Category: विधा

सर विंस्टन चर्चिल मेरी मां को जानते थे – (कविता)

डॉ. सत्येंद्र श्रीवास्तव, ब्रिटेन *** सर विंस्टन चर्चिल मेरी मां को जानते थे सर विंस्टन चर्चिल जानते थे कि भारत क्या है।वे जानते थेक्योंकि वे मानते थे कि भारत ब्रिटिश-साम्राज्य…

जय वर्मा के कहानी संग्रह ‘सात कदम’ की अनीता वर्मा की समीक्षा – (यू-ट्यूब)

https://www.youtube.com/watch?v=TJ4g3gAGCEA

चेतावनी – (कविता)

बृजेंद्र कुमार भगत ‘मधुकर’ (राष्ट्रकवि), मॉरीशस चेतावनी हिंदी गई रसातल में तो गई हमारी आशा,संस्कृति सिसक-सिसक रोएगी धर्म मरेगा प्यासा।हिंदी को कुचलेगी प्यारे गौरांगों की भाषा,हिंदू एक न होगा जग…

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल (2) – (यात्रा संस्मरण)

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल वरुण कुमार “रह न जाए मेरी-तेरी बात आधी…” मन को संतोष न था। इतनी चीजें देखी और सोची थीं, किंतु अभिव्यक्ति एक ही…

राजभाषा संस्मरण – (संस्मरण)

राजभाषा संस्मरण ~ विजय नगरकर, महाराष्ट्र हमारे ज़िले के उस शांत और नैसर्गिक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित महाविद्यालय का वातावरण आज भी मेरी स्मृति में ताज़ा है। मुझे वहाँ हिंदी…

अपनी राह की अन्वेषक – (संस्मरण)

अपनी राह की अन्वेषक -प्रेम जन्मेजय 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्टस फैक्लटी में मेरे साहित्यिक व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले शिक्षाकाल का आंरभ हुआ तो लगा कि कुएं से…

आदमी और कबूतर – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आदमी और कबूतर (१) नाम देकरसभ्यता का विकासछीन करधरती और आकाशबनाये जा रहेकंक्रीट के दरबेतैयारी हो चुकी है पूरीआदमी को कबूतर बनाने की (२) कबूतरशांति का प्रतीक…

पावस – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका पावस (१) जाते-जातेसावन डाकिये नेबचे बादलों के बण्डल कोबढ़ा दिया भादों कोताकि धरती परजल का वितरणहोता रहे निरंतर-निर्बाध| (२) सूरज साहब के नामधूप की छुट्टियों की अर्जीबंद…

समय सबसे बड़ा छन्ना – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका समय सबसे बड़ा छन्ना समय सबसे बड़ा छन्नाठोस रह जाता हैतरल बह जाता है. मौन सबसे बड़ा संवादकोलाहल से आगेअनकहा कह जाता है. दुर्ग हो असत्य काचाहे…

आत्मा की अदालत – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आत्मा की अदालत ईमान के लिए अगरबिगाड़ की बात करोगे?अपनी बर्बादी का गड्ढाक्या खुद खोदोगे? किसी का कुछ जायेगा नहींअपना नुकसान आप भरोगे अलगू चौधरी के कामजुम्मन…

मनाली के इग्लू – (यात्रा संस्मरण)

मनाली के इग्लू (दूसरा दिन) मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ 22 जनवरी 2021 ऊंघते पहाड़ों के बीच घुमावदार सड़कों पर बस आगे बढ़ती अपने पीछे जंगल, बस्ती एवं छोटी – छोटी दुकानों…

एक दिन सुबह – (कहानी)

एक दिन सुबह अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद एक एकदम नये और अंजाने शहर में बसने का फैसला मेरा ही था। फैसलों में किसी की…

विपक्ष की कलम से – (व्यंग्य)

विपक्ष की कलम से – अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आज तक आपने सरकार की बातें ही सुनी हैं। आज मैं विपक्ष आपसे इस लेख के माध्यम से कुछ साझा करना चाहता…

अमरेन्द्र कुमार की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका ग़ज़ल -1 सब दिन ही मालिक केसब दिन ही हैं अच्छे। तम के झोंके सहतेतन के ये घर कच्चे। हम भी अब हो जाएबच्चे मन के सच्चे।…

लेखनी में धार हो – (कविता)

संगीता चौबे पंखुड़ी, कुवैत ***** लेखनी में धार हो वीर रस की हो प्रचुरता, ओज का अंगार हो।हर सदी की माँग है यह, लेखनी में धार हो ।। लिख सके…

यह दौड़ती भागती सड़कें – (कविता)

पंकज शर्मा, अमेरिका *** यह दौड़ती भागती सड़कें दिन रात यह जागती सड़केंकिसी को मंज़िल तक पहुंचाएंकिसी को यूँ ही भटकती सड़केंकहीं पे कन्धा दे अर्थी कोकहीं पे ढोल बजाती…

पंकज शर्मा की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

पंकज शर्मा, अमेरिका 1. कभी तो पूछो मुझसे भी ज़िंदा हूँ या मर गयाजो ज़िंदा है वो मैं नहीं मैं ही हूँ जो मर गया एक अधूरा रस्ता था न…

‘मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध’ – सुनीता पाहूजा – (पुस्तक परिचय)

मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध मॉरीशस के द्वीपीय सौंदर्य में रची-बसी हिंदी साहित्य की अनूठी गंध — एक समर्पण, एक संवाद हिंद महासागर के मध्य स्थित सुरम्य द्वीप राष्ट्र मॉरीशस, जहाँ…

आरती लोकेश की नई प्रकाशित पुस्तक ‘स्याह धवल’ – (पुस्तक समीक्षा)

पुस्तक की प्रस्तावना : ‘गद्य साहित्य में विविध आयामों के इंद्रधनुष‘ हरिहर झा, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया “पुस्तक पढ़ने का आनन्द इसमें है कि जिस विषय में हमारी रुचि हो वह सब…

निर्मला जैन मैम – (संस्मरण)

निर्मला जैन मैम प्रो.रेखा सेठी हिंदी की स्त्री रचनाकारों की कतार में आलोचक बहुत कम हैं। जेंडर और साहित्य के रिश्तों की पड़ताल में एक अदृश्य-सा समझौता दिखाई पड़ता है।…

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