Category: भारतीय रचनाकार

एक दीपक अँधेरे के खिलाफ़ – (कविता)

–मंजु गुप्ता एक दीपक अँधेरे के खिलाफ़ आज की रातएक दीपक जलाओउनके लिएजिनके तन रूखेमन भूखे हैं आज की रातएक दीपक जलाओअँधेरे मन मेंआँज दो ज्योति-रेखनिराश नयनों मेंऔर रख दोएक…

चाँदनी ने छुआ मुझको – (कविता)

– मंजु गुप्ता *** *** चाँदनी ने छुआ मुझको चाँदनी ने झुआ मुझको, मैं चाँदनी हो गयीधूप ने जब छुआ तो मै रागिनी हो गईवायु ने स्पर्श कर जगाई नव…

खामोशी एक नदी है – (कविता)

– मंजु गुप्ता *** *** खामोशी एक नदी है खामोशी एक नदी हैभीतर बहतीउदास,शांत, निःस्वन कई बार चाँदनी रातों मेंगीत गातीतनहाई में चुपचापबरसात में अक्सरचुप्पी का बाँध तोड़झरने-सी झरती झर-झरबहुत…

माखनलाल चतुर्वेदी – (आज जिनका जन्मदिन है)

राष्ट्र कवि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय भावना और ओज के कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले के बावई में हुआ। आरंभिक शिक्षा-दीक्षा घर…

चलते चलते : बरौनी स्टेशन – (यात्रा वृतांत)

चलते चलते : बरौनी स्टेशन – डॉ वरुण कुमार बरौनी।‌ पुराने दिनों से इसकी स्मृति एक गंदे और लापरवाह स्टेशन की है जहाँ कोई कोई नियम नहीं मानता। लेकिन इस…

वर्णमाला में वर्ण नहीं – भाग -2 – (विचार स्तंभ)

वर्णमाला में वर्ण नहीं — भाग -2 डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम चाय पर खूब गुलगपाड़ा हुआ। गरमागरम बहस हुईं। बहस इतनी गर्म थी कि ठंडे पकौड़े भी गर्म लगे। लोग…

गुणाकर मुळे : विज्ञान लेखन से हिंदी की समृद्धि – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

गुणाकर मुळे : विज्ञान लेखन से हिंदी की समृद्धि गुणाकर मुळे ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गणित में एम.ए. पूरा किया और विज्ञान, इतिहास, और संस्कृति पर स्वतंत्र रूप से लेखन…

गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – (विचार स्तंभ)

गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – अतुल कुमार गांधी जी जब गुजरात बस गए तो वहां जैसे जीवन जाग उठा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ‘गुजरात राजकीय परिषद’ की स्थापना की। गांधी…

कविता में दर्द – (कविता)

कविता में तो दर्द बहुत है कवि में पता नहीं कितना अच्छा जीवन-स्तर धुले वस्त्र चश्मे का सही नंबर, फ्रेम सुंदर लेकिन भीतर आँखें नम उनके लिए जिन्हें कपड़ा भी…

महाभारत के ‘9 अनमोल मोती’ – (विचार स्तंभ)

यदि आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित माँगों और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते तो आप जीवन में असहाय हो जाएँगे… "कौरव" आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों,…

दक्षिण एशिया में भाषाओं के विकास पर पेगी मोहन की अंतर्दृष्टि – (पुस्तक समीक्षा)

दक्षिण एशिया में भाषाओं के विकास पर पेगी मोहन की अंतर्दृष्टि ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र भूमिका:भाषाओं का विकास किसी समाज के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक बदलावों का सजीव प्रतिबिंब…

ग्रोक (Grok  xAI) से बातचीत – (साक्षात्कार)

ग्रोक (Grok xAI) से बातचीत ~ विजय नगरकर आजकल सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धि आधारित ग्रोक (Grok xAI) की भाषा और उत्तर देने की शैली पर बहुत चर्चा हो रही…

हिन्दी-अंग्रेज़ी अनुवाद कार्यशाला – (रिपोर्ट)

हिन्दी-अंग्रेज़ी अनुवाद कार्यशाला रिपोर्ट – डॉ जयशंकर यादव वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में अनुवाद की गुणवत्ता और महत्ता के मद्देनजर रविवारीय कार्यक्रम के अंतर्गत 23 मार्च…

संस्कारों के अंतर – (कहानी)

संस्कारों के अंतर – अजेय जुगरान अनाहिता एक संवेदनशील, बुद्धिमान,पढ़ी-लिखी और देश – विदेश अच्छी तरह से घूम चुकी तैराक थी। वह अच्छे परिवार में पैदा हुई मुंबई की एक…

मनाली के इग्लू – (यात्रा संस्मरण)

मनाली के इग्लू (पहला दिन – 21 जनवरी 2021) मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ इस्माईल मेरठी का वही शे’र ख़ुद को बारम्बार आकर्षित करता रहा है, जिसने केदार मिश्र को राहुल सांकृत्यान…

मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ – (परिचय)

मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ जन्म : नवंबर 1983 (बहराइच, उ० प्र०) रचनाएँ : शे’र, कविता एवं कथेतर साहित्य में सृजनरत प्रकाशन : शाम और तन्हाई (दो लाइना इश्क़) शे’र संग्रह आगामी…

वारंगल के ध्वंसावशेषों में – (य़ात्रा संस्मरण)

वारंगल के ध्वंसावशेषों में – डॉ वरुण कुमार “यहाँ कैसे आए, कोई काम था?” “नहीं, मैं तो यहाँ घूमने आया हूँ।” “यहाँ!” उनकी आँखों में हैरानी थी। “यहाँ क्या है?”…

विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार: एक साहित्यिक कृति का सम्मान – (सूचना)

हाल ही में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक घटनाक्रम में, प्रख्यात हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार न केवल…

डॉ. एच. बालसुब्रहमण्यम – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

डॉ. एच. बालसुब्रहमण्यम : एक बहुआयामी साहित्यिक व्यक्तित्व ~ विजय नगरकर डॉ. एच. बालसुब्रहमण्यम हिंदी साहित्य और अनुवाद के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वे लेखन, अनुवाद, संपादन और…

आज के दिन विभूति विशेष के नाम : हनुमान प्रसाद पोद्दार – (दिन विशेष)

आज के दिन विभूति विशेष के नाम : हनुमान प्रसाद पोद्दार – डॉ जयशंकर यादव 22 मार्च 1971 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आध्यात्मिक विभूति हनुमान प्रसाद पोद्दार का निधन। उन्होंने…

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