Category: प्रवासी साहित्य

“विस्थापन: अपना निर्णय या नियति” (संस्मरण) : सुषमा मल्होत्रा

विस्थापन: अपना निर्णय या नियति (संस्मरण) : सुषमा मल्होत्रा इस संस्मरण में सुषमा मल्होत्रा ने कुल्लू में अपने अनुभवों को अत्यंत दिलचस्प भाषा-शैली में वर्णित किया है। पर्वतीय क्षेत्र में…

मॉरीशस में भारतीय संस्कृत और उसे घेरे चुनौतयाँ : अभिमन्यु अनंत

मॉरीशस में भारतीय संस्कृत और उसे घेरे चुनौतयाँ : अभिमन्यु अनंत जिन दिनों भारतीय संस्कृति अपनी पराकाष्ठा पर थी, उन दिनों विश्व के कई देशों को ‘रामायण का देश’ कहकर…

फिल्मों के विस्मृत इतिहास पुरुष निरंजन पाल : ललित मोहन जोशी

फिल्मों के विस्मृत इतिहास पुरुष निरंजन पाल : ललित मोहन जोशी ललित मोहन जोशी लंदन में सक्रिय रेडियो प्रसारक, लेखक, कवि, फिल्म इतिहासकार एवं फिल्मकार हैं। उन्होंने 1988 से 2008…

दिन विशेष (कथेतर) में प्रगति टिप्पणीस की रचना हमारी गुल्लकें : प्रेमचंद के परिप्रेक्ष्य में एक दृष्टिकोण

दिन विशेष (कथेतर) में प्रगति टिप्पणीस की रचना हमारी गुल्लकें : प्रेमचंद के परिप्रेक्ष्य में एक दृष्टिकोण प्रेमचंद की कालजयी कहानियों—“पंच परमेश्वर” और “ईदग़ाह” में उद्धृत आदर्श और अनुकरणीय जीवन…

आशीर्वादी जुमलों का एक सीमित संसार (व्यंग्य) : समीर लाल ‘समीर’

आशीर्वादी जुमलों का एक सीमित संसार (व्यंग्य) : समीर लाल ‘समीर’ समीर लाल रतलाम में जन्मे और व्यवसाय से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। प्रारंभिक शिक्षा जबलपुर में हुई। विगत 25 वर्षों…

अँखियाँ लड़ीं ख़ुद से (व्यंग्य) : डॉ. शैलजा सक्सेना

अँखियाँ लड़ीं ख़ुद से (व्यंग्य) : डॉ. शैलजा सक्सेना डॉ. शैलजा सक्सेना जी का व्यंग्य ‘अँखियाँ लड़ीं ख़ुद से’ आधुनिक समाज में तेज़ी से बढ़ती आत्ममुग्धता (Narcissism), अहंकार और ‘मैं…

दिन विशेष (व्यंग्य) में “हिन्दी हमारी पहचान है – इसे सदा बनाये रखना” : विजय विक्रान्त

दिन विशेष (व्यंग्य) में “हिन्दी हमारी पहचान है – इसे सदा बनाये रखना” : विजय विक्रान्त विजय विक्रांत का यह आलेख एक संस्मरणात्मक आलेख जैसा है। विभिन्न देशों में प्राप्त…

विशेष विमर्श में डॉ. पद्मेश गुप्त का लेख – हिंदी अख़बारों में अंग्रेज़ी शब्दों के अनावश्यक प्रयोग : आवश्यकता, प्रवृत्ति और संतुलन

विशेष विमर्श में डॉ. पद्मेश गुप्त का लेख – हिंदी अख़बारों में अंग्रेज़ी शब्दों के अनावश्यक प्रयोग : आवश्यकता, प्रवृत्ति और संतुलन हिंदी के भविष्य को स्थायी आधार प्रदान करने…

दिव्या माथुर की कहानी : “सफ़रनामा”

दिव्या माथुर की कहानी : “सफ़रनामा” दिव्या माथुर की ताज़ातरीन कहानी “सफरनामा” विशेषतया दो पात्रों नामत: अनूप वर्मा और विजया के बीच जीवन के विभिन्न आयामों को दर्शाती है, जो…

