराचार के कारण…

आपरेशन सिंदूर – (हास्य कविता)

– निशा भार्गव आपरेशन सिंदूर आज से 48 वर्ष पूर्व हमने भी किया थाऑपरेशन सिंदूरजिससे हमारे चेहरे पर छाया था नूरमाँग का सिंदूर रहा था चमकऔर उसी दिन से शुरू…

निशा भार्गव – (परिचय)

निशा भार्गव नाम : निशा भार्गवजन्म स्थान : जयपुर, राजस्थानशिक्षा : एम.ए. (अर्थशास्त्र)राजस्थान विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक प्राप्त किया। राष्ट्रकवि डॉ. रामधारी सिंह दिनकर द्वारा मैडल प्राप्तअपने विद्यालय की सर्वश्रेष्ठ…

अपने आप से एक मुलाकात – (ब्लॉग)

अपने आप से एक मुलाकात – अनिल जोशी मेरा जन्म दिल्ली में हुआ। हमारी परवरिश पुरानी दिल्ली में हुई। पुरानी दिल्ली की तहज़ीब, तौर-तरीके, स्वाद की मिठास हमारे व्यक्तित्व का…

शरद जोशी हास्य का मर्म, व्यंग्य का धर्म और साहित्य की आत्मा थे – (आलेख)

शरद जोशी हास्य का मर्म, व्यंग्य का धर्म और साहित्य की आत्मा थे ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र “लेखक होना केवल शब्दों से खेलना नहीं होता, बल्कि समाज की नब्ज…

गणेश लेखनविद्या और ॐ – (आलेख)

गणेश लेखनविद्या और ॐ ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर महाराष्ट्र मानव सभ्यता के इतिहास में संवाद की कला ने एक विशेष स्थान बनाया है। प्राचीन काल से ही मनुष्य ने परस्पर…

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – (विचार स्तंभ)

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम निसंदेह नन्हे-नन्हे बच्चों से नन्हीं-सी आयु में अपनी भाषा छुड़वाकर किसी विदेशी भाषा में पढ़वाना डायलिसिस जैसा कष्टकारी है। भाषांतरण…

दाढ़ी – (व्यंग्य)

दाढ़ी – रवि ऋषि मेरी जो गिनी चुनी आदतें मेरी पत्नी को पसंद हैं, उनमे मेरी बढ़ी हुई दाढ़ी नहीँ है। और सफेद दाढ़ी तो बिलकुल नहीँ। जबकि हमें दाढ़ी…

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