Category: भारतीय रचनाकार

ललित निबंध – (आलेख)

ललित निबंध कृति “नदी तुम बोलती क्यों हो” की भूमिका का अंश निबंध-लेखन की पुरानी और समृद्ध परम्पराओं में जब ललित निबंध आया तो उस निबंध के बारे में यही…

बापू कुटी सेवाग्राम आश्रम (गांधी आश्रम, वर्धा) में घूमते हुए… – (आलेख)

महात्मा गांधी महात्मा गांधी द्वारा स्थापित आश्रम, बापू की सोच, चिंतन की प्रयोगस्थली है, उनके जीवनदृष्टि की बुनियाद है। इतिहास का एक विद्यार्थी होने के नाते जब गांधी आश्रम (फीनिक्स-1904,…

वैश्विक हिंदी परिवार की उड़ान – (कविता)

डॉ. महादेव एस कोलूर वैश्विक हिंदी परिवार की उड़ान (जून 2020 से जून 2025 के पाँच स्वर्णिम वर्षों पर आधारित) हिंदी के स्वर ने जब सुर छेड़ा,दूर देशों का मन…

महादेव एस कोलूर – (परिचय)

डॉ महादेव एस कोलूर सेवा निवृत्त सहायक निदेशक (राजभाषा) भासंनिलि विजयपुर एवं सदस्य सचिव नराकास बागलकोट, राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय भारत सरकार। स्वरचित कविताएं और साहित्य की ब्यौरा…. 1) पहला…

सुशीला सामद – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

सुशीला सामद: हिंदी की पहली आदिवासी कवयित्री – एक विस्तृत परिचय ~ विजय नगरकर भारतीय साहित्य के विशाल फलक पर कई ऐसे नाम हैं, जो अपनी प्रतिभा और योगदान से…

पं. माधवराव सप्रे – (आज जिनका जन्मदिन है)

पं. माधवराव सप्रे – रजनीकांत शुक्ला पं. माधवराव सप्रे जी का जन्म 19 जून 1871 में मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले के पथरिया ग्राम में हुआ था। वे राष्ट्रभाषा हिन्दी…

भाषा में दबंगई – (आलेख)

भाषा में दबंगई – डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम संविधान बनाए ही इसलिए जाते हैं कि व्यवस्था और शासन नियम से चलें, न कि उठाईगिरी, दबंगई या जबरदस्ती के कब्जे-से। कब्जा…

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – (कहानी)

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – राजेश्वर वशिष्ठ डॉ. विश्वास अपने चेम्बर से निकलने ही वाले थे कि लैंड-लाइन फोन बज उठा। आमतौर पर यह फोन इन दिनों गुमसुम…

राजेश्वर वशिष्ठ – (परिचय)

राजेश्वर वशिष्ठ जन्म: 30 मार्च, 1958, भिवानी (हरियाणा) संप्रति : स्वतंत्र लेखन प्रकाशित पुस्तकें : मुट्ठी भर लड़ाई, उपन्यास 1983, पुनः प्रकाशित 2024, सुनो वाल्मीकि, कविता संग्रह, 2015, गुजराती भाषा…

गोपाल सिंह नेपाली – (आलेख)

गोपाल सिंह नेपाली -अलका सिन्हा हिंदी और नेपाली भाषा के सम्मानित कवि गोपाल सिंह नेपाली अपने गीतों के लिए विशेष लोकप्रिय रहे। उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे और…

समीक्षा के भाषिक आयाम – (पुस्तक समीक्षा)

समीक्षा के भाषिक आयाम – अलका सिन्हा इसमें शक नहीं कि आजकल लेखक होना बहुत अधिक फैशन में है। यानी सभी लेखक बनना चाह रहे हैं। हद तो यह है…

उर्मिला शिरीष के कहानी-संग्रह ‘मैं उन्हें नहीं जानती’ खुद से खुद की पहचान कराती हैं – (पुस्तक समीक्षा)

खुद से खुद की पहचान कराती कहानियां – अलका सिन्हा प्रसिद्ध कथाकार उर्मिला शिरीष के कहानी-संग्रह ‘मैं उन्हें नहीं जानती’ की कहानियों को पढ़ते हुए ब्रॉनी वेयर की लिखी किताब…

बाजार में त्योहार – (कविता)

– शशिकला त्रिपाठी, भारत बाजार में त्योहार अब त्योहार झूमने लगे हैंरसिकों में, जाति विशेष के समूहों मेंक्लबों में, बेड़ों पर, बड़े-बडे होटलों मेंजनता की पहुँच से दूरगाई जाती है…

शशिकला त्रिपाठी – (परिचय)

डॉ. शशिकला त्रिपाठी वरिष्ठ आलोचक, विमर्शकार,कवि-कहानीकार एवं शिक्षाविद। पदनाम: पूर्व आचार्य एवम अध्यक्ष, हिंदी-विभागवी.सी. डब्ल्यू. (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ) जे.कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, भारत, राजघाट फोर्ट, वाराणसी।जन्मस्थान : मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश।उच्च…

आप कौन हैं? – (व्यंग्य कथा)

आप कौन हैं? – डॉ. सच्चिदानंद जोशी दिवाकर जी के आमंत्रण पर लिटरेचर फेस्टिवल के एक सत्र में ‘सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता’ विषय वक्ता के तौर पर जाना था।…

मेरी भोपाल यात्रा – (यात्रा डायरी)

मेरी भोपाल यात्रा – अनिल जोशी भारतीय भाषा मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के सिलसिले में 15 जून को भोपाल, पीपल्स इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज जाना हुआ। बैठक में…

विश्व विरासत सांची का स्तूप – (आलेख)

विश्व विरासत सांची का स्तूप – डॉ. मुन्नालाल गुप्ता मध्य भारत में सांची के स्तूप, मंदिर, विहार और स्तंभ प्राचीनतम और सबसे परिपक्व कलाओं और स्वतंत्र वास्तुकला के उदाहरणों में…

प्रख्यात भाषाविद और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ॰ वी॰ आर॰ जगन्नाथन से संवाद – (वैश्विक हिन्दी परिवार के 15 जून 2025 के कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट)

भाषा विज्ञान और शोध क्षेत्र की चुनौतियों के मद्देनजर वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में 15 जून 2025 को प्रख्यात भाषाविद डॉ॰ जगन्नाथन से सीधे संवाद का…

मेरे दादा – (संस्मरण)

मेरे दादा – नर्मदा प्रसाद उपाध्याय धरोहर रेवा की ओंकार ध्वनि, पलाश की सिंदुरी आभा और काल के मुख से जन्मी वह निमाड़ी रामायण है जिसे हम रामनारायण के नाम…

गायत्रीबाला पंडा के कविता-संग्रह ‘बाघ उपाख्यान’ पर चित्रा मुद्गल की टिप्पणी – (पुस्तक परिचय)

जंगल के बाघ से कविता का बाघकुछ अधिक धीर-स्थिर हैचतुर होने पर भी शिष्ट हैतेज होने पर भी सीधा-सादा है… राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा अनुवादित और राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित,…

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