बौनों की बारात – (कविता)
बौनों की बारात झूम-झूम कर नाच रही, छायाएँ आधी रातधूम धाम से निकल रही है, बौनों की बारात सोच भी बौनी, कर्म भी बौना, मन का हर कोना है घिनौनाजो…
हिंदी का वैश्विक मंच
बौनों की बारात झूम-झूम कर नाच रही, छायाएँ आधी रातधूम धाम से निकल रही है, बौनों की बारात सोच भी बौनी, कर्म भी बौना, मन का हर कोना है घिनौनाजो…
शब्द एक रास्ता है शब्द एक रास्ता हैमेरा विश्वास हैयह सोचकर मैंने उसे पुकारापर उधर से कोई उत्तर नहीं मिला। मैंने फिर सोचाशब्द एक रास्ता हैऔर शब्दों को कागज पर…
युक्रैनी हिंदी-शिक्षण में कला-प्रेम का योगदान -डॉ. यूरी बोत्वींकिन, युक्रैन प्रत्येक देश का इतिहास कितना भी जाटिल और दुख-भरा क्यों न हो उससे राष्ट्रीय चेतना का एक गहरा जुड़ाव अवश्य…
हिन्दी साहित्य की विश्व में भारतीय संस्कृति को बढ़ाने में भूमिका -परवीन लता हमें ये जानना है कि संस्कृति का शब्दlर्थ क्या है? संस्कृति याने कि उत्तम या सुधरी हुई…
दर्द, भय और पीड़ा कोई भी दर्द, भय और पीड़ा से बच नहीं पाता हैफिर भी दर्द से ज्ञान आ सकता है,डर से साहस आ सकता है,दुख से ताकत आ…
खुशियाँ आनंद और प्रसन्नता देती है खुशियाँजिंदा रहने की औषधि यही तो है मियाहर्ष, सुख, आमोद, प्रमोद या कहो उल्लासइसी के पान से बुझती है हर किसी की प्यासविचारों की…
आंतरिक स्कूली शिक्षकों की याचिका हम उल्लू नहीं है जो रात को दिखते हैंन ही कोई निशाचर बिल्लीहमारी आंखें धुंधली है हम नहीं देख सकतेहम चमगादड़ की तरह अंधे हो…
औषधि जब मैं छोटी लड़की थीकई महिलाएं आती थीमेरी दादी के पास ठीक होने के लिएदादी कुछ पत्ते चबा लेतीअधिक पत्तियों में लिपटेपरेशान घावों को सूखने के लिएफिर रस का…
अंधेर है भाई छः साल के बच्चे की किलकारियां हूँ जब सुनतीभोले भाली उनके चेहरे देख खिल हूँ मैं पड़तीकुछ सीखने को मुझसे उत्सुकता भरी नजरों से देखतेमेरे मुख से…
जिंदगी का सफर जो छूट रह है उसका क्या अफ़सोस करें हमजो हासिल हो रहा है, उसी से सवाल करें हम बहुत दूर तक जाते हैं, यादों के काफ़िलेबेकार क्यों…
बरसात का मौसम चलो साथियों चले बाहरघर में भला क्या रखा हैबादल गरजती, बिजली चमकतीमूसलाधार बरखा हो रहा है रह रह कर झोंके की हवा चल रहीमग्न हो झूम उठी…
स्वीडिश एकेडमी ने साहित्य के नोबेल प्राइज 2024 की घोषणा कर दी है, और इस वर्ष यह प्रतिष्ठित पुरस्कार साउथ कोरिया की प्रतिभाशाली लेखिका हान कांग को दिया गया है।…
हिन्दी को बैसाखी नहीं चाहिए -हंसा दीप इन दिनों सभी को हिन्दी पठन और लेखन को लेकर एक समान चिन्ता है। भारत हो या भारत के बाहर, हर ओर एक…
चैतन्य मन – पूजा अनिल सामने वाली शुक्ला आंटी की बेटी को किसी अनजान लड़के के साथ देख कर मन किया कि उन्हें उनकी बेटी के इस छुपे हुए रिश्ते…
राह में जीवन पानी सी आकृति मेरीपानी में घुल रही!बुलबुले सा जीवन मेरादेखो कैसे उड़ रहा!वाष्पित होती साँसे मेरीकहो कहाँ से आ रहीं?सीमित सी दृष्टि मेरीअपरिमित स्वप्न बुन रही!चंद वर्षों…
दुविधा – पूजा अनिल सुबह से माँ से बात नहीं हो पाई थी उस दिन। प्रकाश ने मोबाइल देखा, दोपहर में माँ ने फ़ोन किया था लेकिन तब वह ऑफिस…
पावस देखो, बारिशों में कभी मत रोनाभीगेगी देह भीभीगेगी रूह भीतब धूप भी न होगीकि मन की नमी सोख ले!और सुनो, मत रोना गर्मियों मेंआंसूं और पसीनाएक से दिखेंगेकोई आँख…
काश! -पूजा अनिल मारीसा किसी तरह उठ कर अपने कमरे से निकल कर किचन की तरफ जाने लगी। पंद्रह कदम का फासला तय करने मे बड़े कष्ट के साथ उसे…
सिंगापुर में हिंदी -डॉ. संध्या सिंह भारतीय डायस्पोरा का फैलाव विश्व के कई देशों में काफी बड़े स्तर पर है। यह सिर्फ फैलाव ही नहीं है बल्कि उस देश के…
मन का प्रहरी -शिवानी आज तक मुझे अपनी अन्तःप्रेरणा पर बड़ा गर्व था, पर आज सचमुच ही मेरा दर्प अचानक हाथ से गिर गए दर्पण की भाँति, यथार्थ की धरा…