विशेष विमर्श में शशि पाधा की रचना “हवा में तैरते सुर”

विशेष विमर्श में शशि पाधा की रचना “हवा में तैरते सुर” इस ललित निबंध में, लेखिका ने अपनी स्मृतियों को संजोने का श्लाघ्य प्रयास किया है। लेखिका एक सैनिक की…

हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता की भावना : डॉ. अरुणा अजितसरिया

हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता की भावना : डॉ. अरुणा अजितसरिया परिचय : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए., ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास’ पर पीएच.डी. तथा फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा प्राप्त कर…

विशेष विमर्श में प्रगति टिपणीस के यात्रा-वृत्तांत ‘बनारस की कुछ बात है ऐसी’

विशेष विमर्श में प्रगति टिपणीस के यात्रा-वृत्तांत ‘बनारस की कुछ बात है ऐसी’ लखनऊ से ताल्लुक़ रखने वाली प्रगति टिपणीस कम से कम तीस वर्षों से मॉस्को में निवास कर…

दिन विशेष विमर्श : आस्था देव की प्रेरक रचना “कल करे सो आज कर”

दिन विशेष विमर्श : आस्था देव की प्रेरक रचना “कल करे सो आज कर” यह रचना एक ऐसी स्त्री की मनःस्थिति का जीवंत दस्तावेज है जो घर, बच्चे, नौकरी, स्टेटस…

दिन विशेष विमर्श में शैलजा सक्सेना की कविताएँ

दिन विशेष विमर्श में शैलजा सक्सेना की कविताएँ संवेदनशीलता कनाडा की शैलजा सक्सेना जी कविताओं की विशेषता हैं। उनकी कविताएँ उन विषयों पर हैं, जो खुद अपने बारे में नहीं…

दिन विशेष विमर्श में दीपा ‘दिनेशनील’: स्त्री-पुरुष के कर्तव्यों में समानता — क्या यह अब भी स्वप्नमात्र है?

दिन विशेष विमर्श में दीपा ‘दिनेशनील’: स्त्री-पुरुष के कर्तव्यों में समानता — क्या यह अब भी स्वप्नमात्र है? दीपा ‘दिनेशनील’: रचनाकार, संपादक, अध्येता। पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (स्वर्ण पदक से सम्मानित)!…

दिन विशेष में पिता पुत्री का अमर प्रेम – विक्टर ह्यूगो की दो कविताओं का मनीष पाण्डेय द्वारा काव्यानुवाद

आज पढ़िए- महान फ्रांसीसी साहित्यकार विक्टर ह्यूगो की दो प्रसिद्ध कविताओं का सुन्दर काव्यानुवाद, जिसे किया है एम्स्टर्डम, नीदरलैंड में और अमेजोन में तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत भारतीय मूल के…

दिन विशेष विमर्श में शालिनी वर्मा की कविताएँ

दिन विशेष विमर्श में शालिनी वर्मा की कविताएँ पिछले 25 वर्षों से दोहा, कतर में हिंदी लेखन, भाषा एवं साहित्य में सेवारत शालिनी वर्मा के लेखन में भारतीय संस्कृति और…

दिन विशेष विमर्श में डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे की कविता का पाठ

दिन विशेष विमर्श में डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे की कविता का पाठ डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे भारत की बेटी, सूरीनाम की बहू एवं नीदरलैंड की स्थायी निवासी हैं…

कविता-विमर्श में ऋचा जैन की कविताएँ ‘फ़ोन पर माँ’ और ‘मैं राधा ही तो हूँ’

कविता-विमर्श में ऋचा जैन की कविताएँ ‘फ़ोन पर माँ’ और ‘मैं राधा ही तो हूँ’ लंदन की ऋचा जैन की कविताओं को पढ़ते हुए आप अनुभूत कर सकते हैं कि…

डॉ. पद्मेश गुप्त के आलेख ‘ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक’ पर विशेष विमर्श

ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक! : डॉ. पद्मेश गुप्त डॉ. पद्मेश गुप्त ब्रिटेन में बसे प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद्, उद्यमी और समाजसेवी हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषा, शिक्षा और…

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