Category: भारत

तमिल रामायण ‘रामावतारम्’ : एक विवेचन – (आलेख)

तमिल रामायण ‘रामावतारम्’ : एक विवेचन (-डॉ. दंडिभोट्ला नागेश्वर राव) भारत में नैतिक मूल्यों की स्थापना में साहित्य का विशेष स्थान है। काव्य-सौंदर्य के प्रतिमानों में सामाजिक एवं सामूहिक हित…

श्री गुरु नानक देव जयंती पर विशेष – (श्रद्धांजलि)

हे बाबा नानक! बहुत पुरानी बात हैयुगों पुरानी नहींबाबा नानक, चहुं दिशाएं घूमतान कोई सवारी, न कोई ठेलाअपने पांवों पर चलअपने भक्तों तक पहुंचताया जो उसकी प्रतीक्षा मेंनज़रें बिछाए रहतास्वयं…

दिविक रमेश की बाल कविताएँ – (बाल कविता)

चलो बोल दो सॉरी तो ढीली थी सो खिसक गई थोड़ी इधर-उधर।हँसने की क्या बात है जी क्यों इतनी खिर-खिर।क्या पेंट ने कोई जोक अजी सुनाया है।देख किसी को परेशान…

बाल दिवस पर विशेष – (बाल कविता)

अनीता वर्मा की बाल कविताएँ सूरज रवि गगन पर रौब जमातेअपनी दुनिया में इठलातेललाट तेज पर खूब चमकतादीप दीप्ति से अद्भुत दमकता धरती को प्रकाश पहुँचातेसुबह-सुबह आकाश में आतेपात-पात और…

आधुनिक कविता में छंद और लय का अतिक्रमण – (समीक्षा)

आधुनिक कविता में छंद और लय का अतिक्रमण -डॉ० वरुण कुमार एक पाठक की कविता की पहचान सामान्यतः जिस चीज से शुरू होती है वह है छंद। छंद में बंधी…

21वीं सदी में गुजराती कहानी – (आलोचना)

21वीं सदी में गुजराती कहानी -आलोक गुप्त गुजराती में कहानी लेखन अन्य भारतीय भाषाओं की तरह बीसवीं सदी में ही प्रारंभ होता है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में कहानी के…

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं – (कविता)

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं एक बार फिरमेरे गाँव मेंफसलों के मौसम मेंबच्चे उग आए हैंऔर मैंकलम थामे तैयार हूँकविता करने के लिए। यहाँ-वहाँ लोगया तो…

बौनों की बारात – (कविता)

बौनों की बारात झूम-झूम कर नाच रही, छायाएँ आधी रातधूम धाम से निकल रही है, बौनों की बारात सोच भी बौनी, कर्म भी बौना, मन का हर कोना है घिनौनाजो…

शब्द एक रास्ता है – (कविता)

शब्द एक रास्ता है शब्द एक रास्ता हैमेरा विश्वास हैयह सोचकर मैंने उसे पुकारापर उधर से कोई उत्तर नहीं मिला। मैंने फिर सोचाशब्द एक रास्ता हैऔर शब्दों को कागज पर…

मन का प्रहरी – (कहानी)

मन का प्रहरी -शिवानी आज तक मुझे अपनी अन्तःप्रेरणा पर बड़ा गर्व था, पर आज सचमुच ही मेरा दर्प अचानक हाथ से गिर गए दर्पण की भाँति, यथार्थ की धरा…

गूंगा – (कहानी)

गूंगा –शिवानी सर्जन पंड्या को दूर से देखने पर लगता, कोई अंग्रेज़ चला आ रहा है। सुर्ख़ गालों पर सुख, सन्तोष और स्वास्थ्य की चमक थी। उनके हाथ में कुछ…

डॉ नीलम वर्मा की ग़ज़ल – (ग़ज़ल)

ग़ज़ल वाबस्ता हैं सब जिससे, ज़ंजीर है तारों कीहँसना कभी रोना भी तक़दीर है तारों की क्या ख़ूब फ़लक पर ये तहरीर है तारों कीलैला है या शीरीं है या…

जनमानस में राम – (कविता)

जनमानस में राम सूर्य सगर्व निरखता,सरयु-साकेत समन्त,वन्दन से वंदनवार तक,रामबाण अरिहन्त। नित्य प्रति हो सुखकारीश्रीरामकथा का श्रवण,हरें सकल हिय की व्यथाश्रीजानकी श्रीचरण। शेषनाग अवतार रूपसद्गुण शुभ लक्षण,तत्पर प्राण समर्पण कोरामानुज…

ज्योति गीत – (कविता)

ज्योति गीत हों सहस्त्र ज्योति दीप, हों सहस्त्र ज्योति कण,हों सहस्त्र ज्योति गीत, हों सहस्त्र ज्योति क्षण, थिरकते हों ज्योति स्वर, काल के अवशेष पर,महकते हों पारिजात, ज्योति रश्मि केश…

नीलम वर्मा – (परिचय)

डॉ. नीलम वर्मा डॉ. नीलम वर्मा एक हृदयरोग विशेषज्ञ एवं कवयित्री हैं। कल्पतरु की ओर से वे ‘कविता विदूषी’ सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं । यह सम्मान उन्हें भगवद्गीता की…

विज्ञान व्रत की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

विज्ञान व्रत की ग़ज़लें -एक- मैं था तनहा एक तरफ़और ज़माना एक तरफ़ तू जो मेरा हो जातामैं हो जाता एक तरफ़ अब तू मेरा हिस्सा बनमिलना-जुलना एक तरफ़ यों…

विज्ञान व्रत – (परिचय)

विज्ञान व्रत जन्म-तिथि : 17 अगस्त 1943 जन्म-स्थान : तेड़ा (मेरठ) उ प्र शिक्षा : M A ललित कला, B. Ed, डिप्लोमा — चित्रकला (राजस्थान) सम्प्रति : लेखन तथा चित्रकला…

वसन्त तो आ चुका है – (कविता)

वसन्त तो आ चुका है पक रहा है मौसमअमराइयाँ खदक रही हैं मीठी आँच परतितलियों पर मढ़ा हुआ सोनाचम-चम चमक रहा हैचंगुलों में लौट आयी हैं सुगंधियाँ;पूरे उफान पर है-नुचे…

दलदल के फूल – (कविता)

दलदल के फूल मैंग्रूव के जंगलों में छितरायीअनगढ़ और भयावनी दुनियाबदलती रहती हैहर घण्टे अपना चेहरापीछे से समन्दर भीमैदान बदल-बदल करखेलता रहता हैलहरों के खेल… सरकण्डों और मिट्टी के सहारे…

कमीज़ – (कविता)

कमीज़ कमरे की दीवार परखूँटी से झूलती कमीज़मेरी अपनी पहचान हैगोकि मसक गयी है जगह -जगह सेपर वर्षों बाद भी उतरा नहीं है इसका कड़क रंग बनिये की पुरानी उधारीऔर…

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