Category: भारतीय रचनाकार

शस्य श्यामला वितान – (कविता)

– डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज शस्य श्यामला वितान (श्येनिका छंद-२१२ १२१ २१२ १२) शस्य श्यामला वितान है धरा।उर्वरा स्वदेश है हरा भरा॥हैं उपत्यका नवीन वेश में।मेखला विराजमान देश में॥…

जल ही जीवन – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता जल ही जीवन बहता पानी नदिया हैझरता पानी झरनाबरसता है तो बारिशआँखों में डबडबाए तो आँसूफूल पंखुरी पर लरजती ओस की बूँदजमकर हिमशिला, फ्रीजर में रख दो…

पुरुष नहीं रोते – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता पुरुष नहीं रोते तुम रोती हो, हँसती हो, खुलकर अपनी बात कहती होतारसप्तक में, कोई बात पसंद न आने पर, गुस्सा करती हो,खीजती हो, झल्लाती हो, बर्तन…

रोबोट: एक शब्द की अनोखी यात्रा – (आलेख)

रोबोट: एक शब्द की अनोखी यात्रा ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र 1920 का साल, जब चेक लेखक कारेल चापेक ने अपनी नाटकीय कृति R.U.R. (रॉसुम्स यूनिवर्सल रोबोट्स) के माध्यम से…

‘मानस’ में रामभक्त के मापदंड – (आलेख)

‘मानस’ में रामभक्त के मापदंड प्रो.आलोक गुप्त, पूर्व प्रोफेसर, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसी के सदाचार और भक्ति को अन्योन्याश्रित बताया है। वैसे तो इसमें कोई नवीनता…

कट्टी बट्टी – (आलेख)

कट्टी बट्टी ~डॉ सुरेश पंत (शब्दों के साथ साथ के लेखक) “कट्टी तो कट्टी बारह बजे बट्टी मैं खाऊँ आइस्क्रीम तू खाए मिट्टी …… हा-हा, हा-हा-हा !!!” हमारा बचपन कट्टी-बट्टी…

महाकवि बिहारी – (आलेख)

महाकवि बिहारी -राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी महाकवि बिहारी की गणना रीतिकाल के राज्याश्रित कवियों में ही की जाती है। महाराज जयसिंह के दरबार में थे ही, किन्तु राजा के मन में…

बुद्धत्व : एक परम उपलब्धि – (वैश्विक हिन्दी परिवार के 11 मई 2025 के कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट)

बुद्धत्व : एक परम उपलब्धि अज्ञानता के अंधकार को केवल ज्ञान का प्रकाश ही मिटा सकता है। “अप्प दीपो भव, अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनें। वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी…

माँ के हाथ का खाना – (मातृ दिवस विशेष)

– अनिल जोशी *** 1. माँ के हाथ का खाना बहुत स्वादिष्ट खाना बनाती है तुम्हारी मां,कहा एक मित्र ने, पूछ कर आना उनसे,कौन से मसाले डालती हैं वो,हँस पड़ी…

मराठी कवि अनिल: एक साहित्यिक अर्थात् शैक्षणिक दिग्गज – (दिन विशेष)

मराठी कवि अनिल: एक साहित्यिक अर्थात् शैक्षणिक दिग्गज ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र आज, ८ मई, आत्माराम रावजी देशपांडे, जिन्हें कवि ‘अनिल’ के नाम से जाना जाता है, की पुण्यतिथि…

कमरा का कमरे क्यों हो जाता है? – (आलेख)

कमरा का कमरे क्यों हो जाता है? डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम चाय के खोखे पर इधर – उधर की चल रही थी। प्रोफेसर गुप्ता ने हिंदी की बखिया उधेड़ते हुए…

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा: जब संगीत मौन हो गया – (आलेख)

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा : जब संगीत मौन हो गया – प्रस्तुति- विजय नगरकर अप्रैल की तपती दोपहर थी। सड़कें सुनसान थीं, जैसे खुद शहर ने भी मौन…

राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी – (परिचय)

डॉ. राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी जन्म : 13 नवंबर 1944, मथुरा, उत्तर प्रदेश । डॉ. राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी भारत में लोककथा अध्ययन, इंडोलॉजी और ब्रजभाषा साहित्य हिंदी विद्वान हैं। उन्हें 1973…

भारतीय संस्कृति की पैरोकार, जिंदादिल, सुलझी हुई बड़ी बहन जय वर्मा –  (संस्मरण)

भारतीय संस्कृति की पैरोकार, जिंदादिल, सुलझी हुई बड़ी बहन जय वर्मा डॉ. संदीप अवस्थी, राजस्थान, भारत “डॉक्टर साहब ने ही मेरी रचनाधर्मिता को नए आयाम दिए। वह (डॉक्टर महिपाल जी,…

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस – (आलेख)

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र मराठी राजभाषा दिन और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भूमिका 1 मई 1960 को जब महाराष्ट्र राज्य की स्थापना भाषावार प्रांत रचना…

ब्रिटेन के प्रवासी हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत – (संस्मरण)

ब्रिटेन के प्रवासी हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत –तरुण कुमार ब्रिटेन में हिंदी भाषा की समर्पित सेविका और साहित्य की प्रतिष्ठित रचनाकार जय वर्मा का 22 अप्रैल…

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – (आलेख)

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – मनोज श्रीवास्तव कल भोपाल विश्वविद्यालय में Role of Yoga in Psycho-somatic disorders में बोलते हुए मैंने कहा कि योग मन का जनतंत्र है।…

मनोज कुमार श्रीवास्तव – (परिचय)

मनोज कुमार श्रीवास्तव सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन भारतीय राजस्व सेवा 1985 बैच भारतीय प्रशासनिक सेवा 1987 बैच संप्रति-राज्य निर्वाचन आयुक्त एतद्पूर्व- मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग मंदसौर, राजगढ़,…

जय वर्मा के कहानी संग्रह ‘सात कदम’ की अनीता वर्मा की समीक्षा – (यू-ट्यूब)

https://www.youtube.com/watch?v=TJ4g3gAGCEA

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल (2) – (यात्रा संस्मरण)

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल वरुण कुमार “रह न जाए मेरी-तेरी बात आधी…” मन को संतोष न था। इतनी चीजें देखी और सोची थीं, किंतु अभिव्यक्ति एक ही…

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