Category: प्रवासी साहित्य

श्राउड ऑफ टूरिन का रहस्य

आस्था, इतिहास और विज्ञान के बीच एक जटिल संवाद मनीष पाण्डेय ‘मनु’, नीदरलैंड्स दुनिया के सभी धर्मों, समुदाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के इतिहास में कुछ ना कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं…

तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ?

अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने…

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) हवा शान्त है,रात बरसता मेह रुक गया,सड़कें पानी पीकर लेटीं,पत्ते सभी नहाये दिखते,सूरज भी अब बदन पौंछ कर,आने की तैयारी में…

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) आज धूप की मुठ्ठी बाँधेसूरज बादल पीछे दुबकाऔर हवा की बन आई हैघर-घर जा कर चुगली करती। सूरज व्याकुल देख रहा…

“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन

“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन सुबह की शुरुआत हो या शाम का समाँ,चाय हर पल को बना देती है सुहाना।कभी हल्की भाप में सुकून मिलता है,कभी एक प्याले में…

“प्रवासी मजदूर”- डॉ. वंदना मुकेश

“प्रवासी मजदूर”- डॉ. वंदना मुकेश छत होती तो देखती,गली से निकलतेप्रवासी मजदूरों की टोलियाँ।देखती कुछ औरतें,कुछ बच्चे लटकाए,कंधों पर झोले अटकाए। कुछ औरतें,खाली पेटवाली,कुछ पेटवाली, खाली। मुझे छत चाहियेकि देख…

हम मिलें आमने-सामने (कविता)

हम मिलें आमने-सामने (कविता) (बृद्धावस्था, सामयिक चिंतन) खुशी की खोज में मैं करवटें बदलता हूँमैं कोई संगीतकार या कवि नहीं हूँऔर नहीं हूँ शब्दों का जाल बिछाता लेखकजो बनाते हैं…

प्रभु का ध्यान (कविता)

प्रभु का ध्यान (कविता) (आत्मिक चिंतन, अधूरे प्रश्न) प्रभु, मैं कैसे ध्यान करूँ?अपने मन के भावों को कैसे तुम्हें बताऊँश्रद्धा भक्ति के गीतों को कैसे तुम्हें सुनाऊँ व्याथापूर्ण वाणी को…

राही एक सड़क पर (कविता)

राही एक सड़क पर (कविता) (प्रवासी जीवन, भावनात्मक संघर्ष) विजय पताका लेकर भागा, दुनिया की इस दौड़ मेंकालचक्र की सुधि नहीं थी, यौवन के इस खेल में lसुख-दुःख का बन्धन…

अतीत के पन्नों से (डायरी)

अतीत के पन्नों से (डायरी) मेरी यादों का फलक वो कहते हैं न, ‘स्काई इज द लिमिट’ कुछ ऐसे ही मेरे जीवन की पगडंडियों के निशान हैं जो अब धरती…

अपने भीतर के क़लमकार से मुलाक़ात (डायरी)

अपने भीतर के क़लमकार से मुलाक़ात (डायरी) अपने अंदर छुपे हुए इस रचनाकार से में अपरिचित थी, पर जब पहचान हुई तो लगा हम अजनबी थे ही नहीं, साथ-साथ एक…

अबूझ – (कहानी)

अबूझ – सरस दरबारी, कनाडा “दीदी आपको शादी में आना ही होगा।” “पर स्वाति मैं किसी को नहीं जानती।” “मुझे तो जानती हैं न। यह भी जानती हैं कि मेरे…

टोकरी – उम्मीदों की – (बाल कहानी)

टोकरी – उम्मीदों की डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना, कोलोन, जर्मनी ओह, 7 बज गए, क्रिस्टी ने आँख खोलकर घड़ी पर नजर दौड़ाई, आँखें मिचमिचाते हुए चारों ओर देखा, पर सुबह…

शैलजा सक्सेना की कहानियाँ: रिश्तों, संघर्षों और उम्मीदों की दास्तान – (पुस्तक समीक्षा)

“प्रवासी कथाकार शृंखला” राकेश मिश्र शैलजा सक्सेना जी से मेरा परिचय हिंदी राइटर गिल्ड के मासिक कार्यक्रम में हुआ। उनकी लिखी कहानियों को पढ़ने से पहले मैंने उन्हें सुना है…

थाईलैंड – माई नाम – (ब्लॉग)

थाईलैंड – माई नाम शिखा रस्तोगी, बैंकॉक,थाईलैंड नदियों के महत्व को मनुष्य अच्छी तरह से जानता है। थाई भाषा में, माई नाम नदी के लिए एक सामान्य शब्द है, जिसमें…

कोरोना-चिल्ला – (कहानी)

कोरोना-चिल्ला* दिव्या माथुर तीन हफ्ते हो चुके हैं जॉन को घर छोड़े हुए; वह एक कैरावैन में किराए पर रह रहा है, वहीं से वह दफ़्तर का काम भी संभाल…

बेक्ड-बीन्स – (कहानी)

बेक्ड-बीन्स दिव्या माथुर सुपरमार्केट के यूँ ही चक्कर लगते हुए बुढ़िया ने ग्राहकों और लोगों की नज़र से बचते हुए दो छोटे टमाटर और कुछ लाल अँगूर मुँह में रख…

चौक पुराये मंगल गायें – (कविता)

डॉ. शिप्रा शिल्पी (कोलोन, जर्मनी) ***** चौक पुराये मंगल गायें चौक पुराये मंगल गायें, आई है दीवालीनाचे-गायें ख़ुशी मनायें, आई है दीवाली धनतेरस खुशहाली लायाजन-जन का है मन हर्षायामिलजुल कर…

हिंदी और डच : विकसित होता आपसी संवाद – (ब्लॉग)

हिंदी और डच : विकसित होता आपसी संवाद रामा तक्षक, नीदरलैंड्स वर्ष 2019, नीदरलैंड्स में भारतीय राजदूत श्री वेणु राजामणि द्वारा एक पुस्तक लिखी गई थी। यह पुस्तक अंग्रेजी भाषा…

रावण (कविता)

दसग्रीव दशानन् दसकंधर कहलाता थाजब रावण चलता सारा जग हिल जाता थावो था पंडित-विद्वान और था बलशालीउसके सन्मुख देवों का जी थर्राता था रावण ने सोने की लंका बनवाई थीतीनों…

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