Category: विधा

ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे – (आलेख)

ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे – मीनाक्षी जोशी फिल्मी दुनिया की चकाचौंध, ग्लेमर, धन और यश की क्षणभंगुरता से कौन परिचित नहीं है? न जाने कितने सितारे रोज नए…

जीवन यात्रा – (कविता)

जीवन यात्रा ये जीवन के लम्बे-चौड़े टेढ़े-मेढ़े रास्तेकुछ तेरे हिस्से के हैं तो कुछ हैं मेरे वास्तेक़दम न चाहें फिर भी हमें चलते ही जाना हैमिल जायेगी मंज़िल यूं ही…

ये कमाल हमें करना है… – (कविता)

ये कमाल हमें करना है… समय कठिन है फिर भी हमेंहंसते-गाते रहना है,हो धारा चाहे जितनी उल्टीदरिया-सागर तरना है,लिये हाथ में प्रेम पताकाआसमान तक चलना हैये कमाल हमें करना है,नहीं…

वसीयतनामा – (कविता)

वसीयतनामा क्यों न हमखुले आकाश तलेबहती हवा, बहता पानीपरिंदों के गीत, जीवन के संगीत,इन सबकी मौजूदगी मे आजएक दूजे के दिल परअपना-अपना वसीयतनामा लिख दें,जीवन तो एक दूजे के साथ…

मुझको चाहिये – (कविता)

मुझको चाहिये चाहिये मुझको अदब की इक सौग़ात चाहियेकलम को रवानी मेरे दिल को जज़बात चाहिये आस्मां से उतर समा जाये रग रग मे जोशब्दों की ऐसी पूरी एक क़ायनात…

दादा… – (संस्मरण)

दादा… – यूरी बोत्वींकिन दादा रूसी थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जर्मनों ने उनका गांव जलाकर लोगों को पश्चिम की ओर भगाया था तो उनका परिवार यूक्रेन पहुंचकर एक गांव…

दर्पणों की गली – (कहानी)

दर्पणों की गली – वरुण कुमार “यह रात जैसे दर्पणों की गली हो और तुम एक अकेली चांदनी बनकर निकली हो…” छत की रेलिंग पर भिंचे अपने हाथ की उंगलियों…

जिन्दगी बड़ा सच – (कहानी)

जिन्दगी बड़ा सच – वरुण कुमार अस्पताल का गमगीन माहौल। सभी के चेहरे बुझे हुए। मृत्यु की घटना के ऩजदीक में होने का अनुभव भी कितना अवसन्नकारी होता है। डेड…

होने ना होने के बीच – (कविता – अनुवाद – पंजाबी)

मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह होने ना होने के बीच ज़िन्दा होना ही तो काफ़ी नहींअपने तमाम वजूद को करना पड़ता है साबितकहना पड़ता है…

यक्षिणी का मेघदूत – (मराठी से अनुवादित कहानी)

यक्षिणी का मेघदूत मूल कहानी की भाषा – मराठीलेखिका – डॉ. निर्मोही फडके.अनुवाद- डॉ. वसुधा सहस्रबुध्दे अपने घर के अटारी की सफाई करते समय उसे एक फटी पुरानी बैग मिल…

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से – (कविता)

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से सोचता हूँजब कभी जाऊँगा पृथ्वी सेक्या ले जाऊँगा अपने साथ सफलताएं छूट जाएंगी यहींदेह के मैल की तरह यदि उन्हें मान लें इत्रतो भी वे…

धीरे-धीरे रीतती है करूणा – (कविता)

धीरे-धीरे रीतती है करूणा धीरे -धीरे रीतती है करूणाधीरे-धीरे संवेदनाएं बदलने लगती हैं प्रस्तर मेंधीरे-धीरे सूख जाती है भावुकता की नदीधीरे-धीरे मनुष्य परिवर्तित हो जाता है किसी यंत्र में धीरे-धीरे…

नियम की तरह – (कविता)

नियम की तरह वे लोग जिनसे मिले बिना शाम ढलती ही नहीं थीउदास बैठ जाती थी गुलमोहर की किसी नर्म शाख परलगता था जैसे ये न होंगे तो कैसे कटेगा…

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा – (कविता)

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा मेरा बनारस वह नहीं है जो बहुत सी कविताओं में हैवह भी नहीं जिसका ज़िक्र किया करते थे मित्र बातचीत मेंकभी हँसते हुए…

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते – (कविता)

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते जब भी पहनता हूँ जूतामुझे मृणाल कांति घोष के वे जूते याद आते हैंजिन्हें सन् 1997 के अक्टूबर में पहनकर गया था मैंनौकरी का…

तुम सुखी रहना – (कविता)

तुम सुखी रहना आज फिर तुम्हारी याद आई! चली पुरवाई उभरा घावपर सोचता हूँक्या तुममें बचा होगा कोई भावअब भी होगा मिलने का चावया भूल चुकी होगी तुम अतीत का…

अछूते राग – (कविता)

अछूते राग सर्दियाँ आ गईंतुम कहाँ हो? लोग घूम रहे हैं रंगरेज बनेखुद भी रंगे दूजे को रंगेसड़कें अटी पड़ी हैं लोगों सेचेहरे पर चेहरे चिपके हैं कभी लगे है…

आज मिलेंगे – (कविता)

आज मिलेंगे तुम मिलोगे तो कहाँ से शुरू होगी हमारी बातचीत?सूरजकुण्ड सिटी हॉल्ट की हलचल भरी शामों सेया किसी उदास दोपहरी सेजब 32/3 बहस कार्यालय में हम बिना दूध की…

प्राथमिकता का व्याकरण – (कविता)

प्राथमिकता का व्याकरण बहुत जटिल होता है प्राथमिकता का व्याकरणवैसे यह निर्भर करता है व्यक्ति-व्यक्ति पर कुछ लोग अपना अर्जित सब कुछ गँवा देते हैंपर नहीं बदलते प्राथमिकताकुछ बदल लेते…

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की – (कविता)

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की नए सुख में होती है मादकताअफीम से ज़्यादा नया सुख आता हैऔर मनुष्य बहुत कुछ भूल जाता हैकई बार तो…

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