Category: भारत

कंप्यूटर के विंडो के साथ आइए एक झरोखा भी खोलें : स्वरांगी साने

कंप्यूटर के विंडो के साथ आइए एक झरोखा भी खोलें : स्वरांगी साने ज्ञान हर तरफ़ बिखरा पड़ा है, है न? यह ज्ञान के विस्फोट का युग है। व्हाट्सऐप से…

भारत की संस्कृति अनोखी है

भारत की संस्कृति अनोखी है साम्प्रदायिक उत्पात के समय नोआखाली-प्रवास में एक दिन मनु गांधीजी के घी मल रही थीं और वह कुछ पेचीदा अंग्रेजी पत्र-व्यवहार सुन रहे थे। पत्र-व्यवहार…

आज का विमर्श रत्ना भदोरिया की दो कविताएँ

रायबरेली उत्तर प्रदेश की रत्ना भदौरिया की इन कविताओं को पढ़ते हुए आपको लगता है कि आप आज के समय से दो-चार हो रहे हैं। पेशे से वे नर्स हैं,…

प्रदक्षिणाम पदे पदे : डॉ. गरिमा संजय दुबे

प्रदक्षिणाम पदे पदे : डॉ. गरिमा संजय दुबे संसार का आदि तीर्थ, आदि कर्मकांड कदाचित परिक्रमा ही है। परिक्रमा अथवा प्रदक्षिणा की परंपरा और महत्व देखने चलते हैं तो पता…

स्वरांगी साने : न्यूटन के बहाने से….

स्वरांगी साने : न्यूटन के बहाने से…. यदि किसी क्षण आप असुरक्षित महसूस करते हैं, तो ऐसा महसूस कर पाने के लिए भी बड़े साहस की ज़रूरत होती है। दुर्बलता…

पर्यावरण भी हमारा घर : चेतन सिंह सोलंकी

पर्यावरण भी हमारा घर : चेतन सिंह सोलंकी हम घर का कचरा तो बुहार देते हैं, लेकिन बड़े घर यानी पर्यावरण को दूषित क्यों करते हैं? ये पृथ्वी हमारा बड़ा…

महान फ़िल्म द ग्रेट डिक्टेटर के अंत में चार्ली चैप्लिन का भाषण : शैलेन्द्र चौहान

महान फ़िल्म द ग्रेट डिक्टेटर के अंत में चार्ली चैप्लिन का भाषण : शैलेन्द्र चौहान मुझे खेद है लेकिन मैं शासक नहीं बनना चाहता। ये मेरा काम नहीं है। किसी…

वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”

वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” अम्मा, ज़रा देख तो ऊपरचले आ रहे हैं बादल ।गरज़ रहे हैं, बरस रहे हैं,दीख रहा है जल ही जल ।…

मिर्च का मज़ा ( बाल कविता ) रामधारी सिंह “दिनकर”

मिर्च का मज़ा ( बाल कविता ) रामधारी सिंह “दिनकर” एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी,लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में पानी। सोचा, क्या अच्छे…

चूहे की दिल्ली-यात्रा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”

चूहे की दिल्ली-यात्रा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” चूहे ने यह कहा कि चूहिया! छाता और घड़ी दो,लाया था जो बड़े सेठ के घर से, वह पगड़ी…

सूरज का ब्याह ( बाल कविता) : रामधारी सिंह “दिनकर”

सूरज का ब्याह ( बाल कविता) : रामधारी सिंह “दिनकर” उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है,वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने वाली है। मोर करेंगे…

नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”

नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं।मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूत्र मैं?किसको…

चांद का कुर्ता ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”

चांद का कुर्ता ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन…

स्वरांगी साने : नाम ही बदला है, घटना नहीं, कल सोनम थी, आज सिया, कल कोई और …

स्वरांगी साने : नाम ही बदला है, घटना नहीं, कल सोनम थी, आज सिया, कल कोई और … इस बार नाम सिया है, पिछले साल सोनम थी। अगली बार कोई…

भक्तिकाल के कवियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान – स्वरांगी साने

भक्तिकाल के कवियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान – स्वरांगी साने राष्ट्र का निर्माण सरल कार्य नहीं है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण से भी जटिल है क्योंकि इसमें किसी…

औकात – स्वरांगी साने

औकात – स्वरांगी साने दिवाकर लगातार प्रिया के बनाए भोजन की तारीफ़ किए जा रहे थे। लेकिन दिवाकर तारीफ़ों के पुल बाँधे जा रहा था। थोड़ी देर बाद प्रिया को…

‘विषुवत से कर्क तक’ – डॉ. आरती ‘लोकेश’ ( पुस्तक परिचय ) : सुनीता पाहूजा

एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना मात्र ही यात्रा नहीं कहलाता, बल्कि इसमें मनुष्य के अनुभवों, उसकी संवेदनाओं और दृष्टिकोण का विस्तार भी शामिल होता है। जब एक संवेदनशील…

“आधुनिकता का संत्रास और संबंधों का साधनीकरण” (आलेख) : मनोज श्रीवास्तव

“आधुनिकता का संत्रास और संबंधों का साधनीकरण” (आलेख) : मनोज श्रीवास्तव सन् १९८० में जब सुभाष घई की फ़िल्म ‘क़र्ज़’ भारतीय सिनेमाघरों में आई, तो दर्शकों ने उसे एक रोमांचक…

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा

अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है जुड़ना…

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ்

மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ் யோக வகுப்பில் எங்களிக்கப்பட்டதுமூச்சுப் பயிற்சிஅதாவது மூச்சை உள்ளிழுத்து வெளியே மெதுவாக விட வேண்டிய பயிற்சி. அப்போது நான் மூச்சின் வகைகளை உணர்ந்து சிந்தனையில் ஆழ்ந்தேன். அன்றாடம் நாம் ஓயாடிமூச்சிறைக்க வேலை…

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