Category: लघु कथा

दिन विशेष लघुकथा में बलराम अग्रवाल की लघुकथाएँ

दिन विशेष लघुकथा में बलराम अग्रवाल की लघुकथाएँ १. “एक असन्तुष्ट से बातचीत” जैसे ही कार उसके नजदीक से गुजरती, भौंकते हुए वह आदतन-सा उसके साथ दौड़ पड़ता। आखिरकार, एक…

दिन विशेष लघुकथा : “अपनी ज़मीन से कटन” और “प्रतीक्षा” – रमेश यादव

दिन विशेष लघुकथा : “अपनी ज़मीन से कटन” और “प्रतीक्षा” – रमेश यादव अपनी ज़मीन से कटना तेज आँधी में सूखे पत्तों के साथ कुछ कमजोर हरे पत्ते भी गिर…

दिन विशेष (लघुकथा) में डॉ.महेन्द्र अग्रवाल की लघुकथाएँ

दिन विशेष (लघुकथा) में डॉ.महेन्द्र अग्रवाल की लघुकथाएँ स. नई ग़ज़ल सदर बाजार शिवपुरी म.प्र. 473551ई-मेल mkagrwal@yahoo.com १. राखी की सेल्फी बहिन के साथ ! रक्षाबंधन का त्यौहार आते ही…

दिन विशेष में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघुकथाएँ

दिन विशेष में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघुकथाएँ “थ्रिल मेरी जान” “मैं ठीक तीन बजे आ जाऊँगी तेरे हॉस्टल के गेट पर। तैयार मिलियो।” अंतिम पीरियड समाप्त होते ही नमिता…

दिन विशेष (युवा लेखन) में यासिन रशीद पठान की लघुकहानी “वो दो जोड़ी आँखें”

दिन विशेष (युवा लेखन) में यासिन रशीद पठान की लघुकहानी “वो दो जोड़ी आँखें” (यासिन रशीद पठान, महाराष्ट्र) सावन अपने पूरे शबाब में था। आसमान घने बादलों से ढका था…

आधुनिक गिरमिटिया – (लघुकथा)

आधुनिक गिरमिटिया डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे, नीदरलैंड कल कारला को एक सामाजिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला। क्योंकि कार्यक्रम भारतीय था इसलिए कारला ने भारतीय परिधान पहना…

फ़्लू – (लघु कथा – अनुवाद)

फ़्लू डॉ. शैलजा सक्सेना आज विभाग के मुख्यसचिव दौरा करने आ रहे थे। पिछले बार जब मुख्यसचिव आए थे तब नीता असिस्टेंट सैक्शन ऑफिसर बनी ही थी। उस को यह…

प्रेम और समय – (लघु कथा)

प्रेम और समय डॉ महादेव एस कोलूर एक बार की बात है, एक द्वीप था जहाँ सभी भावनाएँ रहती थीं – खुशी, दुख, ज्ञान, ईर्ष्या और बाकी सभी, जिसमें प्रेम…

आधुनिकता बनाम परंपरा  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा पहचान रेलवे स्टेशन के कोने में बैठी थी वह—रंग-बिरंगे कपड़ों में, आँखों में काजल, पर चेहरा बुझा हुआ। लोग आते-जाते रहे। कोई उसे टालकर निकला, कोई…

आधुनिकता बनाम परंपरा  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा आधुनिकता बनाम परंपरा सिया ने अपनी डाइट का चार्ट बड़े ही मनोयोग से तैयार किया। गूगल खंगाला, विदेशी न्यूट्रिशनिस्ट के वीडियो देखे और आखिरकार एक नामी…

जन्मोत्सव  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा जन्मोत्सव रीमा के हाथ काँप उठे जब उसने बेटी दीपिका की वीडियो कॉल उठाई। अस्पताल के सफेद कमरे में, थकी-सी दीपिका की गोद में नन्हा बच्चा…

मंच से घर तक  – (लघुकथा)

मंच से घर तक – डॉ सुनीता शर्मा नेता जी आज मंच पर पूरे जोश में थे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का शुभ अवसर था, और वे गरज-गरजकर नारी शक्ति की…

पतंग – (लघुकथा) 

पतंग – डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘उदार’ “यह हरी पतंग किसकी इतनी ऊँची जा रही है?..ज़रा बताना तो?” नीहार ने अपनी सफ़ेद पतंग ऊपर लहराते हुए पूछ लिया, अपने साथी से,…

नई नवेली विधवा – (लघु कथा)

नई नवेली विधवा – दिव्या माथुर हैनरी विलियम्स का शव काली रौल्स-रॉयस में रखा था; ताबूत पर चम्पा के फूलों से लिखा था ‘माई-डार्लिंग-हब्बी’ और लिलीज़ से गुंधी हुई अन्य…

स्वामी जी – (लघु कथा)

दिव्या माथुर जैट-एयरवेज़ के हवाई जहाज़ में बैठी थी। उड़ान लन्दन से मुम्बई के लिए रवाना हुई ही थी कि मैंने अपने पीछे से एक विदेशिनी की भारी आवाज़ सुनी।…

मनहूस – (लघु कथा)

मनहूस – दिव्या माथुर पार्क-रौयल अंडरग़्राउंड-स्टेशन के बाहर मुस्कुराता हुआ वह युवक हर रोज़ की तरह आज भी वहाँ खड़ा था। हर सुबह की तरह आज भी उसने अपने हैट…

जंक – (लघु कथा)

जंक – दिव्या माथुर कार-बूट-सेल्स में घूम-घूम कर छोटी बड़ी चीज़ें इकट्ठी करने का एक ही तो शौक़ था इन्दिरा का – तस्वीरें, मूर्तियाँ, सिक्के, स्टैम्प्स,, केतलियाँ, मुखौटे, महंगी धातुओं…

3050 – (लघु कथा)

3050 – दिव्या माथुर शाम के धुन्धलके में कुछ अधमरे से लोग एक धूसर और ठिगनी मुंडेर के इस ओर खड़े थे। मुंडेर के दूसरी ओर कुछ शिशुओं की लाशें…

अंजू मेहता की लघु कथाएं – (लघु कथा)

चार लघु कथाएं –अंजू मेहता 1. सामान दौड़ते-दौड़ते जल्दी से स्कूल की बस पकड़ी चलती बस में चढ़कर बैठना सचमुच किसी रोमांच से कम नहीं होता है ऐसे में हृदय…

चैतन्य मन – (लघु कथा)

चैतन्य मन – पूजा अनिल सामने वाली शुक्ला आंटी की बेटी को किसी अनजान लड़के के साथ देख कर मन किया कि उन्हें उनकी बेटी के इस छुपे हुए रिश्ते…

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