मधुमक्खी – (कहानी)
मधुमक्खी – डॉ मीनाक्षी गोयल नायर, कोबे, जापान बालकनी में लगे पौधौं पर फूल खिलने लगे हैं। छोटे छोटे तीन फूलों के गमले जो गार्गी ने कुछ उदासी दूर करने…
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मधुमक्खी – डॉ मीनाक्षी गोयल नायर, कोबे, जापान बालकनी में लगे पौधौं पर फूल खिलने लगे हैं। छोटे छोटे तीन फूलों के गमले जो गार्गी ने कुछ उदासी दूर करने…
जापान में भारतीय ज्ञान परंपरा की कुछ छवियाँ डॉ वेदप्रकाश सिंह ओसाका विश्वविद्यालय, जापान जापान की संस्कृति में शिंतो और बौद्ध धर्म का अमिट प्रभाव है। शिंतो धर्म जापान में…
सर्द रातें, टोक्यो और ‘तेनाली राम’ – सुयोग गर्ग, जापान ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ सफ़्ताहों से शीत लहर ने शहर को झँझोड़ के रख दिया है। घर के दरवाज़े…
© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल आँखों में ज़रूरी है ग़ैरत औ हया होना।।वादों में ज़रूरी है इक अहले वफ़ा होना।। तुम प्यार के खेतों में बारूद उगाते होतुम भूल गए शायद…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया कब तक ? कल तक आँख में चुभन थीआज देखता हूँ यहाँ नज़ारा ही बदला है सोचता हूँप्रकृति ने दोनों आँखें आगे लगायी हैं ताकि कदम…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया संस्कार जड़ ने कहा तने सेछाया विस्तार ले, अपरिमित प्यार देइसलिए तने रहो, बने रहो तना बोला डाली सेफैलो पर याद रहे, किस वृक्ष की तुम…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया बंजारा मन बंजर तनबंजारा मनकहाँ कहाँ न हारा मनजहाँ कहीं भी चोट लगीवहीं गया दोबारा मन ख़्वाबों के तिनके चुन चुनयादों के धागों से बुननीड़ बनाया…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया कहो तो कहो, तुम्हारा परिचय क्या है ? सृष्टि-द्वार पर दिवा-रात्रि काउषा-निशा ले आना जानाबदली में छिप कर बिजली काआवेशित संगीत सुनाना संसृति रंगमंच पर प्रतिपलअभिमंत्रित…
– अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया अलग-अलग कुछ शब्द पड़े थे कोने में स्वर देकर तुमने समझायाअन्तर होने, न होने में जैसे ठंढी की रातों मेंकुछ जागे-जागे, कुछ विस्मृतसपनों पर कोई छलका…
–अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया खामोशी हद से ज्यादा बढ़ी है खामोशीअर्चियों की लड़ी है खामोशी ऐसा क्या खो गया है मेले मेंबुत-सी गुमसुम खड़ी है खामोशी हुए हम कैद ख़ुद की…
–अनिल वर्मा, ऑस्ट्रेलिया नाम नाम शब्द सेशब्द अक्षर सेअक्षर ध्वनि सेध्वनि कम्पन से कम्पन स्वयं-निनादित भव सेभव सम्भव हो सका भाव सेया सब लीला के प्रभाव से ? इस प्रभाव…
अनुभौ उतरयो पार! डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम कबीर का जीवन ही दर्शन पर आधारित था। उन्होंने जो देखा, उसी को कहा। किसी किताब-विताब के चक़्कर में नहीं रहे। कहते हैं,…
गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’, मॉरीशस सिंदूर जान हथेली ले उतरे हैं, अपने सारे वीर।बदला ये सिंदूर का आज, ले पोंछेंगे नीर।। पानी सिर से हुआ है उपर,खैर नहीं इस बार।कुचलने फ़न…
डिजिटल हिन्दी की यात्रा भूमंडलीकरण ने हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ भारतीय भाषाओं को भी काफी प्रभावित किया है। आज के यांत्रिक युग में भाषा का प्रयोग केवल…
© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल रहते हैं किस तौर यहाँ पर हाल न पूछोमिलती है किस भाव यहाँ पर दाल न पूछो आत्महत्या पर खेतिहर की भी साहब जीहंसते हैं कि…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया चाय नहीं तो चाह नहीं मेरा घरोंदा… और मेरी चाय,कितना मदहोश नशा है ये।चलो फिर,उगते और डूबते सूरज के साथचाय पीते हैं।रिमझिम बारिश,और तेरा मादक…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बेशुमार दर्द खंडहर के सन्नाटे… कुछ बोल रहे हैं,जुगनू बनकर रिश्ते… छलक रहे हैं।गूँजती थी जो बांसुरी,उसी राग को अब मन खोज रहा है,रीते-रीते कमरे…मौन…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया महिला दिवस फिर आया महिला दिवस,फिर मचा शोर — नारी-शक्ति का।फिर सुनाई दी आवाज़ — अस्मिता और सम्मान की,और दोहराई गई कहानी — अत्याचार और…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया बाबा की साइकिल की कहानी बाबा की साइकिल की कहानीबचपन की वो यादें सुहानी,कितनी खूबसूरत सी —बाबा की साइकिल की कहानी।मेरे बाबा की दो चीजें…
डॉ. इंगीता चड्ढा (ठक्कर), ऑस्ट्रेलिया मन कहता है मन कहता है.एक कहानी लिखूँ।ना कोई मोहब्बत की दास्तान,ना ही प्रकृति के रंगों की कहानी।ये है समाज में सड़न की तरह फैली…