Category: भारतीय रचनाकार

अपने अपने ठीया (कविता)

अपने अपने ठीया (कविता) युद्ध कभी अकेले नहीं लड़े जातेदूसरे का होना बहुत जरूरी है ।अकेले तो स्वयं से भी नहीं लड़ा जातावहाँ भी एक मन के दो टुकड़े होते…

डिजिटल उपवास (व्यंग्य)

डिजिटल उपवास (व्यंग्य) धरमपुरा गांव के स्वघोषित समाजशास्त्री ‘फरेब सिंह’ ने जब प्रधानी के चुनाव में अपनी दावेदारी पेश की, तो उन्होंने गांव वालों को एक नया और डरावना सपना…

स्त्री अस्मिता के नवीन आयामों को परिभाषित करता खंडकाव्य “अहिल्या “ (पुस्तक समीक्षा)

स्त्री अस्मिता के नवीन आयामों को परिभाषित करता खंडकाव्य “अहिल्या “ (पुस्तक समीक्षा) डॉ वेद व्यथित का खंड काव्य अहिल्या महर्षि वाल्मिकी की “अहिल्या “ को ले कर लिखा गया…

उपमान और प्रतीक (कविता)

उपमान और प्रतीक (कविता) एक दिन झुँझलाकर बोला वो!ये उपमान और प्रतीकदोनों बहुरूपिया हैंदोनों खुद के लिए नहीं जीतेऔरों के काम आते हैंफिर अलग क्यों कहलाते हैं!कभी उपमान प्रतीक बन…

डियर मोमोज (व्यंग्य)

डियर मोमोज (व्यंग्य) मोमोज के उस सफेद, चिपचिपे और रहस्यमयी व्यक्तित्व की शारीरिक संरचना किसी दार्शनिक गुत्थी से कम नहीं है, जिसे देखकर लगता है कि मैदा अपनी मुक्ति के…

पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य)

पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य) हमारे यहाँ होली कैलेंडर की तारीखों से नहीं, बल्कि मोहल्ले की उस पुरानी दीवार पर पड़ने वाले नीले-लाल धब्बों से शुरू होती…

उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे (समीक्षा)

उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे (समीक्षा) पूरे 39 चालीस पहले बनी फ़िल्म ‘इजाज़त’ फिर एक बार देखी। फ़िल्म के बनने से लेकर अब तक में लगभग 40…

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना (व्यंग्य)

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना (व्यंग्य) कहावत है— “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना”, पर यहाँ तो अब्दुल्ला ने बाकायदा ‘को-ऑर्ड’ सेट पहना है और रील बनाने के लिए दीवाना हुआ…

हिंदी के दर्शक कहाँ हैं? (समीक्षा)

हिंदी के दर्शक कहाँ हैं? (समीक्षा) पद्मश्री शेखर सेन का नाम आते ही वह व्यक्तित्व आँखों के सामने आ जाता है जिसने सुर-तुलसी-कबीर-विवेकानंद की एकल प्रस्तुतियाँ दी हैं। एक मुलाकात…

  ठलुआई का लायसेंस (व्यंग्य)

ठलुआई का लायसेंस (व्यंग्य) शहर के उस कोने में जहाँ नालियों का पानी और दर्शनशास्त्र की बातें एक साथ सड़ती हैं, वहाँ एक पुराने बरगद के नीचे ‘मूर्ख शिरोमणि’ सभा…

कागज के शेर और समोसे का फेर(व्यंग्य)-डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

कागज के शेर और समोसे का फेर(व्यंग्य)-डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ शहर की धूल फाँकती एक तंग गली के आखिरी छोर पर ‘साहित्यिक पुनरुत्थान परिषद’ का बैनर ऐसे लटक रहा…

अंधभक्त इतने बुरे क्यों लगते हैं – (ब्लॉग)

अंधभक्त इतने बुरे क्यों लगते हैं डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम कृष्ण खुली आँख है। राधा बंद आँख। कृष्ण जानते हैं — मेरा जन्म क्यों हुआ है! यदा यदा हि धर्मस्य……वे…

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे – (वर्णमाला 4 – ब्लॉग)

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…

जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? – (कहानी)

जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? डॉ महादेव एस कोलूर मलप्पुरम (केरल) की जिला अधिकारी सुश्री रानी सोयामोय कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर रही थीं। केरल राज्य…

जोधपुर और जैसलमेर की सैर – (यात्रा वृतांत)

जोधपुर और जैसलमेर की सैर अनीता वर्मा मुझे हमेशा से लगता रहा है कि मैं ना जाने कितने जन्मों से यायावर हूँ। चलते रहने की इच्छा, निरन्तरता और मेरे साहस…

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे – (वर्णमाला 4 – ब्लॉग)

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…

वाह! द्वारका एक्सप्रेस वे – (ब्लॉग)

वाह! द्वारका एक्सप्रेस वे डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम वाह द्वारका एक्सप्रेस मार्ग! तेरा भी जवाब नहीं!! तू फैशनपरी-सा है! कुछ भी पहने, कहीं भी पहने! अंटशंट! मैं अपनी शादी में…

‘इ’, देखन में छोटी लगे… – (वर्णमाला 3 – ब्लॉग)

‘इ’, देखन में छोटी लगे… स्वरांगी साने ‘इंगित पर तुम्हारे ही भीम ने अधर्म किया…’ धर्मवीर भारती लिखित ‘अंधा युग’ में गांधारी का यह विलाप ‘इ’ की इतनी ताकत को…

वृक्ष – (कविता)

– डॉ महादेव एस कोलूर ***** वृक्ष आदमी ने वृक्ष से कहा —कुछ तो बोलो, यूँ क्यों चुप हो।वृक्ष मुस्कुराया,पत्तों की सरसराहट में बोला —“जिन्होंने सब कुछ खोकर भी दिया,वो…

राय कृष्णदास : (आज जिनका जन्मदिन है)

राय कृष्णदास रजनीकंत शुक्ल राय कृष्णदास का जन्म 13 नबंवर सन 1892 ई. को वाराणसी में हुआ था। वे कहानी सम्राट प्रेमचन्द के समकालीन कहानीकार और गद्य गीत लेखक थे।…

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