इतने – (कविता)
इतने इतने- इतने सारे लोगइतना- इतना कुछ कर सकते हैंपरंतुइतना- इतना भी नहीं करतेकी सुन सकें इतनी- इतनी सी बाततभी तोइतने- इतने हो सकते हैंपर इतने- इतने से होकर रह…
हिंदी का वैश्विक मंच
यूरोप
इतने इतने- इतने सारे लोगइतना- इतना कुछ कर सकते हैंपरंतुइतना- इतना भी नहीं करतेकी सुन सकें इतनी- इतनी सी बाततभी तोइतने- इतने हो सकते हैंपर इतने- इतने से होकर रह…
स्वप्न स्वप्न आते हैंकबूतरों की तरहमन की मुंडेर पर बैठ जाते हैंफड्फड़ाते हैंकलम जाल कैद कर पाये जब तकउड़ जाते हैंफिर आते हैं कभीकभी नहीं भी आते हैंऔर जितने आते…
भारत मैं भारत हूँ जो आज सुनोवही भारत था बरसों पहलेबरसों से भी बरसों पहलेसदियों से भी सदियों पहले लेते हो तुम क्या टोह मेरीबस चंद बरसों की उम्र बताकभी…
भारत का काला धन परदेस में जमा हैभारत का धनभारत का काला धनसोना- चाँदी- रुपया- आना- पैसा- पाईऔर मेरे जैसे कुछ एन आर आईयही है भारत का धन – भारत…
कोई लहर समुन्द्र की कौन सी लहरहमें ले जायेगी किनारेकौन सा किनाराहमें थाम लेगामट्टी का कौन सा हिस्सा हमेंजकड लेगाहम नहीं जानतेन ही जानना चाहते हैंक्योंकि जान नहीं पायेंगेबस यही…
निखिल कौशिक की कविताएँ 1- सुख है जीवनदुख है जीवनतू हैं जीवनमैं हूँ जीवनकहाँ है जीवनयहाँ है जीवनवहाँ है जीवनरहने दे इसकोयहीं है जीवन 2- मेरी आवाजमेरी जेब से आती…
ऐसी बानी बोलिए _कबीरा आपा खोए LOL -डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना, कोलोन , जर्मनी ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए।औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय। 15 वीं शताब्दी…
पिता… – यूरी बोत्वींकिन खुले मैदान में सोवियत आर्मी के सैन्य अभ्यास चल रहे थे। नवशिक्षित जवान टैंक चलाने की परीक्षा दे रहे थे। हर परीक्षार्थी के साथ एक अनुभवी…
बुल्गारिया का पर्व मार्तेनित्सा लोहित नभ, श्वेत धरा – मार्तेनित्सा का आशीर्वाद मार्तेनित्सा – यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, शांति, और सौभाग्य का प्रतीक है। यह पर्व बुल्गारिया…
बासंती हवा पोर पोर में फूल खिले हैंरोम रोम खुशबू से भरानाच रहा है मन मेरा याझूम रहे आकाश धरा दिखे अधिक पीली मुझकोया किसी ने रंग डाली सरसोंमहक रही…
डायरी के पन्ने से……द रिफ्यूज़ कलेक्टर – उषा राजे सक्सेना मेरी अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्य जो इस ब्रिटिश समाज के दबदबे में खो गए थे। आज इस इनसेट (इन-सर्विस…
मेरा अपराध – उषा राजे सक्सेना उन दिनों मेरे पिता पोर्टस्मथ में एक जहाजी बेड़े पर काम करते थे। उनकी अनुपस्थिति और अकेलेपन को न झेल पाने के कारण मेरी…
दर्द का रिश्ता… – उषा राजे सक्सेना मिहिर-मंजरी का गठबंधन न तो कोई इत्तफाक था और ना ही किसी दबाव का परिणाम। उनका विवाह माँ दयामयी, मिहिर के माता-पिता और…
उषा राजे सक्सेना जन्म : 22 नवंबर, 1943. स्थान : गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत। शिक्षा : स्नाकोत्तर अंग्रेजी साहित्य, गोरखपुर विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश, ई.एस.एल, लंदन, यू.के.। ब्रिटेन में आगमन :…
विच शैल अग्रवाल उसका यूं इस तरह से प्रकट हो जाना पूरी तरह से आलोड़ित कर चुका था उसे। ‘तू यहां पर कैसे?… मार्स और वीनस से कब लौटी?’ जैसे…
अड़तालीस घंटे – शैल अग्रवाल अँधेरा अब भी चारों तरफ पसरा पड़ा था और इक्की-दुक्की कारों के अलावा ट्रैफिक शांत ही था, वरना लंदन कब सोता है! घड़ी देखी तो…
शैल अग्रवाल 21 जनवरी, 1947 वाराणसी, भारत में जन्म व संपूर्ण शिक्षा। 1968 से सपरिवार ब्रिटेन में। 50 से अधिक देशों का भ्रमण । अंग्रेजी, संस्कृत व चित्रकला में स्नातक…
कोख का किराया तेजेंद्र शर्मा एम.बी.ई. आज मनप्रीत, हारी हुई सी, घर के एक अंधेरे कोने में अकेली बैठी है। वह तो आसानी से हार मानने वालों में से नहीं…
पासपोर्ट का रंग तेजेंद्र शर्मा एम.बी.ई. “मैं भगवान को हाजिर नाजिर जान कर कसम खाता हूं कि ब्रिटेन की महारानी के प्रति निष्ठा रखूंगा।” अंग्रेजी में बोले गए ये शब्द…
कब्र का मुनाफा तेजेंद्र शर्मा एम.बी.ई. “यार कुछ न कुछ तो नया करना ही पड़ेगा। सारी जिन्दगी नौकरी में गंवा चुके हैं। अब और नहीं की जाएगी ये चाकरी”, खलील…