योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना
योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि इसकी सार्थकता शारीरिक, मानसिक, आत्मिक संतुलन और चैतन्य की प्राप्ति…
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योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि इसकी सार्थकता शारीरिक, मानसिक, आत्मिक संतुलन और चैतन्य की प्राप्ति…
अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है जुड़ना…
மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ் யோக வகுப்பில் எங்களிக்கப்பட்டதுமூச்சுப் பயிற்சிஅதாவது மூச்சை உள்ளிழுத்து வெளியே மெதுவாக விட வேண்டிய பயிற்சி. அப்போது நான் மூச்சின் வகைகளை உணர்ந்து சிந்தனையில் ஆழ்ந்தேன். அன்றாடம் நாம் ஓயாடிமூச்சிறைக்க வேலை…
योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज योग की कक्षा में मुझेदिया गया योगाभ्यास। श्वास लेने और छोड़ने कीविधि मुझे बताई गई। तब मैं श्वास के अनेक प्रकारों सेअवगत…
“समत्वं योग उच्यते : योग का शाश्वत संदेश” समत्वं योग उच्यते: भारत की प्राचीन ऋषि-परंपरा ने विश्व को जो अमूल्य ज्ञान-संपदा प्रदान की है, उसमें योग का स्थान अत्यंत विशिष्ट…
विष्णु प्रभाकर जी के जन्म दिवस विशेष : डॉक्टर सविता चड्ढा एक बहुत ही महत्वपूर्ण शख्सियत, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, मेरे परम आदरणीय और बहुत ही प्रिय यायावर साहित्यकार विष्णु प्रभाकर जी…
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : देश-विदेश के साधकों ने मनाया योग महोत्सव रियाद में उत्साहपूर्वक मनाया गया 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस रियाद में आज 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े…
सिखों के पाँचवें गुरु – श्री गुरू अर्जुन देव जी का जीवन और उपदेश : डॉ. चरनजीत सिंह श्री गुरू नानक देव जी की पाँचवीं जोत साहिब श्री गुरू अर्जुन…
“प्रख्यात कवि बालस्वरूप राही के 90वें जन्मवर्ष पर एकल काव्य पाठ एवं अभिनंदन समारोह”
(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण‘ मेरे आंगन झूमती, हरियाली की डोर।करती चिड़ियों की चहक, सुखद सुहानी भोर।। बना हुआ है घोंसला, चीं चीं का है शोर।काश…
“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : कविता काट रहे हो जब पेड़ों को,मेघ कहाँ से बरसेंगे। मानव लगा हुआ है देखो,अंधाधुंध कटाई में।बिन बारिश सब हरियाली अरु,पैदावार खटाई में।।जल बिन अवनी…
प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…
“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…
धरती का दर्द – अनीता वर्मा आवारा बादल खुशी से गुनगुनाता हुआ नीचे जा रही नदी को देख कर दीवाना हो रहा था। साफ हवाएँ उनके इश्क को देखकर तेजी…
एक जाते हुए शायर के साथ तमाम रूहानी दुनियाबी दास्तान ख़त्म हो जाती है | बशीर वद्र गये उनके जाने का ग़म उनकी शायरियों में रूलाई बन कर फूट रही…
साहित्य जगत से : बशीर बद्र को देशभर से श्रद्धांजलि रेखा राजवंशी (सिडनी, ऑस्ट्रेलिया) उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो…
“यादों की ढलती शाम और बद्र का उजाला”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो…
अदब के आफताब का अस्त: डॉ. बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि उर्दू अदब के इतिहास में , शायरी की दुनिया को अपनी सादगी से रोशन करने वाले अज़ीम शायर, पद्मश्री…
“बशीर बद्र : दिल से अल्लाह के घर तक” – (श्रद्धांजलि) बुत भी रक्खे हैं नमाज़ें भी अदा होती हैंदिल मिरा दिल नहीं अल्लाह का घर लगता है•बशीर बद्र चले…
“उजाले अपनी यादों के…” : बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि बशीर बद्र- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाएजिंदगी की…