Category: भारतीय रचनाकार

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – (कहानी)

ध्रुव तारा कभी अस्त नहीं होता.. – राजेश्वर वशिष्ठ डॉ. विश्वास अपने चेम्बर से निकलने ही वाले थे कि लैंड-लाइन फोन बज उठा। आमतौर पर यह फोन इन दिनों गुमसुम…

राजेश्वर वशिष्ठ – (परिचय)

राजेश्वर वशिष्ठ जन्म: 30 मार्च, 1958, भिवानी (हरियाणा) संप्रति : स्वतंत्र लेखन प्रकाशित पुस्तकें : मुट्ठी भर लड़ाई, उपन्यास 1983, पुनः प्रकाशित 2024, सुनो वाल्मीकि, कविता संग्रह, 2015, गुजराती भाषा…

गोपाल सिंह नेपाली – (आलेख)

गोपाल सिंह नेपाली -अलका सिन्हा हिंदी और नेपाली भाषा के सम्मानित कवि गोपाल सिंह नेपाली अपने गीतों के लिए विशेष लोकप्रिय रहे। उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे और…

समीक्षा के भाषिक आयाम – (पुस्तक समीक्षा)

समीक्षा के भाषिक आयाम – अलका सिन्हा इसमें शक नहीं कि आजकल लेखक होना बहुत अधिक फैशन में है। यानी सभी लेखक बनना चाह रहे हैं। हद तो यह है…

उर्मिला शिरीष के कहानी-संग्रह ‘मैं उन्हें नहीं जानती’ खुद से खुद की पहचान कराती हैं – (पुस्तक समीक्षा)

खुद से खुद की पहचान कराती कहानियां – अलका सिन्हा प्रसिद्ध कथाकार उर्मिला शिरीष के कहानी-संग्रह ‘मैं उन्हें नहीं जानती’ की कहानियों को पढ़ते हुए ब्रॉनी वेयर की लिखी किताब…

बाजार में त्योहार – (कविता)

– शशिकला त्रिपाठी, भारत बाजार में त्योहार अब त्योहार झूमने लगे हैंरसिकों में, जाति विशेष के समूहों मेंक्लबों में, बेड़ों पर, बड़े-बडे होटलों मेंजनता की पहुँच से दूरगाई जाती है…

शशिकला त्रिपाठी – (परिचय)

डॉ. शशिकला त्रिपाठी वरिष्ठ आलोचक, विमर्शकार,कवि-कहानीकार एवं शिक्षाविद। पदनाम: पूर्व आचार्य एवम अध्यक्ष, हिंदी-विभागवी.सी. डब्ल्यू. (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ) जे.कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, भारत, राजघाट फोर्ट, वाराणसी।जन्मस्थान : मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश।उच्च…

आप कौन हैं? – (व्यंग्य कथा)

आप कौन हैं? – डॉ. सच्चिदानंद जोशी दिवाकर जी के आमंत्रण पर लिटरेचर फेस्टिवल के एक सत्र में ‘सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता’ विषय वक्ता के तौर पर जाना था।…

मेरी भोपाल यात्रा – (यात्रा डायरी)

मेरी भोपाल यात्रा – अनिल जोशी भारतीय भाषा मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के सिलसिले में 15 जून को भोपाल, पीपल्स इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज जाना हुआ। बैठक में…

विश्व विरासत सांची का स्तूप – (आलेख)

विश्व विरासत सांची का स्तूप – डॉ. मुन्नालाल गुप्ता मध्य भारत में सांची के स्तूप, मंदिर, विहार और स्तंभ प्राचीनतम और सबसे परिपक्व कलाओं और स्वतंत्र वास्तुकला के उदाहरणों में…

प्रख्यात भाषाविद और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ॰ वी॰ आर॰ जगन्नाथन से संवाद – (वैश्विक हिन्दी परिवार के 15 जून 2025 के कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट)

भाषा विज्ञान और शोध क्षेत्र की चुनौतियों के मद्देनजर वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में 15 जून 2025 को प्रख्यात भाषाविद डॉ॰ जगन्नाथन से सीधे संवाद का…

मेरे दादा – (संस्मरण)

मेरे दादा – नर्मदा प्रसाद उपाध्याय धरोहर रेवा की ओंकार ध्वनि, पलाश की सिंदुरी आभा और काल के मुख से जन्मी वह निमाड़ी रामायण है जिसे हम रामनारायण के नाम…

गायत्रीबाला पंडा के कविता-संग्रह ‘बाघ उपाख्यान’ पर चित्रा मुद्गल की टिप्पणी – (पुस्तक परिचय)

जंगल के बाघ से कविता का बाघकुछ अधिक धीर-स्थिर हैचतुर होने पर भी शिष्ट हैतेज होने पर भी सीधा-सादा है… राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा अनुवादित और राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित,…

पुण्य अर्जन  – (यात्रा संस्मरण)

पुण्य अर्जन – डॉ. सच्चिदानंद जोशी तिरुपति किसी ऑफिशियल काम से गए थे। सोचा कि यदि संभव हो तो भगवान वेंकटेश्वर जी के भी दर्शन इसी यात्रा में हो जाएं…

टैक्सी की शाही सवारी का आनंद – (यात्रा संस्मरण)

टैक्सी की शाही सवारी का आनंद – डॉ. सच्चिदानंद जोशी ओसाका यात्रा के दौरान एकाधिक बार टैक्सी में सफर करने का अवसर आया। सामान्य धारणा यही है कि जापान में…

देवमणि पांडेय – (परिचय)

देवमणि पांडेय जन्मतिथि : 4 जून 1958 सुलतानपुर (उ.प्र.) शिक्षा : संस्कृत में प्रथम श्रेणी एम.ए. अवध विश्व विद्यालय (1980), हिन्दी में प्रथम श्रेणी एम.ए. मुम्बई वि वि (1985) लेखन…

सिने जगत के शब्दशिल्पी – (पुस्तक परिचय)

सिने जगत के शब्दशिल्पी – देवमणि पांडेय, मुंबई मेरे मन में हमेशा उन फ़िल्म लेखकों के प्रति आदर का भाव रहा है जिनके हुनर ने मुझे प्रभावित किया। डॉ राही…

राजेंद्र मेहता, नीना मेहता : ग़ज़ल की पहली जोड़ी – (आलेख)

राजेंद्र, नीना मेहता : ग़ज़ल की पहली जोड़ी – देवमणि पांडेय, मुम्बई जब आंचल रात का लहराएऔर सारा आलम सो जाएतुम मुझसे मिलने शमा जलाकरताजमहल में आ जाना मौसम बारिश…

टॉलस्टाय का जहां हृदय परिवर्तन हुआ -(यात्रा संस्मरण)

टॉलस्टाय का जहां हृदय परिवर्तन हुआ – डॉ. सच्चिदानंद जोशी लियो टॉलस्टाय को वैश्विक धरातल पर सार्वकालिक महान साहित्यकारों की सूची में आदर का स्थान है। उनके जीवन और उनके…

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – (व्यंग्य)

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ सुबह का वक्त था, मगर मोहल्ले में अंधेरा छाया हुआ था। अंधेरा बिजली…

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