अनुपम मिश्र की उपस्थिति – (संस्मरण)
वरिष्ठ लेखक जयशंकर ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद, लेखक अनुपम मिश्र जी को, उनके कामों को याद करते हुए यह आत्मीय गद्य लिखा है।
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वरिष्ठ लेखक जयशंकर ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद, लेखक अनुपम मिश्र जी को, उनके कामों को याद करते हुए यह आत्मीय गद्य लिखा है।
हॉब्सन-जॉब्सन और आधुनिक ऑक्सफोर्ड अंग्रेज़ी कोश: हिंदी के बहाने अंतरराष्ट्रीय अंग्रेज़ी का विस्तार ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र 📜 भूमिका भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और…
हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास एक लंबी प्रक्रिया है जो सदियों से चली आ रही है।…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ *** रिमझिम बरसात भरी (उड़ियाना छंद) रिमझिम बरसात भरी, सावन सुहावनी।शिव जी का ध्यान धरें, ऋतु है सुपावनी॥नद नाले तृप्त हुए, हरियाली छायी।कोयल की कुहू-कुहू, मन…
अनीता वर्मा *** चाँद नभ पर देखे चंदा इंसीदेख-देख हँसी है छलकीनानी कहती चंदा है मामामम्मी कहती वो तो है नानीचाँदनी जैसे बाल हैं उसकेमुझे लगे ये कोई कहानीटी.वी.तो कुछ…
अनीता वर्मा *** नन्ही बूँदे नन्हीं बूँदें टप-टप बरसेंधरती का मन देखो हरषेपेड़ों ने तो गीत सुनायानन्हा पौधा भी मुस्कायाहरी घास भी लहराती हैजानें क्या क्या गाती हैकोयल ने भी…
अनीता वर्मा *** जल बचाओ रिमझिम बूँदें बरस रहीं हैंधरती कितनी चमक रही हैहरा-भरा परिधान पहनकरदेखो कैसी महक रही हैपेड़ों पर कोयल कूक रही हैना जाने क्या पूछ रही हैपत्ते…
अनीता वर्मा *** पक्का वादा पक्का वादाहम करते हैं पक्का वादानहीं खायेंगे मीठा ज़्यादाफल सब्ज़ियाँ ताक़त वालीलाती हैं चेहरे पर लालीदादू मुझको आम खिलातेपापा मीठे फल हैं लातेमुझको मेरी मम्मी…
कही गई और अनकही भावनाओं का आईना समीक्षक: प्रीती जायसवाल कविता साहित्य का वह सशक्त माध्यम है जो हमें समाज को एक नई दृष्टि से देखने, समझने और महसूस करने…
डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! माँ छूती है बादल जैसेबारिश जैसे, अमृत जैसे!स्पर्श पिता काधूप हो जैसे, सूरज जैसे।दादा दादी नाना नानीकिशमिश जैसे और छुआरे।सखी…
डॉ. शारदा प्रसाद *** अपनी नागरी लिपि हिंदी हो जन-जन की भाषाहिंदी हो हर-मन की आशा!बने सकल विश्व में सिरमौरऐसी है सबकी अभिलाषा!! सब मिलकर करें प्रयासहर बोली का हो…
*** डॉ शारदा प्रसाद करम परब (झारखंड का लोकप्रिय पर्व) भादो माह शुक्ल एकादशीकरम परब लेकर आया!हरियर करम डाल ले भाई आयाबहना का मन हरसाया!! भाई-बहन का पर्व है प्याराकरमा-धरमा…
डॉ शारदा प्रसाद *** रक्षा बंधन सावन का पूनम का चंदाआया ले किरणों का उपहार!सकल विश्व मना रहाभाई-बहन का सुंदर त्यौहार!! कलाई सजेगी राखी सेशुभ तिलक लगेगा भाल विशाल!आरती उतारे…
डॉ शारदा प्रसाद *** झूलन झूला झूलैं कृष्ण-कन्हैयामाथे मोर मुकुट अति शोभितबलि-बलि जात हैं नंद-यशोदागोपियों का मन हर्षित- मोहित सावन माह है अति मनभावनझूलैं संग-संग राधा रानी!कृष्ण-कन्हैया के मन बसतीवृषभानु…
डॉ शारदा प्रसाद *** आजादी की सुनहरी भोर सन् सत्तावन से सततचलती रही लड़ाई!तब जाकर आजादी कीपावन शुभ घड़ी आई!! आजादी की बलिवेदी परवीरों ने शीश चढ़ाई!अंग्रेजों के दमन सहेऔर…
प्राची मिश्रा *** आम आदमी वो मिलता है वो दिन मुझकोअपना सामान समेटे हुएमैली कुचैली इक चादर मेंअपना ईमान समेटे हुए हाड़ मांस की इक जर्जर कायामिलती बोझा ढोते हुएमुख…
प्राची मिश्रा *** आम आदमी अमन चाहता है न कलह चाहता हैन दमन चाहता हैन सत्ता चाहता हैन चमन चाहता हैपिस जाता है फिरभी सियासत के पाटों मेंएक आम आदमी…
प्राची मिश्रा *** अच्छी औरतें ज़माने ने समझायाअच्छी औरतें घर में रहती हैंजो अपने मन की बात के अलावासब कुछ कहती हैंजो लड़ती हैं पति से गहने ज़ेवर के लियेपर…
प्राची मिश्रा *** तुम्हारा होना मेरे दुपट्टे का एक छोरहमेशा तुम्हारा रहेगाजिसमें बेफिक्र होकर तुमपोंछ सको अपने आँसूहां तुमने ठीक सुना!!मैं चाहती हूँ तुम दर्द कोइक्कठा करना छोड़ दोतुम्हारे रोने…
प्राची मिश्रा *** ये आँखें ये आँखेंबस उतनी ही छलकनी चाहिएजितने में न डूबे ये संसारये धरती और ये मनचीर कर दुःख का सीनाजब पिघलती हैं ये आँखेंपत्थर कर देती…