Category: भारत

दिन विशेष (अनुवाद) में श्री एम. पी. दामोदरन द्वारा अनुवादित कविताएँ

दिन विशेष (अनुवाद) में श्री एम. पी. दामोदरन द्वारा अनुवादित कविताएँ श्री एम. पी. दामोदरन की मलियाली भाषा में लिखी प्रस्तुत कविता वस्तुत गुरु वंदना के साथ ही ईश्वर की…

गुयाना की संस्कृति में निहित भगवान राम : सुनील कुमार सिंह

गुयाना की संस्कृति में निहित भगवान राम : सुनील कुमार सिंह इस आलेख में लेखक सुनील कुमार सिंह ने लैटिन अमेरिका के गुयाना देश में विस्तारित भारतीय संस्कृति की छबियों…

विशेष विमर्श में अतिला कोतलावल की कविताएँ

विशेष विमर्श में अतिला कोतलावल की कविताएँ अतिला कोतलावल का नाम हिंदी भाषा शिक्षक, दुभाषिया, अनुवादक और प्रेरक वक्ता के रूप में जाना-पहचाना है। श्रीलंका की राजधानी से सुदूर पश्चिम…

विशेष विमर्श में डॉ. मनोज कामदेव की कहानी “साइलेंट डाइवोर्स”

विशेष विमर्श में डॉ. मनोज कामदेव की कहानी “साइलेंट डाइवोर्स” प्रस्तुत कहानी में डॉ मनोज कामदेव आज के महत्वाकांक्षा से भरे जीवन में रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियों का ज़िक्र…

युवा लेखन विशेष विमर्श में दीप्ति शर्मा की कविताएँ

युवा लेखन विशेष विमर्श में दीप्ति शर्मा की कविताएँ तीनों कविताएँ ‘आज़माइश’, ‘बदलते रंगों में’ और ‘पिता’ जीवन, प्रेम और पारिवारिक संवेदना के विविध पक्षों को मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त…

गुरुदत्त : एक शापित गंधर्व – नेहा भांडारकर

गुरुदत्त : एक शापित गंधर्व – नेहा भांडारकर दिनांक: 9 जुलाई, 1925 को बंगलुरु में जन्मे, गुरु दत्त का नाम सुनते ही इंडियन सिनेमा के एक अनोखे, रहस्यमयी और टैलेंटेड…

विशेष विमर्श में पद्मश्री के. एस. निसार अहमद की कन्नड़ कविता का डॉ. मैथिली पी. राव द्वारा हिन्दी अनुवाद

विशेष विमर्श में पद्मश्री के. एस. निसार अहमद की कन्नड़ कविता का डॉ. मैथिली पी. राव द्वारा हिन्दी अनुवाद परिचय : बेंगलुरु निवासी मैथिली पी. राव (जन्म : 1970) ने…

मनाली के इग्लू ( यात्रा संस्मरण) भाग – 3 : मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’

मनाली के इग्लू ( यात्रा संस्मरण) भाग – 3 : मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ 23 जनवरी 2021 आँख खुली तो सवेरा हो चुका था, हालांकि धूप और सूरज का नामोनिशान नहीं…

विशेष विमर्श में ऋचा गिरि की कविताएँ

विशेष विमर्श में ऋचा गिरि की कविताएँ हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता लेखन में ऋचा गिरि जी की गहरी रुचि है। अपनी संवेदनाओं, अनुभवों और विचारों की अभिव्यक्ति के लिए वे…

हरेली पर्व : वृंदा पंचभाई

हरेली पर्व : वृंदा पंचभाई हरियाली का पर्व हरेलीमनभावन है पर्व हरेलीहल,कुदाल,रापा,नागरकरते पूजा पर्व हरेली पिट्टुल,बिल्लस, भौरांबांटी,फुगड़ी खेल न्यारेगेड़ी चढ़ते ये बच्चे प्यारेबरखा का यह पर्व हरेली बबरा चीला पकवान…

दूर तक फैला हुआ एकान्त : विज्ञान व्रत

दूर तक फैला हुआ एकान्त : विज्ञान व्रत दूर तक फैला हुआ एकान्तसाथ में बैठी हुईं तनहाइयाँ शब्द ने तोड़े सभी अनुबन्धचुप्पियों की आ रही है गन्धदूर तक फैला हुआ…

‘द’ डिक्टेटर का समापन भाषण : सूरज प्रकाश

‘द’ डिक्टेटर का समापन भाषण : सूरज प्रकाश मुझे खेद है, लेकिन मैं शासक नहीं बनना चाहता। यह मेरा काम नहीं है। किसी पर भी राज करना या किसी को…

शब्द उगने लगे, लेखन शुरू हो गया : देवेन मेवाड़ी

शब्द उगने लगे, लेखन शुरू हो गया : देवेन मेवाड़ी क्या बहुत लिखकर लेखक बन जाने की अभिलाषा रही?कतई नहीं। एक साथी का सवाल याद आता है, जो वे हर…

विशेष विमर्श में डॉ. सुरजीत पातर की पंजाबी कविता का डॉ. किरण खन्ना द्वारा हिन्दी अनुवाद

विशेष विमर्श में डॉ. सुरजीत पातर की पंजाबी कविता का डॉ. किरण खन्ना द्वारा हिन्दी अनुवाद डॉ. सुरजीत पातर पंजाबी कविता और ग़ज़ल के सर्वाधिक प्रतिष्ठित रचनाकार माने जाते हैंI…

पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर : विजय नगरकर

पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर : विजय नगरकर साहित्य की दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो समय की शिला पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर…

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर “वास्तेगुना-हुइंया”, “कुचु-पुचु”, “FOMO”, “MIA”, “Delulu”, “Clocked It”—ये शब्द कभी केवल सोशल मीडिया और युवाओं की बातचीत तक सीमित माने जाते थे।…

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पूँजी है।…

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र): डॉ. मोक्षेन्द्र

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र) : डॉ. मोक्षेन्द्र इस शोध-पत्र में हिंदीभाषी और हिंदीतर भाषी क्षेत्र के रूप में समूचे विश्व को…

इंदौर के साहित्यिक संस्मरणों की महक: ‘समय की रेत पर इंदौरी यादें’ – डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त’

इंदौर के साहित्यिक संस्मरणों की महक: ‘समय की रेत पर इंदौरी यादें’ – डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त’ स्वर्गीय दादा पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत जी ने न केवल मेरी पुस्तक…

श्रवणबेलगोला : इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत – डॉ.एस.ए.मंजुनाथ

श्रवणबेलगोला : इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत – डॉ.एस.ए.मंजुनाथ श्रवणबेलगोला भारत के प्रमुख जैन तीर्थों में से एक है। यह कर्नाटक के हासन जिले में स्थित विश्वविख्यात धार्मिक, ऐतिहासिक एवं…

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