Category: भारतीय रचनाकार

बुद्धत्व : एक परम उपलब्धि – (वैश्विक हिन्दी परिवार के 11 मई 2025 के कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट)

बुद्धत्व : एक परम उपलब्धि अज्ञानता के अंधकार को केवल ज्ञान का प्रकाश ही मिटा सकता है। “अप्प दीपो भव, अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनें। वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी…

माँ के हाथ का खाना – (मातृ दिवस विशेष)

– अनिल जोशी *** 1. माँ के हाथ का खाना बहुत स्वादिष्ट खाना बनाती है तुम्हारी मां,कहा एक मित्र ने, पूछ कर आना उनसे,कौन से मसाले डालती हैं वो,हँस पड़ी…

मराठी कवि अनिल: एक साहित्यिक अर्थात् शैक्षणिक दिग्गज – (दिन विशेष)

मराठी कवि अनिल: एक साहित्यिक अर्थात् शैक्षणिक दिग्गज ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र आज, ८ मई, आत्माराम रावजी देशपांडे, जिन्हें कवि ‘अनिल’ के नाम से जाना जाता है, की पुण्यतिथि…

कमरा का कमरे क्यों हो जाता है? – (आलेख)

कमरा का कमरे क्यों हो जाता है? डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम चाय के खोखे पर इधर – उधर की चल रही थी। प्रोफेसर गुप्ता ने हिंदी की बखिया उधेड़ते हुए…

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा: जब संगीत मौन हो गया – (आलेख)

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा : जब संगीत मौन हो गया – प्रस्तुति- विजय नगरकर अप्रैल की तपती दोपहर थी। सड़कें सुनसान थीं, जैसे खुद शहर ने भी मौन…

राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी – (परिचय)

डॉ. राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी जन्म : 13 नवंबर 1944, मथुरा, उत्तर प्रदेश । डॉ. राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी भारत में लोककथा अध्ययन, इंडोलॉजी और ब्रजभाषा साहित्य हिंदी विद्वान हैं। उन्हें 1973…

भारतीय संस्कृति की पैरोकार, जिंदादिल, सुलझी हुई बड़ी बहन जय वर्मा –  (संस्मरण)

भारतीय संस्कृति की पैरोकार, जिंदादिल, सुलझी हुई बड़ी बहन जय वर्मा डॉ. संदीप अवस्थी, राजस्थान, भारत “डॉक्टर साहब ने ही मेरी रचनाधर्मिता को नए आयाम दिए। वह (डॉक्टर महिपाल जी,…

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस – (आलेख)

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र मराठी राजभाषा दिन और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भूमिका 1 मई 1960 को जब महाराष्ट्र राज्य की स्थापना भाषावार प्रांत रचना…

ब्रिटेन के प्रवासी हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत – (संस्मरण)

ब्रिटेन के प्रवासी हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत –तरुण कुमार ब्रिटेन में हिंदी भाषा की समर्पित सेविका और साहित्य की प्रतिष्ठित रचनाकार जय वर्मा का 22 अप्रैल…

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – (आलेख)

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – मनोज श्रीवास्तव कल भोपाल विश्वविद्यालय में Role of Yoga in Psycho-somatic disorders में बोलते हुए मैंने कहा कि योग मन का जनतंत्र है।…

मनोज कुमार श्रीवास्तव – (परिचय)

मनोज कुमार श्रीवास्तव सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन भारतीय राजस्व सेवा 1985 बैच भारतीय प्रशासनिक सेवा 1987 बैच संप्रति-राज्य निर्वाचन आयुक्त एतद्पूर्व- मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग मंदसौर, राजगढ़,…

जय वर्मा के कहानी संग्रह ‘सात कदम’ की अनीता वर्मा की समीक्षा – (यू-ट्यूब)

https://www.youtube.com/watch?v=TJ4g3gAGCEA

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल (2) – (यात्रा संस्मरण)

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल वरुण कुमार “रह न जाए मेरी-तेरी बात आधी…” मन को संतोष न था। इतनी चीजें देखी और सोची थीं, किंतु अभिव्यक्ति एक ही…

राजभाषा संस्मरण – (संस्मरण)

राजभाषा संस्मरण ~ विजय नगरकर, महाराष्ट्र हमारे ज़िले के उस शांत और नैसर्गिक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित महाविद्यालय का वातावरण आज भी मेरी स्मृति में ताज़ा है। मुझे वहाँ हिंदी…

अपनी राह की अन्वेषक – (संस्मरण)

अपनी राह की अन्वेषक -प्रेम जन्मेजय 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्टस फैक्लटी में मेरे साहित्यिक व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले शिक्षाकाल का आंरभ हुआ तो लगा कि कुएं से…

मनाली के इग्लू – (यात्रा संस्मरण)

मनाली के इग्लू (दूसरा दिन) मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ 22 जनवरी 2021 ऊंघते पहाड़ों के बीच घुमावदार सड़कों पर बस आगे बढ़ती अपने पीछे जंगल, बस्ती एवं छोटी – छोटी दुकानों…

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र का वैश्विक सम्मान – (लेख)

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल प्रस्तुति- डॉ. विजय नगरकर भारत से भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड…

‘मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध’ – सुनीता पाहूजा – (पुस्तक परिचय)

मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध मॉरीशस के द्वीपीय सौंदर्य में रची-बसी हिंदी साहित्य की अनूठी गंध — एक समर्पण, एक संवाद हिंद महासागर के मध्य स्थित सुरम्य द्वीप राष्ट्र मॉरीशस, जहाँ…

निर्मला जैन मैम – (संस्मरण)

निर्मला जैन मैम प्रो.रेखा सेठी हिंदी की स्त्री रचनाकारों की कतार में आलोचक बहुत कम हैं। जेंडर और साहित्य के रिश्तों की पड़ताल में एक अदृश्य-सा समझौता दिखाई पड़ता है।…

डॉ. लता सुमंत – (हिंदी के विकास में हिंदीतर)

डॉ. लता सुमंत : एक बहुआयामी साहित्यकार डॉ.विजय नगरकर परिचय डॉ. लता सुमंत का नाम हिंदी, मराठी और गुजराती साहित्य जगत में एक प्रतिष्ठित और सशक्त रचनाकार के रूप में…

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