Category: विधा

आज मिलेंगे – (कविता)

आज मिलेंगे तुम मिलोगे तो कहाँ से शुरू होगी हमारी बातचीत?सूरजकुण्ड सिटी हॉल्ट की हलचल भरी शामों सेया किसी उदास दोपहरी सेजब 32/3 बहस कार्यालय में हम बिना दूध की…

प्राथमिकता का व्याकरण – (कविता)

प्राथमिकता का व्याकरण बहुत जटिल होता है प्राथमिकता का व्याकरणवैसे यह निर्भर करता है व्यक्ति-व्यक्ति पर कुछ लोग अपना अर्जित सब कुछ गँवा देते हैंपर नहीं बदलते प्राथमिकताकुछ बदल लेते…

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की – (कविता)

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की नए सुख में होती है मादकताअफीम से ज़्यादा नया सुख आता हैऔर मनुष्य बहुत कुछ भूल जाता हैकई बार तो…

अनुत्तरित प्रश्न – (कविता)

अनुत्तरित प्रश्न बच्चे आजकल बहुत प्रश्न करते हैंमाँओं के पास उत्तर नहीं हैंपिता से पूछो तो झल्लाते हैंप्रश्न पूछने को बेवकूफी बताते हैंअध्यापकों के पास, हर प्रश्न केकुछ रेडीमेड उत्तर…

फूल खिल रहा है – (कविता)

फूल खिल रहा है वहाँ बगीचे में फूल खिल रहा हैनहीं, फूल हँस रहा हैफूल खुशियाँ बाँट रहा हैसुगंध लुटा रहा हैफूल शुभकामनाओं के रंग छलका रहा हैउमंगों के इंद्रधनुष…

जंगल का कानून – (कविता)

जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…

हँसी और मुस्कान – (कविता)

हँसी और मुस्कान हँसी और मुस्कान, दो बहिनेंएक होकर भी अलगएक ही डाल पर खिले दो फूलएक अधखिली कली, दूसरी पूरा खिला फूलएक भोर की पहली किरन-सी उजली, नाजुक, लजीलीदूसरी…

वेनिस का सौदागर : यहूदी घृणा की जड़ें – (आलेख)

वेनिस का सौदागर : यहूदी घृणा की जड़ें डॉ वरुण कुमार दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी सरकार द्वारा यहूदियों का नरसंहार बीसवीं सदी की हृदयविदारक घटनाओं में से एक है,…

तमिल कवि पं. प्रेमलाल सुबरन की ‘अंजले’ कविता का हिंदी अनुवाद – (अनुवाद)

अनुवादक : सुनीता पाहूजा तमिल भाषी कवि पं. प्रेमलाल सुबरन द्वारा 1943 में रचित कविता ‘अंजले’ का हिंदी अनुवाद अंजले हाय! अफ़सोस! क्यों हमारे हृदय पिघल न जाएँ?क्या महान भारत…

एक साधारण सी औरत – (संस्मरण)

एक साधारण सी औरत -आशा बर्मन वह सचमुच एक अत्यंत साधारण सी औरत थी। लोगों की आँखों के सामने से गुजर जाए तो कोई उस पर ध्यान भी नहीं देता।…

प्राकृतिक आपदा – (कविता)

प्राकृतिक आपदा बारिश की गिरफ्त में,मैं असहाय बैठी हूँ,डर के हाथों से झकझोर दी गई हूँ। जहाँ पक्षी आकर चहचहाने चाहिए थे,वहाँ केवल अराजकता और बेचैनी की गूँज चीखती है।मैं…

ब्रजराज किशोर कश्यप की कविताएँ – (कविता)

ब्रजराज किशोर कश्यप की कविताएँ 1. मानव और गणित मानव ने जब गणना सीखी वह हर्षायाबड़े चाव से उसने जोड़ा और घटाया योग और ऋण का कार्य उसे अधिक न…

एक छोटी सी बेवफाई – (पंजाबी कहानी अनुवाद)

पंजाबी कहानीकार : जसवीर राणा अनुवादिका : जसविन्दर कौर बिन्द्रा एक छोटी सी बेवफाई सभी ने चिता में तिनके तोड़ कर फेंक दिए थे मगर मैं नहीं फेंक पाया था।…

सब ठीक है, माँ… – (कहानी)

सब ठीक है, माँ… -यूरी बोत्वींकिन मुझे नहीं पता मैं अच्छा बेटा हूँ या बुरा… अपनी माँ से झूठ बोलना यदि बुराई है तो बुरा ही हूँ। बहुत झूठ बोलता…

लेबनॉन की एक रात…. – (कहानी)

लेबनॉन की एक रात…. डॉ. शैलजा सक्सेना १२ अगस्त १९४५! दूसरी बड़ी लड़ाई का समय! लेबनॉन के यहूदी लोग छोटे-छोटे समूहों में छिप कर अपनी ज़मीन पर अपना देश बनाने…

ये बनारस का ज़िक्र है दोस्तों – (यात्रा-वृतांत)

ये बनारस का ज़िक्र है दोस्तों -अनीता वर्मा बचपन में एक फ़िल्म देखी थी “बनारसी बाबू “। बुरे भी हम भले भी हम, जैसी पंक्ति यूँ ही नहीं कही गई…

अंजू मेहता की लघु कथाएं – (लघु कथा)

चार लघु कथाएं –अंजू मेहता 1. सामान दौड़ते-दौड़ते जल्दी से स्कूल की बस पकड़ी चलती बस में चढ़कर बैठना सचमुच किसी रोमांच से कम नहीं होता है ऐसे में हृदय…

साहित्य की प्रभाव क्षमता और हिन्दी समाज – (समीक्षा)

साहित्य की प्रभाव क्षमता और हिन्दी समाज डॉ० वरुण कुमार कवि कुछ ऐसी तान सुनाओजिससे उथल पुथल मच जाएएक हिलोर इधर से आए,एक हिलोर उधर से आएहाहाकार महा छा जाए।…

अद्भुत भाषा संस्कृत – (आलेख)

अद्भुत भाषा संस्कृत संस्कृत में 1700 धातुएं, 70 प्रत्यय और 80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी संख्या 27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो…

वेदांत से वैराग्य – (आलेख)

वेदांत से वैराग्य -सुरेश पटवा आध्यात्मिक ग्रंथ उन ऊंचाइयों पर सृजित होते हैं जहाँ नाम, रूप, काल, दिग, दिशायें सब खो जाते है। साधक के भीतर खिला हुआ शून्‍य, ज्ञान…

Translate This Website »